गुवाहाटी। मणिपुर में लगातार हो रहे बम हमलों और बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच राज्य की ईंधन आपूर्ति व्यवस्था गंभीर संकट में आ गई है। इम्फाल घाटी और आसपास के इलाकों में पेट्रोलियम डीलरों ने शनिवार से पेट्रोल पंपों को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया है। यह फैसला हाल के दिनों में ईंधन प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर किए गए बम हमलों के विरोध में लिया गया है। डीलरों का कहना है कि बार-बार हो रहे हमलों और धमकियों के बावजूद उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं, जिससे उनका व्यवसाय और जान दोनों खतरे में हैं।
मणिपुर पेट्रोलियम डीलर्स फ्रेटरनिटी ने शुक्रवार को इस बंद का ऐलान किया था। यह निर्णय बिष्णुपुर जिले में गुरुवार रात एक पेट्रोल पंप के पास हुए बम धमाके के कुछ ही घंटों बाद लिया गया। इस हमले में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है, लेकिन इस घटना ने डीलरों और कर्मचारियों में गहरा डर पैदा कर दिया है। डीलरों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि बीते कुछ महीनों में कई बार पेट्रोल पंपों को निशाना बनाया गया है, जिससे उनका धैर्य अब जवाब दे चुका है।
शनिवार को इम्फाल घाटी में कई पेट्रोल पंपों पर ताले लटके नजर आए। आम दिनों में जहां वाहनों की लंबी कतारें दिखाई देती थीं, वहीं अब सन्नाटा पसरा हुआ है। पेट्रोल पंपों के बंद होने से आम जनता, सरकारी विभागों और आपात सेवाओं पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, डीलरों का कहना है कि यह कदम उन्होंने मजबूरी में उठाया है, क्योंकि जब तक उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती, तब तक पंप खोलना कर्मचारियों की जान को जोखिम में डालने जैसा होगा।
पेट्रोलियम डीलरों ने राज्यपाल अजय कुमार भल्ला को एक पत्र लिखकर अपनी चिंताओं से अवगत कराया है। पत्र में उन्होंने कहा है कि सरकार और प्रशासन द्वारा कुछ सुरक्षा उपाय किए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर हालात में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। डीलरों का आरोप है कि असामाजिक तत्व बेखौफ होकर बम हमले कर रहे हैं और पेट्रोल पंपों को निशाना बना रहे हैं, जबकि सुरक्षा बल समय रहते ऐसी घटनाओं को रोकने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
डीलरों ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि पेट्रोल पंप केवल व्यावसायिक प्रतिष्ठान नहीं हैं, बल्कि राज्य की जीवनरेखा हैं। इनके बंद होने से परिवहन व्यवस्था, जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति और आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। इसके बावजूद, डीलरों का कहना है कि जब उनकी जान पर बन आए तो कारोबार चलाना प्राथमिकता नहीं हो सकता। उन्होंने मांग की है कि पेट्रोल पंपों पर स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की जाए, संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात किए जाएं और हमलों के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ईंधन पंपों के बंद होने से उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। कई वाहन चालकों ने बताया कि यदि यह बंद लंबे समय तक चलता है तो सार्वजनिक परिवहन, निजी वाहन और यहां तक कि एंबुलेंस सेवाओं पर भी असर पड़ेगा। व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों ने भी चिंता जताई है कि ईंधन संकट से आर्थिक गतिविधियां ठप हो सकती हैं।
प्रशासन की ओर से अभी तक कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार सुरक्षा एजेंसियां हालिया बम धमाके की जांच में जुटी हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हमले के पीछे कौन से समूह या तत्व सक्रिय हैं और उनका मकसद क्या है। वहीं, सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त करने के विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि डीलरों को भरोसा दिलाया जा सके और ईंधन आपूर्ति बहाल हो सके।
मणिपुर पहले से ही लंबे समय से कानून-व्यवस्था और हिंसा की चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में पेट्रोल पंपों को निशाना बनाकर किए जा रहे हमले हालात को और गंभीर बना रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन प्रतिष्ठानों पर हमले केवल आर्थिक नुकसान ही नहीं पहुंचाते, बल्कि वे आम लोगों के मन में असुरक्षा की भावना भी पैदा करते हैं। इससे राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने के प्रयासों को झटका लग सकता है।
डीलरों ने साफ कर दिया है कि जब तक सरकार उनकी सुरक्षा को लेकर ठोस और भरोसेमंद कदम नहीं उठाती, तब तक यह बंद जारी रहेगा। उनका कहना है कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक मकसद से नहीं, बल्कि अपने और अपने कर्मचारियों की जान बचाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने राज्य सरकार और केंद्र से अपील की है कि वे स्थिति की गंभीरता को समझें और तुरंत प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था लागू करें।
फिलहाल, इम्फाल घाटी में पेट्रोल पंपों के बंद होने से हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। आम जनता की नजरें अब सरकार और प्रशासन पर टिकी हैं कि वे डीलरों की मांगों पर कितनी जल्दी और किस तरह से प्रतिक्रिया देते हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि सुरक्षा के मुद्दे पर सहमति बन पाती है या मणिपुर को लंबे ईंधन संकट का सामना करना पड़ेगा।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

