धुरंधर स्टाइल में NSA अजीत डोभाल का संबोधन-युवाओं से कहा इतिहास के घावों का जवाब, विकास और राष्ट्रीय शक्ति से देने का वक्त

धुरंधर स्टाइल में NSA अजीत डोभाल का संबोधन-युवाओं से कहा इतिहास के घावों का जवाब, विकास और राष्ट्रीय शक्ति से देने का वक्त

प्रेषित समय :17:40:31 PM / Sun, Jan 11th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने देश के युवाओं से आह्वान किया है कि वे भारत को हर क्षेत्र में महान और आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लें, क्योंकि देश के इतिहास में झेली गई पराधीनता, हमलों और अपमान का उत्तर अब केवल मजबूत और विकसित भारत के निर्माण से ही दिया जा सकता है. शनिवार को भारत मंडपम में आयोजित ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए डोभाल ने कहा कि बदला शब्द भले ही कठोर लगे, लेकिन यह एक बड़ी प्रेरक शक्ति बन सकता है, यदि उसका उद्देश्य राष्ट्रनिर्माण और सामूहिक प्रगति हो.

डोभाल ने कहा कि भारत को केवल अपनी सीमाओं पर ही नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक, तकनीकी और वैचारिक स्तर पर भी मजबूत होना होगा. उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज की पीढ़ी सौभाग्यशाली है कि उसने स्वतंत्र भारत में जन्म लिया है, जबकि उनकी पीढ़ी ने एक उपनिवेशित भारत को देखा और जिया. उन्होंने कहा कि देश के पूर्वजों ने आजादी के लिए असंख्य कष्ट सहे, संघर्ष किए और बलिदान दिए, तभी आज देश स्वतंत्र सांस ले पा रहा है.

अपने संबोधन में डोभाल ने महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद करते हुए कहा कि इन महापुरुषों ने केवल राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और राष्ट्रीय चेतना के लिए संघर्ष किया. उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास केवल गौरव से नहीं, बल्कि पीड़ा से भी भरा है, और यही पीड़ा आज के भारत को अधिक सजग, अधिक सशक्त और अधिक आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देती है.

डोभाल ने स्पष्ट किया कि इतिहास से बदला लेने का अर्थ हिंसा या प्रतिशोध नहीं है, बल्कि उन कमियों से सीख लेना है, जिनके कारण देश को बार-बार नुकसान उठाना पड़ा. उन्होंने कहा कि अतीत में सुरक्षा चूक, आंतरिक कमजोरियां और रणनीतिक असावधानियां भारत के लिए भारी पड़ीं. अब समय आ गया है कि युवा पीढ़ी उन गलतियों को दोहराने के बजाय उनसे सबक लेकर एक मजबूत और सतर्क राष्ट्र का निर्माण करे.

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा कि सुरक्षा केवल हथियारों और सेनाओं तक सीमित नहीं है. आर्थिक कमजोरी, तकनीकी पिछड़ापन और सामाजिक असमानता भी किसी देश की सुरक्षा को कमजोर करती है. उन्होंने कहा कि यदि भारत को सचमुच विकसित राष्ट्र बनना है, तो उसे उत्पादन, नवाचार, शिक्षा, अनुसंधान और उद्यमिता के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनना होगा. युवाओं को उन्होंने इस परिवर्तन की सबसे बड़ी ताकत बताया.

डोभाल ने युवाओं से आग्रह किया कि वे केवल नौकरी खोजने वाले न बनें, बल्कि रोजगार सृजन करने वाले बनें. उन्होंने कहा कि भारत की जनसांख्यिकीय शक्ति तभी वरदान बन सकती है, जब युवाओं में कौशल, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण हो. उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रनिर्माण केवल सरकार का काम नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग और विशेष रूप से युवाओं की जिम्मेदारी है.

अपने भाषण में डोभाल ने वैश्विक परिदृश्य का भी उल्लेख किया और कहा कि आज की दुनिया में शक्ति की परिभाषा तेजी से बदल रही है. उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा सुरक्षा जैसे नए क्षेत्र भविष्य की राष्ट्रीय सुरक्षा के केंद्र में होंगे. ऐसे में भारत के युवाओं को इन क्षेत्रों में नेतृत्व करने के लिए तैयार होना होगा.

उन्होंने यह भी कहा कि भारत को आत्मविश्वास के साथ अपने हितों की रक्षा करनी होगी. अतीत की गलतियों से सीख लेते हुए देश को ऐसी नीति और रणनीति अपनानी होगी, जिससे वह किसी भी दबाव या चुनौती का सामना कर सके. डोभाल ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय आवश्यकता है, और इसे साकार करने में युवाओं की भूमिका निर्णायक होगी.

कार्यक्रम के दौरान डोभाल ने युवाओं से संवाद करते हुए कहा कि राष्ट्रभक्ति केवल भावनाओं तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसे कर्म और आचरण में भी दिखाई देना चाहिए. उन्होंने कहा कि ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और उत्कृष्टता की भावना ही किसी भी देश को महान बनाती है. युवाओं से उन्होंने आग्रह किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ बनने का प्रयास करें और देश की प्रगति में योगदान दें.

‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ में देशभर से आए युवा नेताओं, छात्रों और नवाचार कर्ताओं ने हिस्सा लिया. कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को नीति निर्माण, नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ना है. डोभाल के संबोधन को उपस्थित युवाओं ने गंभीरता से सुना और इसे प्रेरणादायी बताया.

अंत में डोभाल ने कहा कि भारत का भविष्य उज्ज्वल है, लेकिन यह भविष्य अपने आप नहीं बनेगा. इसके लिए संकल्प, परिश्रम और सही दिशा की जरूरत है. उन्होंने कहा कि इतिहास के घावों का सबसे सशक्त उत्तर एक ऐसा भारत होगा, जो सुरक्षित, समृद्ध, आत्मनिर्भर और विश्व में सम्मानित हो. युवाओं से उन्होंने अपील की कि वे इस लक्ष्य को अपना व्यक्तिगत संकल्प बनाएं और भारत को हर मायने में महान बनाने में अपनी भूमिका निभाएं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-