चेन्नई. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले राज्य की राजनीति में जोरदार हलचल देखने को मिली है. बुधवार को दो बड़े घटनाक्रमों ने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया. सबसे बड़ा बदलाव यह हुआ कि अम्मा मक्कल मुनेत्र कषगम (AMMK) के नेता टीटीवी दिनाकरन ने अपने नेतृत्व में पार्टी को फिर से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल कर दिया. इसके साथ ही मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की पार्टी, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK), ने अपने लिए आखिरी वरिष्ठ नेता रहे पूर्व मंत्री आर. वैथिलिंगम को शामिल किया, जो ओ. पन्नीरसेल्वम (OPS) के गुट में थे.
टीटीवी दिनाकरन ने AMMK को NDA में शामिल करने की घोषणा चेन्नई में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री और तमिलनाडु के लिए BJP चुनाव प्रभारी पीयूष गोयल से मुलाकात के बाद की. इस अवसर पर L. मुरुगन और नैनार नागेंद्रन भी मौजूद थे. दिनाकरन ने कहा कि उनके और AIADMK के बीच जो मतभेद थे, वे केवल भाइयों जैसी लड़ाई थी और अब सभी एकजुट होकर तमिलनाडु में जनता की सरकार बनाने के लिए काम करेंगे. दिनाकरन ने अपने फैसले पर जोर देते हुए कहा, “जो लोग समझौता करते हैं, वे हारते नहीं. AIADMK के साथ जो कुछ था, वह केवल भाइयों जैसी लड़ाई थी. अब हम जनता की भलाई के लिए मिलकर काम करेंगे.”
पीयूष गोयल ने AMMK की NDA में वापसी का स्वागत करते हुए कहा कि गठबंधन एकजुट है और इसका लक्ष्य DMK सरकार को हराकर राज्य में बेहतर प्रशासन, सामाजिक कल्याण और सांस्कृतिक गौरव को स्थापित करना है. गोयल ने बताया कि दिनाकरन 2004-2007 के दौरान उनके पिता के साथ राज्यसभा सदस्य रहे थे और उन्होंने दिनाकरन की लोकप्रियता और नेतृत्व कौशल का प्रत्यक्ष अनुभव किया है.
AIADMK के महासचिव ईके पलानीस्वामी ने भी दिनाकरन का NDA में स्वागत किया और कहा कि इस कदम से DMK की तानाशाही और वंशवाद परंपरा को उखाड़ फेंकने में मदद मिलेगी. पलानीस्वामी ने जोर देकर कहा कि लोग कल्याण और जनता की भलाई के लिए सभी NDA सहयोगी मिलकर काम करेंगे. पूर्व तमिलनाडु BJP अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने भी दिनाकरन की NDA वापसी का स्वागत करते हुए कहा कि उनके अनुभव और रणनीति आगामी विधानसभा चुनाव में DMK शासन को चुनौती देने में अहम भूमिका निभाएंगे.
दिनाकरन ने इस अवसर पर कहा कि AMMK ने सितंबर 2025 में NDA छोड़ दिया था, उस समय उन्होंने गठबंधन पर धोखेबाजी का आरोप लगाया था, हालांकि किसी का नाम नहीं लिया था. उन्होंने स्वीकार किया कि AIADMK और उनके बीच कई वर्षों में राजनीतिक मतभेद रहे, लेकिन अब उन्हें पार्टी प्रमुखों और NDA के सहयोगियों के साथ मिलकर काम करने में कोई हिचक नहीं है. दिनाकरन के अनुसार, उनका उद्देश्य केवल तमिलनाडु में जनता की भलाई और भ्रष्ट DMK शासन से मुक्ति दिलाना है.
AMMK की NDA में वापसी के साथ ही तमिलनाडु की राजनीति में बड़े गठबंधनों के बीच प्रतिस्पर्धा का नया अध्याय शुरू हो गया है. DMK के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि R वैतिलिंगम जैसे वरिष्ठ नेता का पार्टी छोड़कर आना संकेत है कि विपक्षी गठबंधन मजबूत हो रहा है. वैतिलिंगम के DMK में शामिल होने से OPS गुट के कमजोर पड़ने की संभावना बढ़ गई है.
