-प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, बॉलीवुड एस्ट्रो एडवाइजर (व्हाट्सएप- 8875863494)
• नवरात्रि का पांचवा दिन- 23 जनवरी 2026, शुक्रवार, पंचमी, स्कंदमाता पूजा
देवी दुर्गा का पांचवां स्वरूप स्कंदमाता है.
देवी स्कंदमाता, सिंह पर सवार हैं.
देवी स्कन्दमाता की चार भुजाएं हैं, माता अपने दोनों हाथों में कमल का फूल धारण करती हैं और एक हाथ सें भगवान कार्तिकेय को अपनी गोद में लिये बैठी हैं जबकि माता का चौथा हाथ श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान करता है.
जो व्यक्ति जाने/अनजाने भ्रूण हत्या जैसे अपराध में प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष शामिल रहे हों उन्हें देवी स्कन्दमाता से सच्चे दिल से क्षमा मांगनी चाहिए और पूजा-अर्चना करके प्रायश्चित व्रत करना चाहिए, साथ ही भविष्य में ऐसी गलती नहीं करने का संकल्प लेना चाहिए.
देवी स्कंदमाता की पूजा-अर्चना से बुध ग्रह की अनुकूलता प्राप्त होती है इसलिए मिथुन और कन्या राशिवालों को देवी की आराधना से संपूर्ण सुख की प्राप्ति होती है.
जिन श्रद्धालुओं की बुध की दशा-अंतर्दशा चल रही हो उन्हें भी देवी स्कन्दमाता की पूजा-अर्चना करनी चाहिए.
कला/व्यवसाय के क्षेत्र में सफलता के लिए श्रद्धालुओं को देवी स्कंदमाता की आराधना करनी चाहिए.
जिन श्रद्धालुओं के बहन/बेटी से मतभेद हों वे संकल्प लेकर देवी स्कन्दमाता की आराधना करें, विवाद से राहत मिलेगी.
श्री गौमाता धर्म-कर्म पंचांग, चौघड़िया - 23 जनवरी 2026
ब्रह्म मुहूर्त- 05:35 एएम से 06:28 एएम, प्रातः सन्ध्या- 06:02 एएम से 07:20 एएम, अभिजित मुहूर्त- 12:25 पीएम से 01:09 पीएम, विजय मुहूर्त- 02:36 पीएम से 03:20 पीएम, गोधूलि मुहूर्त- 06:11 पीएम से 06:38 पीएम, सायाह्न सन्ध्या- 06:14 पीएम से 07:33 पीएम, रवि योग- 02:33 पीएम से 07:20 एएम (24 जनवरी 2026), निशिता मुहूर्त- 12:21 एएम (24 जनवरी 2026) से 01:13 एएम (24 जनवरी 2026)
* दिन का चौघड़िया
चर - 07:20 से 08:42
लाभ - 08:42 से 10:04
अमृत - 10:04 से 11:25
काल - 11:25 से 12:47
शुभ - 12:47 से 02:09
रोग - 02:09 से 03:31
उद्वेग - 03:31 से 04:52
चर - 04:52 से 06:14
* रात्रि का चौघड़िया
रोग - 06:14 से 07:52
काल - 07:52 से 09:30
लाभ - 09:30 से 11:09
उद्वेग - 11:09 से 12:47
शुभ - 12:47 से 02:25
अमृत - 02:25 से 04:03
चर - 04:03 से 05:42
रोग - 05:42 से 07:20
* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है.
* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.
* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, विभिन्न पंचांगों, धर्मग्रथों से साभार ली गई है, स्थानीय समय, परंपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि यहां दिया जा रहा समय अलग-अलग शहरों में स्थानीय समय के सापेक्ष थोड़ा अलग हो सकता है.
* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ न गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!
AajKaDin: 23 जनवरी 2026, कला-व्यवसाय में कामयाबी के लिए देवी स्कंदमाता की आराधना करें!
प्रेषित समय :22:27:39 PM / Thu, Jan 22nd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

