मुंबई. बीएमसी चुनाव 2026 के मतदान के दिन दिग्गज अभिनेत्री और भाजपा सांसद हेमामालिनी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में रहीं. इस बार वजह उनका मतदान नहीं, बल्कि कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वह वीडियो है, जिसमें वे मथुरा में आयोजित एक खेल प्रतियोगिता में खिलाड़ियों को पदक प्रदान करती नजर आ रही हैं. वीडियो में उनके चेहरे के भाव को लेकर उठे सवालों और ट्रोलिंग पर अब हेमामालिनी ने सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी है.
गुरुवार को मतदान के बाद जब हेमामालिनी ने मीडिया से बातचीत की, तो उन्होंने स्याही लगी उंगली दिखाते हुए मुस्कराकर कहा, “मैं मुस्करा रही हूं, अब शिकायत मत करना कि मैं नहीं मुस्कराती.” उनका यह बयान सीधे-सीधे उन आलोचनाओं पर तंज के तौर पर देखा जा रहा है, जो सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से उनके खिलाफ चल रही थीं.
दरअसल, 12 जनवरी को मथुरा में सांसद खेल प्रतियोगिता के दौरान पदक वितरण का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. इस वीडियो में हेमामालिनी छात्र खिलाड़ियों को मेडल देती नजर आती हैं, लेकिन उनका चेहरा शांत और गंभीर दिखाई देता है. न तो वे मुस्कराती दिखीं, न ही खिलाड़ियों से हाथ मिलाती या उन्हें बधाई देती नजर आईं. इसी को लेकर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई.
कई यूजर्स ने टिप्पणी करते हुए लिखा कि एक सार्वजनिक कार्यक्रम में, खासकर बच्चों और खिलाड़ियों के सम्मान के मौके पर, जनप्रतिनिधि से अधिक आत्मीयता की अपेक्षा होती है. कुछ कमेंट्स में यहां तक कहा गया कि हेमामालिनी “ठंडी और बेरुखी भरी” दिखाई दीं. एक यूजर ने लिखा, “खिलाड़ियों के लिए यह पल जीवन भर याद रहने वाला होता है, ऐसे में थोड़ा अपनापन जरूरी है.” वहीं, एक अन्य टिप्पणी में कहा गया, “नेतृत्व केवल पद से नहीं, व्यवहार से भी झलकता है.”
हालांकि, ट्रोलिंग के बीच हेमामालिनी के समर्थन में भी बड़ी संख्या में लोग सामने आए. कई यूजर्स ने लिखा कि हर व्यक्ति की भाव-भंगिमा अलग होती है और मुस्कान न होना असम्मान का प्रतीक नहीं है. एक समर्थक ने कमेंट किया, “काम को काम की तरह देखिए, हर कोई कैमरे के लिए एक्सप्रेशन नहीं देता.” कुछ लोगों ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर किसी के हाव-भाव को लेकर जजमेंट करना गलत चलन बनता जा रहा है.
इसी बीच, मुंबई में मतदान के दौरान एक और घटना ने माहौल को गर्मा दिया. मतदान के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान एक मतदाता ने हेमामालिनी से सीधे तौर पर सवाल किया और आरोप लगाया कि मतदान केंद्र पर अव्यवस्था है. मतदाता का कहना था कि वह सुबह 7:30 बजे मतदान केंद्र पहुंचा था, लेकिन उसे दो घंटे बाद जाकर वोट डालने का मौका मिला. उसने कहा, “पहली बार इतना अव्यवस्था देखी है, कोई जवाबदेह नहीं है.”
इस पर हेमामालिनी ने उसे आश्वासन दिया कि उसकी शिकायत संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जाएगी, लेकिन मतदाता का गुस्सा कम नहीं हुआ. उसने यहां तक कहा कि वह भाजपा का कार्यकर्ता है, इसके बावजूद व्यवस्था बेहतर नहीं है. इस घटनाक्रम के दौरान हेमामालिनी कुछ क्षणों के लिए असहज नजर आईं और उन्होंने अपने सहयोगियों से हस्तक्षेप करने को कहा.
इन दोनों घटनाओं ने मिलकर सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है. एक ओर उनके चेहरे के भाव को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो दूसरी ओर एक जनप्रतिनिधि के तौर पर उनकी जवाबदेही और जनता से संवाद को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. फेसबुक, एक्स (ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर कई यूजर्स ने लिखा कि नेताओं को सार्वजनिक आलोचना को भी सहजता से लेना चाहिए. वहीं कुछ ने यह भी कहा कि हर छोटी बात को ट्रोलिंग में बदल देना सही नहीं है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा दौर में नेताओं और सार्वजनिक हस्तियों को हर वक्त कैमरे और सोशल मीडिया की नजरों में रहना पड़ता है. एक छोटी-सी क्लिप भी बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विमर्श खड़ा कर देती है. हेमामालिनी का “अब शिकायत मत करना” वाला बयान इसी दबाव और आलोचना के प्रति उनकी प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है.
गौरतलब है कि बीएमसी चुनाव 2026 के तहत मुंबई में 227 सीटों के लिए मतदान हुआ है. मतदान सुबह 7:30 बजे शुरू होकर शाम 5:30 बजे तक चला. मतगणना और नतीजों की घोषणा 16 जनवरी को होगी. ऐसे में चुनावी माहौल पहले से ही गरम है और किसी भी बड़े चेहरे से जुड़ी छोटी घटना भी राजनीतिक रंग ले लेती है.
सोशल मीडिया पर आए ताजा कमेंट्स में कुछ यूजर्स ने लिखा कि हेमामालिनी का जवाब “आत्मविश्वास से भरा” था, जबकि कुछ ने इसे “व्यंग्यात्मक” बताया. एक टिप्पणी में कहा गया, “नेता को आलोचना सुननी चाहिए, जवाब देना ठीक है, लेकिन संवेदनशीलता भी जरूरी है.” दूसरी ओर, उनके समर्थकों का कहना है कि वे अनावश्यक विवाद का शिकार बनाई जा रही हैं.
कुल मिलाकर, हेमामालिनी का यह मामला केवल एक मुस्कान या चेहरे के भाव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सार्वजनिक जीवन में व्यवहार, अपेक्षाओं और सोशल मीडिया की भूमिका पर एक बड़े विमर्श का कारण बन गया है. चुनावी माहौल में यह बहस और तेज होती दिख रही है, जहां हर बयान और हर भाव राजनीतिक संदेश में बदल जाता है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

