ममता बनर्जी का चुनाव आयोग और भाजपा पर बड़ा आरोप, AI से मतदाता नाम हटाने और 84 मौतों का दावा

ममता बनर्जी का चुनाव आयोग और भाजपा पर बड़ा आरोप, AI से मतदाता नाम हटाने और 84 मौतों का दावा

प्रेषित समय :21:34:43 PM / Tue, Jan 13th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

कोलकाता. पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज उस वक्त एक बड़ा भूचाल आ गया जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हावड़ा में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भारतीय चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी पर बेहद सनसनीखेज आरोप लगाए. मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के बीच साठगांठ का दावा करते हुए कहा कि राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के दौरान अब तक 84 लोगों की जान जा चुकी है और इसके लिए सीधे तौर पर भाजपा और चुनाव आयोग जिम्मेदार हैं. ममता बनर्जी ने तकनीकी मोर्चे पर एक कदम आगे बढ़ते हुए आरोप लगाया कि भाजपा के इशारे पर चुनाव आयोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का दुरुपयोग कर रहा है ताकि वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकें. उनके अनुसार यह बंगाल के मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों को छीनने की एक सोची-समझी और समन्वित साजिश है जिसका उद्देश्य आगामी चुनावों के परिणामों को प्रभावित करना है.

 मुख्यमंत्री का यह बयान राज्य में एक बड़े संवैधानिक संकट की ओर इशारा करता है क्योंकि उन्होंने चुनाव आयोग जैसी स्वतंत्र संस्था की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. ममता बनर्जी ने मौतों का विवरण देते हुए बताया कि आज सुबह तक कुल 84 लोगों की मृत्यु हुई है जिसमें से 4 लोगों ने आत्महत्या की है जबकि 17 लोगों की जान एसआईआर नोटिस मिलने के बाद सदमे से आए ब्रेन स्ट्रोक या हार्ट स्ट्रोक के कारण गई है. उन्होंने भाजपा के नेतृत्व की तुलना महाभारत के पात्रों 'दुर्योधन और दुशासन' से करते हुए कहा कि इन मौतों की जिम्मेदारी उन्हें लेनी होगी. मुख्यमंत्री ने दावा किया कि भाजपा के निर्देश पर एआई के जरिए नाम काटे जा रहे हैं और उनके पास ऐसी जानकारी है कि झारखंड, बिहार और ओडिशा जैसे पड़ोसी राज्यों से लोगों को बंगाल में लाकर मतदान कराने की योजना बनाई जा रही है. उन्होंने 'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी' (तार्किक विसंगतियां) नामक श्रेणी को पूरी तरह से फर्जी और संदिग्ध करार दिया जिसके तहत करीब 1.36 करोड़ मतदाताओं को सुनवाई का सामना करने के लिए मजबूर किया गया है.

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयोग ने बंगाल में बेहद लापरवाही और खराब योजना के साथ पुनरीक्षण कार्य किया जिसके परिणामस्वरूप मतदाता सूची से लगभग 58 लाख नाम हटा दिए गए हैं. जब इतने बड़े पैमाने पर नामों की छंटनी से भी भाजपा का राजनीतिक उद्देश्य पूरा नहीं हुआ तो उन्होंने 'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी' जैसी नई श्रेणी ईजाद कर दी. ममता बनर्जी ने नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन का उदाहरण देते हुए बताया कि उनके मामले में भी 'एरोनेट' पोर्टल ने विसंगति का झंडा दिखाया क्योंकि उनकी और उनकी मां अमिता सेन की उम्र के बीच का अंतर 15 साल से कम पाया गया था. उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में तैनात माइक्रो ऑब्जर्वर खुलेआम चुनावी अधिकारियों पर दबाव बना रहे हैं ताकि वे भाजपा द्वारा थोक में जमा किए गए फॉर्म-7 को स्वीकार करें और वास्तविक मतदाताओं के नाम काटे जा सकें. मुख्यमंत्री के अनुसार यह लोकतंत्र पर एक बड़ा हमला है जिसे डराने-धमकाने और संवैधानिक अधिकार के दुरुपयोग के माध्यम से अंजाम दिया जा रहा है.

इस तीखे हमले के जवाब में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने भी पलटवार करने में देरी नहीं की और मुख्यमंत्री पर सरकारी कार्यालय का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया. अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए कहा कि मुख्यमंत्री प्रशासनिक गरिमा का सम्मान करना नहीं जानतीं और वे राज्य के प्रशासनिक कार्यालय को तृणमूल कांग्रेस के पार्टी कार्यालय की तरह इस्तेमाल कर रही हैं. भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक कार्यालय से प्रेस कॉन्फ्रेंस करते समय तृणमूल कांग्रेस के गाने बजाए जा रहे हैं जो मर्यादा का उल्लंघन है. शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी पर तंज कसते हुए कहा कि पूरा देश देख चुका है कि वे कैसे महत्वपूर्ण जांच दस्तावेजों के साथ भागने और कानून एवं अदालतों से ऊपर खुद को रखने की कोशिश करती हैं. भाजपा का तर्क है कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र प्रक्रिया का पालन कर रहा है और मुख्यमंत्री हार के डर से इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगा रही हैं.

पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी के बीच यह विवाद अब एक नई ऊंचाई पर पहुंच गया है क्योंकि मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 14 फरवरी 2026 को होना निर्धारित है. मुख्यमंत्री ने सोमवार को ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को प्रक्रियागत खामियों के बारे में पत्र लिखकर आगाह किया था कि एसआईआर अभ्यास से नागरिकों का अनुचित उत्पीड़न हो रहा है. ममता बनर्जी का यह दावा कि लाखों लोगों के नाम काटे जा रहे हैं और इसके पीछे एक अंतरराष्ट्रीय तकनीक यानी एआई का हाथ है, आगामी दिनों में कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर एक बड़ी जंग की शुरुआत हो सकती है. राज्य में इस मुद्दे को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है क्योंकि एक तरफ सरकार इसे 'बंगाली अस्मिता' और 'वोटिंग राइट्स' से जोड़ रही है तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे प्रशासनिक विफलता और हताशा बता रहा है. फिलहाल पूरे बंगाल की नजरें चुनाव आयोग के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह इन गंभीर आरोपों पर क्या सफाई देता है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-