स्मार्टफोन कंपनियों से सोर्स कोड मांगने की तैयारी केंद्र सरकार ने डेटा सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया

स्मार्टफोन कंपनियों से सोर्स कोड मांगने की तैयारी केंद्र सरकार ने डेटा सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया

प्रेषित समय :22:21:27 PM / Sun, Jan 11th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. ऑनलाइन धोखाधड़ी और डेटा लीक के बढ़ते मामलों के बीच केंद्र सरकार स्मार्टफोन सुरक्षा को लेकर बड़ा और सख्त कदम उठाने की तैयारी में है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों से उनके फोन का सोर्स कोड साझा करने की मांग कर सकती है. यह प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस व्यापक पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य देश में यूजर डेटा की सुरक्षा को मजबूत करना है. भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन बाजार है, जहां करीब 75 करोड़ मोबाइल फोन उपयोग में हैं.

सरकार की नई योजना Indian Telecom Security Assurance Requirements के तहत लाई जा रही है, जिसमें कुल 83 सुरक्षा मानक प्रस्तावित किए गए हैं. इनमें सबसे संवेदनशील और विवादास्पद प्रावधान स्मार्टफोन के सोर्स कोड तक सरकारी पहुंच को लेकर है. सोर्स कोड वह मूल प्रोग्रामिंग निर्देश होता है, जिस पर किसी भी स्मार्टफोन का पूरा ऑपरेटिंग सिस्टम और सॉफ्टवेयर काम करता है. सरकार का मानना है कि इस स्तर की पहुंच से फोन में मौजूद संभावित सुरक्षा खामियों, बैकडोर या साइबर जोखिमों की पहचान की जा सकेगी.

हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर वैश्विक टेक कंपनियों के बीच गहरी चिंता देखी जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, Apple और Samsung जैसी दिग्गज कंपनियां पर्दे के पीछे इस योजना का विरोध कर रही हैं. चार जानकार सूत्रों और सरकार व उद्योग से जुड़े गोपनीय दस्तावेजों की समीक्षा में यह सामने आया है कि कंपनियों का तर्क है कि इतनी व्यापक सुरक्षा शर्तों का दुनिया में कोई उदाहरण नहीं है. उनका कहना है कि सोर्स कोड साझा करने से उनकी बौद्धिक संपदा और व्यापारिक गोपनीयता खतरे में पड़ सकती है.

प्रस्तावित नियमों के तहत कंपनियों को न केवल सोर्स कोड साझा करना होगा, बल्कि बड़े सॉफ्टवेयर अपडेट के बारे में भी सरकार को पहले से सूचित करना होगा. सरकार का तर्क है कि बड़े अपडेट्स के जरिए कई बार सुरक्षा ढांचे में बदलाव होते हैं, जिनका असर करोड़ों यूजर्स पर पड़ सकता है. ऐसे में समय रहते जानकारी मिलने से साइबर हमलों और डेटा उल्लंघन को रोका जा सकेगा.

भारत में पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल भुगतान, ई-कॉमर्स और ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधों में भी तेज वृद्धि हुई है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फिशिंग, ऑनलाइन फ्रॉड और डेटा चोरी के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है. इसी पृष्ठभूमि में सरकार यह मानती है कि केवल ऐप्स या नेटवर्क स्तर की सुरक्षा पर्याप्त नहीं है, बल्कि डिवाइस के मूल सॉफ्टवेयर तक सुरक्षा जांच जरूरी हो गई है.

दूसरी ओर, टेक कंपनियों का कहना है कि सोर्स कोड तक सरकारी पहुंच से सुरक्षा बढ़ने के बजाय नए जोखिम पैदा हो सकते हैं. उनका तर्क है कि अगर संवेदनशील कोड लीक होता है या गलत हाथों में चला जाता है, तो यह हैकर्स के लिए और आसान रास्ता खोल सकता है. इसके अलावा कंपनियों को डर है कि इससे भारत में निवेश और नई तकनीक लाने की गति धीमी पड़ सकती है.

सूत्रों के मुताबिक, कंपनियां सरकार के साथ बातचीत में यह सुझाव दे रही हैं कि सुरक्षा ऑडिट के लिए किसी स्वतंत्र और विश्वसनीय थर्ड पार्टी मैकेनिज्म पर विचार किया जाए, ताकि सरकार के सुरक्षा उद्देश्य भी पूरे हों और कंपनियों की गोपनीयता भी बनी रहे. हालांकि, फिलहाल सरकार अपने प्रस्ताव पर कायम नजर आ रही है और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकों के डेटा संरक्षण से जोड़कर देख रही है.

यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब भारत पहले ही डेटा सुरक्षा और डिजिटल संप्रभुता को लेकर सख्त रुख अपना रहा है. डेटा लोकलाइजेशन, ऐप बैन और सख्त साइबर नियमों के बाद स्मार्टफोन सोर्स कोड का मुद्दा सरकार और वैश्विक टेक कंपनियों के बीच टकराव का नया बिंदु बनता दिख रहा है.

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह नियम लागू होता है तो इसका असर भारत में स्मार्टफोन उद्योग के पूरे इकोसिस्टम पर पड़ेगा. एक ओर यह कदम यूजर डेटा सुरक्षा को मजबूत कर सकता है, वहीं दूसरी ओर इससे भारत और वैश्विक टेक कंपनियों के रिश्तों में तनाव बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है.

फिलहाल सरकार और उद्योग के बीच इस प्रस्ताव को लेकर चर्चा जारी है. अंतिम फैसला क्या होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन इतना तय है कि स्मार्टफोन सुरक्षा को लेकर भारत एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां डेटा सुरक्षा, राष्ट्रीय हित और वैश्विक टेक व्यापार के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती होगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-