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि दिनाकरन की NDA में वापसी और DMK के लिए वरिष्ठ नेताओं का खोना विधानसभा चुनाव की दिशा को प्रभावित कर सकता है. चुनाव से पहले AMMK का NDA में शामिल होना राज्य में बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत है. यह कदम विशेष रूप से उन निर्वाचन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जहां AMMK और AIADMK का वोट शेयर मजबूत रहा है.
टीटीवी दिनाकरन ने कहा कि AIADMK और उनके बीच सभी मतभेद अब भूतकाल की बात है और अब वे सभी एकजुट होकर जनता की सेवा में काम करेंगे. दिनाकरन ने अपने इस फैसले को राजनीतिक समझौता और सामरिक सहयोग के रूप में पेश किया. उनके अनुसार, यह कदम राज्य की जनता के हित में है और आगामी विधानसभा चुनाव में NDA के लिए लाभकारी होगा.
AIADMK महासचिव पलानीस्वामी ने कहा कि दिनाकरन का NDA में स्वागत करना पार्टी की राजनीति में एक सकारात्मक संकेत है. उन्होंने बताया कि AMMK और AIADMK अब मिलकर DMK की वंशवादी और परिवारवादी राजनीति के खिलाफ एकजुट होंगे. पलानीस्वामी ने जोर देकर कहा कि जनता की भलाई और विकास को प्राथमिकता देते हुए सभी गठबंधन सहयोगी मिलकर काम करेंगे.
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि AMMK का NDA में वापसी करने से तमिलनाडु की राजनीतिक तस्वीर में बड़ा बदलाव आएगा. इससे चुनाव से पहले गठबंधन में मजबूती आएगी और DMK के लिए चुनौती बढ़ेगी. दिनाकरन के अनुभव और रणनीति के कारण NDA को राज्य के कई निर्वाचन क्षेत्रों में फायदा मिलने की संभावना है.
इस समय राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए, AMMK और AIADMK का मिलकर चुनाव लड़ना DMK की सत्ता को चुनौती देने में निर्णायक साबित हो सकता है. NDA में शामिल होने के बाद दिनाकरन ने कहा कि यह केवल राजनीतिक कदम नहीं, बल्कि जनता की भलाई और राज्य के विकास के लिए सामरिक सहयोग है. उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई अब भाइयों जैसी प्रतिद्वंद्विता से जनता की सेवा की ओर मुड़ गई है.
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह घटनाक्रम तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य में बड़े राजनीतिक बदलाव की शुरुआत है. दिनाकरन की NDA वापसी और DMK के लिए R वैतिलिंगम का जाना आगामी चुनावों के परिणामों को प्रभावित कर सकता है. AMMK और NDA के मिलकर चुनाव लड़ने से राज्य में विपक्षी गठबंधन मजबूत होगा और DMK के लिए सत्ता बनाए रखना कठिन हो सकता है.
इस पूरे घटनाक्रम ने तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरण खड़े कर दिए हैं. AMMK की NDA में वापसी और DMK के गुट से वरिष्ठ नेता का जुड़ना दर्शाता है कि राज्य में चुनावी रणनीति में बड़े बदलाव हो रहे हैं. चुनाव से पहले यह राजनीतिक हलचल आने वाले हफ्तों में तमिलनाडु की जनता के लिए अहम निर्णयों और मतदान पैटर्न को प्रभावित करेगी.
इससे स्पष्ट है कि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में NDA और DMK दोनों ही गठबंधनों को अपने रणनीतिक कदमों को नए सिरे से परखना होगा. दिनाकरन की वापसी और उनके अनुभव के चलते NDA की स्थिति मजबूत हुई है, जबकि DMK के लिए यह चुनौती बढ़ाने वाला मोड़ साबित हो सकता है. आगामी विधानसभा चुनाव में यह राजनीतिक हलचल राज्य की सत्ता पर निर्णायक प्रभाव डाल सकती है और जनता की पसंद तय करेगी कि तमिलनाडु में अगली सरकार किस गठबंधन के हाथ में जाएगी
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

