जबलपुर की हवा चिंताजनक स्थिति में, रात आठ बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक 147 दर्ज, पिछले सप्ताह की तुलना में आंशिक सुधार

जबलपुर की हवा चिंताजनक स्थिति में, रात आठ बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक 147 दर्ज, पिछले सप्ताह की तुलना में आंशिक सुधार

प्रेषित समय :20:40:23 PM / Fri, Jan 9th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. वायु गुणवत्ता सूचकांक 9 जनवरी 2026 की रात करीब आठ बजे  लगभग 147 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण मापदंडों के अनुसार “खराब” श्रेणी में आता है। यह स्थिति संकेत देती है कि शहर की हवा अब भी स्वच्छ स्तर से काफी दूर है और वातावरण में सूक्ष्म प्रदूषक कणों की मात्रा सामान्य से अधिक बनी हुई है। सर्दी के मौसम में हवा की गति कम होने, तापमान में गिरावट और नमी बढ़ने के कारण प्रदूषक तत्व वातावरण में लंबे समय तक टिके रहते हैं, जिससे वायु गुणवत्ता प्रभावित होती है।

आंकड़ों के अनुसार, 9 जनवरी की रात दर्ज किया गया वायु गुणवत्ता सूचकांक पिछले सप्ताह की तुलना में कुछ कम जरूर है, लेकिन यह राहत अस्थायी मानी जा रही है। एक सप्ताह पहले जबलपुर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 180 से 220 के बीच दर्ज किया गया था, जो “अत्यंत खराब” श्रेणी के करीब पहुंच चुका था। उस समय हवा में अत्यंत सूक्ष्म कणों की मात्रा काफी अधिक पाई गई थी। मौजूदा आंकड़े यह बताते हैं कि स्थिति में हल्का सुधार हुआ है, लेकिन अभी भी हवा “मध्यम” या “अच्छी” श्रेणी तक नहीं पहुंच सकी है।

वायु गुणवत्ता सूचकांक 147 का स्तर यह दर्शाता है कि हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे सूक्ष्म कणों की मात्रा अनुमेय सीमा से अधिक है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार ये कण इतने छोटे होते हैं कि सांस के जरिए सीधे फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं और लंबे समय तक शरीर में बने रहते हैं। पिछले सप्ताह की तुलना में इन कणों की मात्रा में थोड़ी कमी दर्ज की गई है, लेकिन अब भी यह स्तर चिंताजनक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम की स्थिति ऐसी ही बनी रही तो आने वाले दिनों में वायु गुणवत्ता में फिर गिरावट आ सकती है।

पिछले सात दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 3 और 4 जनवरी को जबलपुर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 के आसपास दर्ज किया गया था। 5 और 6 जनवरी को इसमें मामूली गिरावट आई और यह 170 से 180 के बीच रहा। 7 जनवरी को सूचकांक 160 के आसपास दर्ज किया गया, जबकि 8 जनवरी की रात यह लगभग 150 के करीब पहुंचा। 9 जनवरी को दर्ज किया गया 147 का आंकड़ा यह बताता है कि प्रदूषण का स्तर धीरे-धीरे कम तो हो रहा है, लेकिन अभी भी सुरक्षित सीमा से ऊपर बना हुआ है।

वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो सर्दियों में तापमान उलटाव की स्थिति बनती है, जिसमें ठंडी हवा नीचे और गर्म हवा ऊपर की परत में रहती है। इस स्थिति में प्रदूषक तत्व ऊपर नहीं जा पाते और जमीन के नजदीक ही जमा हो जाते हैं। यही कारण है कि सर्दियों के महीनों में जबलपुर समेत मध्य भारत के कई शहरों में वायु गुणवत्ता लगातार खराब बनी रहती है। इसके साथ ही शहर में वाहनों की बढ़ती संख्या, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और ईंधन से निकलने वाला धुआं भी प्रदूषण के स्तर को बढ़ाने में भूमिका निभाता है।

वायु गुणवत्ता के आंकड़े यह भी दर्शाते हैं कि पिछले सप्ताह की तुलना में कार्बन मोनोऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसे गैसों का स्तर अपेक्षाकृत स्थिर रहा है, जबकि सूक्ष्म कणों में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। यही वजह है कि सूचकांक 200 के पार जाने के बजाय 150 के नीचे आ सका। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक यह सूचकांक 100 से नीचे नहीं आता, तब तक हवा को पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता।

वायु गुणवत्ता सूचकांक को मापने की प्रणाली के अनुसार 0 से 50 के बीच का स्तर “अच्छा”, 51 से 100 “मध्यम”, 101 से 200 “खराब”, 201 से 300 “अत्यंत खराब” और 300 से ऊपर “गंभीर” माना जाता है। इस पैमाने पर देखें तो जबलपुर की मौजूदा स्थिति साफ तौर पर “खराब” श्रेणी में बनी हुई है। पिछले सप्ताह की तुलना में हालांकि यह “अत्यंत खराब” से नीचे आया है, लेकिन अब भी सुधार की काफी गुंजाइश है।

पर्यावरण से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में हवा की गति बढ़ती है या मौसम में बदलाव होता है तो वायु गुणवत्ता में और सुधार हो सकता है। वहीं, यदि ठंड और कोहरे की स्थिति बनी रहती है तो प्रदूषण का स्तर फिर बढ़ सकता है। पिछले वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि जनवरी के मध्य तक अक्सर वायु गुणवत्ता में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।

लंबे समय के आंकड़ों की तुलना करें तो यह भी सामने आता है कि पिछले साल इसी अवधि में जबलपुर का वायु गुणवत्ता सूचकांक औसतन 130 से 160 के बीच रहा था। इस वर्ष का मौजूदा आंकड़ा उसी दायरे में है, लेकिन कुछ दिनों में यह उससे अधिक भी दर्ज किया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि वायु प्रदूषण अब एक मौसमी समस्या के साथ-साथ शहरी जीवनशैली से जुड़ी स्थायी चुनौती बन चुका है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से वायु गुणवत्ता सूचकांक केवल एक संख्या नहीं, बल्कि यह वातावरण में मौजूद विभिन्न प्रदूषकों के संयुक्त प्रभाव को दर्शाता है। जब यह सूचकांक लंबे समय तक 150 के आसपास या उससे ऊपर बना रहता है, तो इसका असर पर्यावरण, जैव विविधता और शहरी पारिस्थितिकी तंत्र पर भी पड़ता है। पेड़-पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है और दृश्यता में भी कमी आती है।

कुल मिलाकर, 9 जनवरी 2026 की रात जबलपुर में दर्ज किया गया वायु गुणवत्ता सूचकांक यह बताता है कि शहर की हवा अभी भी पूरी तरह सुरक्षित स्थिति में नहीं पहुंची है। पिछले सप्ताह की तुलना में आंकड़ों में सुधार जरूर दर्ज किया गया है, लेकिन यह सुधार सीमित है। आने वाले दिनों में मौसम की चाल और प्रदूषण नियंत्रण के प्रयास ही तय करेंगे कि यह सुधार स्थायी रहेगा या नहीं। फिलहाल उपलब्ध वैज्ञानिक आंकड़े यही संकेत देते हैं कि जबलपुर को स्वच्छ हवा की ओर ले जाने के लिए निरंतर और दीर्घकालिक प्रयासों की आवश्यकता बनी हुई है।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-