जबलपुर. सुव्यवस्थित विकास और मासूम नागरिकों की गाढ़ी कमाई को भू माफियाओं के चंगुल से बचाने के लिए नगर निगम प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई का बिगुल फूंक दिया है। शहर को सुंदर, व्यवस्थित और अवैध निर्माणों के जाल से मुक्त करने की दिशा में निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने एक बेहद सख्त रुख अपनाते हुए कॉलोनी सेल की समीक्षा बैठक में उन कॉलोनाइजरों को अंतिम चेतावनी दे दी है जो नियमों को ताक पर रखकर अवैध कॉलोनियों का जाल बिछा रहे हैं। इस उच्च स्तरीय बैठक में निगमायुक्त ने स्पष्ट और कड़े लहजे में अधिकारियों को निर्देशित किया है कि शहर के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी सफेदपोश या रसूखदार कॉलोनाइजर को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन की इस 'तेखी' कार्रवाई ने उन लोगों की नींद उड़ा दी है जो बिना अनुमति के कृषि भूमि या प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्लाटिंग कर आम जनता को सुनहरे सपने दिखाकर ठगने का काम करते हैं। निगमायुक्त ने दोटूक कहा है कि नागरिकों के हितों की सुरक्षा करना प्रशासन की सर्वोपरि जिम्मेदारी है और इसे सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम किसी भी हद तक सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
अक्सर यह देखा गया है कि शहर के बाहरी और विकासशील इलाकों में अवैध कॉलोनाइजर सस्ती जमीन का लालच देकर लोगों को जमीन बेच देते हैं, लेकिन बाद में वहां न तो सड़कें होती हैं, न नालियां और न ही बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं मिल पाती हैं। इन बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण अंततः वहां रहने वाली आम जनता को नरकीय जीवन जीने पर मजबूर होना पड़ता है और सारा बोझ नगर निगम के कंधों पर आ जाता है। इस गंभीर समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए निगमायुक्त अहिरवार ने एक अभेद्य 'त्रि-स्तरीय' रणनीति तैयार की है जिसके तहत अवैध निर्माण करने वालों के विरुद्ध अब केवल कागजी नोटिस नहीं बल्कि सीधे एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। प्रशासन ने तय किया है कि जो भी कॉलोनाइजर बिना सक्षम अनुमति और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के नक्शे के बिना जमीन बेचते हुए पाया जाएगा, उसके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कर उसे सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। इसके साथ ही, जिन साइट्स पर अवैध रूप से निर्माण कार्य चल रहा है, वहां नगर निगम का बुलडोजर बिना किसी पूर्व सूचना के चलेगा और किए गए निर्माण को मलबे में तब्दील कर दिया जाएगा।
नगर निगम की इस रणनीति का सबसे कड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा वह समन्वय है जो जिला पंजीयक और संबंधित एसडीएम के साथ बनाया जा रहा है। निगमायुक्त ने कड़े निर्देश दिए हैं कि ऐसी सभी अवैध कॉलोनियों की सूची तत्काल जिला पंजीयक को सौंपी जाए ताकि वहां होने वाली रजिस्ट्री और नामांतरण की प्रक्रिया को तुरंत प्रभाव से रोका जा सके। यह कदम उन मासूम खरीदारों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा जो अनजाने में अवैध कॉलोनियों में निवेश कर अपनी जीवन भर की जमा पूंजी गंवा देते हैं। रजिस्ट्री पर रोक लगने से कॉलोनाइजरों का पूरा नेटवर्क ध्वस्त हो जाएगा और उनके आर्थिक साम्राज्य पर गहरी चोट पहुंचेगी। बैठक में मौजूद अधिकारियों को यह भी आदेश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहकर ऐसी साइट्स की निगरानी करें जहां रातों-रात बाउंड्री वॉल या कच्चे रास्ते बनाकर प्लॉटिंग शुरू की जा रही है। ऐसे मामलों में कार्रवाई की जिम्मेदारी सीधे क्षेत्रीय वार्ड अधिकारियों और कॉलोनी सेल के प्रभारी की होगी, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही की गुंजाइश न रहे।
प्रशासन का यह कड़ा रुख केवल दंडात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य जबलपुर के सुनियोजित विकास को एक नई गति देना है। जब कॉलोनियां वैध होंगी और नियमों के दायरे में विकसित की जाएगी, तभी वहां रहने वाले नागरिकों को नगर निगम द्वारा दी जाने वाली सभी मूलभूत सुविधाएं जैसे कि सुव्यवस्थित जल निकासी, स्ट्रीट लाइट और कचरा प्रबंधन सुलभता से मिल सकेंगी। निगमायुक्त ने बैठक में साफ तौर पर कहा कि हमारा लक्ष्य केवल कार्रवाई करना नहीं है, बल्कि एक ऐसा वातावरण बनाना है जहां शहर का हर नागरिक एक सुरक्षित और सुविधायुक्त परिवेश में रह सके। अवैध कॉलोनियों के कारण शहर का बुनियादी ढांचा चरमरा जाता है और भविष्य की规划 (प्लानिंग) में बड़ी बाधा उत्पन्न होती है। इस बैठक में अपर आयुक्त अरविंद शाह, देवेंद्र सिंह चौहान और कॉलोनी सेल के प्रभारी सुनील दुबे सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्हें फील्ड पर उतरकर तत्काल परिणाम देने के निर्देश दिए गए हैं।
निगम की इस 'सर्जिकल स्ट्राइक' के बाद अब उन लोगों में हड़कंप है जो रसूख के दम पर अवैध निर्माण को अंजाम देते आए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी विभागीय अधिकारी की मिलीभगत पाई गई तो उस पर भी समान रूप से गाज गिरेगी। जबलपुर को एक 'स्मार्ट सिटी' के रूप में स्थापित करने के लिए इस तरह की कठोर कार्रवाई अनिवार्य मानी जा रही है। शहर की जनता ने भी निगम के इस फैसले का स्वागत किया है क्योंकि इससे न केवल भूमाफियाओं पर लगाम लगेगी बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता भी आएगी। अब शहर के हर कोने में अवैध कॉलोनाइजरों के विरुद्ध कार्रवाई की गूंज सुनाई देगी और आने वाले दिनों में कई बड़े नामों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि वे किसी भी लुभावने विज्ञापन के झांसे में आने से पहले नगर निगम के कॉलोनी सेल से उसकी वैधता की जांच अवश्य कर लें ताकि उनकी मेहनत की कमाई सुरक्षित रहे।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

