जबलपुर. एमपी के जबलपुर में नानाजी देशमुख यूनिवर्सिटी में पंचगव्य योजना के लिए सरकार ने करोड़ों रुपए भेजे. लेकिन अधिकारियों ने इस राशि को योजना पर खर्च करने की बजाय अपने ऐशा आराम में उड़ा दिए. पंचगव्य के रुपए से गाडिय़ां खरीदी गईं, उनकी मरम्मत कराई गई और करीब 3.5 करोड़ रुपए का घोटाला सामने आया. जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. संभागीय कमिश्नर के निर्देश पर तैयार जांच रिपोर्ट जल्द ही सरकार को भेजी जाएगी.
बताया गया है कि राज्य सरकार ने गोबर, गौमूत्र व दूध से बीमारियों पर रिसर्च के लिए 2011 में पंचगव्य योजना की शुरुआत की. इस योजना के तहत नानाजी देशमुख विश्वविद्यालय ने रिसर्च के लिए 8 लाख 75 हजार रुपए का प्रपोजल सरकार को भेजा. जिसमें कि स्वीकृति साढ़े तीन लाख रुपए की हुई. विश्वविद्यालय में इस योजना के तहत यहां पर पदस्थ यशपाल साहनी, सचिन कुमार जैन, गिरिराज सिंह सहित अन्य कर्मचारियों को काम करना था. उद्देश्य था कि पंचगव्य योजना में बेहतर तरीके से काम किया जाए. लेकिन इसके विपरीत उलट शुरुआत से ही इसमें घोटाला होना शुरू हो गया. योजना की पैसा कहीं और उड़ाया गया.
लिहाजा कुछ सालों बाद ही इसे बंद कर दिया गया. संभाग कमिश्नर धनंजय सिंह तक जब इस घोटाले की जानकारी पहुंची तो उन्होंने जबलपुर कलेक्टर को जांच के निर्देश दिए. कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के आदेश पर डिप्टी कलेक्टर रघुवीर सिंह मरावी और जिला कोषालय अधिकारी विनायकी लकरा ने जांच की तो कई अहम जानकारी सामने आई. जांच में पाया गया कि विश्वविद्यालय ने जिस पंचगव्य योजना के तहत साढ़े 3 करोड़ रुपए शासन से लिए थे, उसकी कोई गाइडलाइन ही नहीं थी कि इस राशि को किस तरह से और कहां खर्च करना है. जांच में यह भी सामने आया कि करीब 1 करोड़ 92 लाख रुपए में गोबर, गौमूत्र, गमला, कच्चा पदार्थ और कुछ मशीनों की खरीदी की गई.
जबकि बाजार में इन मशीनों की कीमत महज 15 से 20 लाख रुपए बताई जा रही है. योजना में शामिल अधिकारियों ने रिसर्च के नाम पर एक-दो नही बल्कि 20 से अधिक बार अलग-अलग शहर और राज्यों की हवाई यात्रा की. डा यशपाल साहनी, डा सचिन कुमार जैन, रिसर्चर गिरिराज सिंह ने गोवा, हैदराबाद, कोलकाता,बेंगलुरु सहित 20 से अधिक शहरों की हवाई यात्रा की. कलेक्टर द्बारा गठित की गई टीम ने जांच में यह भी पाया कि पंचगव्य योजना के पैसों का जमकर बंदरबांट किया गया है. जिस पैसों को योजना में खर्च करना था, उससे ना सिर्फ हवाई यात्रा की गई, बल्कि करीब साढ़े 7 लाख रुपए की नई कार खरीदी गई.
इसके साथ ही 7 लाख रुपए पेट्रोल-डीजल व मेंटनेंस में फूंक डाले. वाहनों के सुधार के लिए 3 लाख 50 हजार रुपए लेबर पेमेंट भी कर दी. इसके साथ ही करीब 15 लाख रुपए के टेबल और इलेक्ट्रानिक आइटम खरीद लिए. जांच टीम ने पाया कि जिस दौरान पंचगव्य योजना शुरू हुई थी. उस समय यशपाल साहनी, सचिन कुमार जैन, गिरिराज सिंह सहित अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं. जांच में यह भी पाया गया है कि विश्वविद्यालय के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध हो सकती है. डिप्टी कलेक्टर और विनायिका लकरा की जांच रिपोर्ट कलेक्टर के माध्यम से कमिश्रर तक पहुंच गई है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

