नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में चल रहे वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) को लेकर सोमवार को बड़ा आदेश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को आदेश दिया कि वह उन 1.25 करोड़ वोटरों की लिस्ट सार्वजनिक करे, जिनके नामों में लॉजिकल गड़बड़ी बताकर आपत्ति जताई गई है.
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने सुनवाई के दौरान साफ किया कि डॉक्यूमेंट्स के वेरिफिकेशन के लिए करीब 2 करोड़ लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं. इसमें से बड़ी संख्या लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी कैटेगरी की है. सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि जिन लोगों के नाम लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी की सूची में डाले गए हैं, उनकी जांच पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए, ताकि आम लोगों को परेशानी और तनाव न हो. कोर्ट ने कहा कि करीब 1.25 करोड़ लोगों को नोटिस भेजे गए हैं. इन नोटिस में माता-पिता के नाम में फर्क, उम्र का अंतर कम होना, बच्चों की संख्या ज्यादा होना जैसी बातें बताई गई हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग को उन सभी लोगों की सूची सार्वजनिक करनी होगी, जिन्हें लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी के नाम पर नोटिस भेजा गया है.
व्हाट्सऐप से सरकार नहीं चलती
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए. जब यह बात सामने आई कि ईसीआई आधिकारिक सर्कुलर की जगह व्हाट्सएप के जरिए निर्देश भेज रहा है, जिस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कड़ी आपत्ति जताई. उन्होंने कहा, व्हाट्सऐप के जरिए सब कुछ चलाने का कोई सवाल ही नहीं है. इसके लिए प्रॉपर सर्कुलर जारी करना होगा.
बाल विवाह और नोबेल विजेता का जिक्र
वकील राकेश द्विवेदी ने तर्क दिया कि कई मामलों में मां और बेटे की उम्र में सिर्फ 15 साल का अंतर है, जो गड़बड़ी है. इस पर जस्टिस बागची ने टिप्पणी की, मां-बेटे की उम्र में 15 साल का अंतर लॉजिकल गड़बड़ी कैसे हो सकता है? हम ऐसे देश में नहीं हैं जहां बाल विवाह हकीकत न हो. कोर्ट को बताया गया कि नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन तक को नोटिस भेजा गया है. कोर्ट ने राज्य सरकार को कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुनवाई केंद्रों पर पर्याप्त मैनपावर सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है. बेंच ने यह भी कहा कि 1 करोड़ से ज्यादा लोग इस प्रक्रिया से तनाव में हैं, इसलिए जहां भी जरूरत होगी, कोर्ट दखल देगा
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

