नई दिल्ली. भारतीय जेन-जी यानी 18 से 27 वर्ष की उम्र के युवाओं का करियर को लेकर नजरिया तेजी से बदल रहा है. एक हालिया रिपोर्ट, जो लिंक्डइन और रैंडस्टैड के संयुक्त अध्ययन पर आधारित है, बताती है कि आज का युवा वर्ग पारंपरिक नौकरियों से ज्यादा साइड हसल और फ्रीलांसिंग को प्राथमिकता दे रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, जेन-जी अब केवल स्थिर नौकरी या तयशुदा करियर पाथ पर भरोसा नहीं कर रही, बल्कि वह अपनी स्किल, आज़ादी और डिजिटल प्लेटफॉर्म की ताकत पर दांव लगा रही है.
रिपोर्ट में सामने आया है कि इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट या अन्य पारंपरिक डिग्रियों की तुलना में जेन-जी के बीच अब एआई, डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल मार्केटिंग, कंटेंट क्रिएशन, डिजाइनिंग और कोडिंग जैसी स्किल्स ज्यादा आकर्षण का केंद्र बन रही हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर #SkillFirst और #SideHustleCulture जैसे हैशटैग्स का ट्रेंड करना इसी बदलाव की ओर इशारा करता है. युवा अब सवाल कर रहे हैं कि चार साल की डिग्री के बजाय अगर छह महीने में कोई स्किल सीखी जा सकती है, जिससे कमाई भी हो और आज़ादी भी, तो वही बेहतर विकल्प क्यों न हो.
लिंक्डइन के आंकड़ों के अनुसार भारत में जेन-जी प्रोफेशनल्स का एक बड़ा हिस्सा फुल-टाइम नौकरी के साथ-साथ किसी न किसी साइड प्रोजेक्ट में सक्रिय है. इनमें फ्रीलांसिंग, स्टार्टअप के लिए पार्ट-टाइम काम, यूट्यूब चैनल, इंस्टाग्राम ब्रांड कोलैबरेशन, ब्लॉगिंग और एआई आधारित सर्विसेज शामिल हैं. रिपोर्ट बताती है कि जेन-जी के लिए नौकरी केवल आय का साधन नहीं है, बल्कि आत्म-अभिव्यक्ति और व्यक्तिगत ब्रांड बनाने का जरिया भी है.
रैंडस्टैड की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कोविड के बाद बदले वर्क कल्चर ने इस सोच को और मजबूत किया है. वर्क फ्रॉम होम, गिग इकॉनमी और ग्लोबल फ्रीलांस प्लेटफॉर्म्स ने युवाओं को यह एहसास कराया कि वे किसी एक कंपनी या शहर तक सीमित नहीं हैं. जेन-जी के लिए लैपटॉप और इंटरनेट ही नया ऑफिस है और क्लाइंट देश या विदेश कहीं से भी हो सकता है.
इस बदलाव का असर शिक्षा प्रणाली पर भी साफ दिखाई दे रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी संख्या में युवा अब पारंपरिक कॉलेज डिग्री के साथ-साथ ऑनलाइन कोर्स, माइक्रो-सर्टिफिकेशन और बूटकैंप्स की ओर रुख कर रहे हैं. एआई टूल्स, डिजिटल एड्स, सोशल मीडिया मैनेजमेंट और परफॉर्मेंस मार्केटिंग जैसे क्षेत्रों में स्किल्ड युवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है. कंपनियां भी अब केवल डिग्री के बजाय प्रैक्टिकल नॉलेज और प्रोजेक्ट एक्सपीरियंस को ज्यादा महत्व देने लगी हैं.
जेन-जी की सोच सिर्फ पैसा कमाने तक सीमित नहीं है. रिपोर्ट बताती है कि यह पीढ़ी फ्लेक्सिबिलिटी, वर्क-लाइफ बैलेंस और मेंटल हेल्थ को प्राथमिकता देती है. साइड हसल उन्हें यह आज़ादी देता है कि वे अपनी शर्तों पर काम करें, अपनी पसंद के प्रोजेक्ट चुनें और एक से ज्यादा इनकम सोर्स बनाएं. यही वजह है कि “वन जॉब फॉर लाइफ” की सोच अब धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है.
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि इस ट्रेंड के अपने जोखिम हैं. फ्रीलांसिंग और साइड हसल में आय की स्थिरता नहीं होती और सोशल सिक्योरिटी जैसी सुविधाएं भी सीमित रहती हैं. लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि जेन-जी इन चुनौतियों से भी वाकिफ है और इसलिए वह मल्टी-स्किलिंग और नेटवर्किंग पर जोर दे रही है. युवाओं का मानना है कि अगर एक स्किल काम न आए, तो दूसरी स्किल रास्ता खोल देगी.
सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं में भी यही ट्रेंड दिखाई देता है. लिंक्डइन पर युवा प्रोफेशनल्स अपनी डिग्री से ज्यादा अपने स्किल सेट और प्रोजेक्ट्स को हाइलाइट कर रहे हैं. इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर “डे इन द लाइफ ऑफ ए फ्रीलांसर” जैसे कंटेंट लोकप्रिय हो रहे हैं, जो जेन-जी को पारंपरिक नौकरी से अलग करियर मॉडल अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं.
रिपोर्ट यह भी बताती है कि आने वाले वर्षों में भारत की जॉब मार्केट में यह बदलाव और गहराएगा. एआई और ऑटोमेशन के बढ़ते इस्तेमाल के कारण कई पारंपरिक भूमिकाएं बदलेंगी या खत्म होंगी, ऐसे में स्किल-बेस्ड करियर ही सबसे सुरक्षित विकल्प बन सकता है. जेन-जी इसी भविष्य को देखते हुए आज से खुद को तैयार कर रही है.
कुल मिलाकर, लिंक्डइन और रैंडस्टैड की यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि भारतीय जेन-जी करियर को एक तय ढांचे में नहीं देख रही. उसके लिए करियर एक एक्सपेरिमेंट है, जहां सीखना, कमाना और खुद को एक्सप्रेस करना साथ-साथ चलता है. डिग्री जरूरी हो सकती है, लेकिन पहचान अब स्किल से बन रही है. साइड हसल और फ्रीलांसिंग सिर्फ ट्रेंड नहीं, बल्कि जेन-जी की नई करियर फिलॉसफी बन चुकी है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

