ईओडब्ल्यू की बड़ी स्ट्राइक ड्रीमलैंड सिटी कॉलोनी मामले में बिल्डर और महिला उपयंत्री पर एफआईआर

ईओडब्ल्यू की बड़ी स्ट्राइक ड्रीमलैंड सिटी कॉलोनी मामले में बिल्डर और महिला उपयंत्री पर एफआईआर

प्रेषित समय :19:56:22 PM / Thu, Jan 22nd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. रियल एस्टेट क्षेत्र में उस वक्त हड़कंप मच गया जब आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी ईओडब्ल्यू की टीम ने कठौंदा स्थित ड्रीमलैंड सिटी कॉलोनी में हुए बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए बड़ी दंडात्मक कार्रवाई को अंजाम दिया. यह मामला न केवल अवैध लाभ कमाने का है बल्कि सरकारी तंत्र और रसूखदार बिल्डरों के बीच उस गठजोड़ को भी उजागर करता है जिसके कारण आम जनता अपनी जीवन भर की कमाई खो देती है. ईओडब्ल्यू ने इस पूरे प्रकरण में रामदेव डेवलपर के संचालक और नगर निगम की एक तत्कालीन महिला उपयंत्री के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है.

जांच में यह तथ्य सामने आया है कि बिल्डर ने प्रशासन को गुमराह करने और ग्राहकों को लुभाने के लिए कॉलोनी में बुनियादी सुविधाओं का जो खाका खींचा था वह सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहा. ईओडब्ल्यू की रिपोर्ट के अनुसार ड्रीमलैंड सिटी के विकास के दौरान नियमों को ताक पर रखकर ऐसी एनओसी यानी अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किए गए जिनकी पात्रता यह प्रोजेक्ट रखता ही नहीं था. सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि जिस महिला उपयंत्री पर गाज गिरी है उन्होंने बिना मौके का मुआयना किए या फिर जानबूझकर भौतिक स्थिति की अनदेखी करते हुए बिजली और पानी जैसी अनिवार्य सेवाओं की उपलब्धता की पुष्टि कर दी थी. जबकि वास्तविकता में कॉलोनी के रहवासी आज भी बूंद-बूंद पानी और बिजली के स्थाई कनेक्शन के लिए तरस रहे हैं.

यह कार्रवाई पिछले कई महीनों से मिल रही शिकायतों और गुप्त जांच के बाद की गई है जिसमें यह पाया गया कि रामदेव डेवलपर के संचालक ने अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में विकास कार्यों के मद में जमा की जाने वाली राशि और तय मापदंडों की जमकर धज्जियां उड़ाईं. इस फर्जीवाड़े में सरकारी अमले की मिलीभगत ने बिल्डर के हौसलों को इस कदर बुलंद कर दिया था कि बिना ड्रेनेज सिस्टम और बिना ट्रांसफार्मर के ही कॉलोनी को पूर्ण घोषित करने की तैयारी कर ली गई थी. ईओडब्ल्यू के अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक कॉलोनी का मामला नहीं है बल्कि इस जांच के दायरे में आने वाले समय में कई और रसूखदार नाम सामने आ सकते हैं क्योंकि कठौंदा और उसके आसपास के इलाकों में इसी तरह के कई और प्रोजेक्ट्स पर भी संदेह की सुई घूम रही है.

इस एफआईआर के दर्ज होने के बाद नगर निगम और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग में भी खलबली मची हुई है क्योंकि तकनीकी रूप से एनओसी जारी करने की प्रक्रिया में कई स्तरों पर सत्यापन की आवश्यकता होती है. जांच एजेंसी अब उन सभी फाइलों को खंगाल रही है जिन पर महिला उपयंत्री के हस्ताक्षर हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इसी तरह की अन्य कॉलोनियों को भी अवैध रूप से लाभ पहुंचाया गया है. इधर बिल्डर के खिलाफ एफआईआर की खबर मिलते ही ड्रीमलैंड सिटी में भूखंड और मकान खरीदने वाले लोगों के बीच एक तरफ न्याय की उम्मीद जगी है तो दूसरी तरफ अपने निवेश के भविष्य को लेकर चिंता भी व्याप्त है.

जानकारों का मानना है कि ईओडब्ल्यू की इस सख्त कार्रवाई से शहर के अन्य उन कॉलोनाइजरों को कड़ा संदेश गया है जो विकास शुल्क के नाम पर जनता से पैसा तो वसूल लेते हैं लेकिन मूलभूत सुविधाएं देने के वक्त हाथ पीछे खींच लेते हैं. फिलहाल पुलिस और ईओडब्ल्यू की टीमें आरोपितों की धरपकड़ के साथ-साथ वित्तीय लेन-देन के दस्तावेजों को जब्त करने में जुटी हैं. सूत्रों का यह भी दावा है कि इस खेल में कुछ और सफेदपोश चेहरों की संलिप्तता के प्रमाण मिले हैं जिनकी भूमिका की पुष्टि होते ही गिरफ्तारी की जा सकती है.

भ्रष्टाचार के खिलाफ मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत इस कार्रवाई को एक बड़े उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है. आगामी दिनों में इस मामले में चार्जशीट दाखिल होने के बाद कई और बड़े खुलासे होने की संभावना है जिससे यह साफ हो जाएगा कि किस तरह एक फर्जी एनओसी के सहारे करोड़ों का साम्राज्य खड़ा किया गया और सरकारी पद पर बैठी महिला अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए निजी स्वार्थ को लोकहित से ऊपर रखा.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-