जबलपुर : मिलने जा रही 100 पीएम ई-बसें, इन 12 नए रूट्स पर दौड़ेंगी, कठोंदा में डिपो हो रहा तैयार

जबलपुर : मिलने जा रही 100 पीएम ई-बसें, इन 12 नए रूट्स पर दौड़ेंगी, कठोंदा में डिपो हो रहा तैयार

प्रेषित समय :12:26:26 PM / Fri, Jan 23rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में नगर निगम और जेसीटीएसएल ने एक बड़ी छलांग लगाई है. महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू और निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने बताया कि पीएम ई-बस योजना के अंतर्गत जल्द ही शहर की सड़कों पर 100 नई इलेक्ट्रिक एसी बसें संचालित की जाएंगी. यह कदम न केवल यात्रियों को आरामदायक सफर मुहैया कराएगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मील का पत्थर साबित होगा.

कठोंदा में डिपो का काम अंतिम चरण में

निगमायुक्त श्री अहिरवार ने जानकारी दी कि इन बसों के सुचारू संचालन और चार्जिंग के लिए कठोंदा में 4 एकड़ क्षेत्र में एक विशाल डिपो का निर्माण किया जा रहा है, जिसका 70 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है. शहर में बसों का आगमन तीन चरणों में होगा. पहले चरण में 40 बसें, दूसरे में 35 और अंतिम चरण में 25 बसें बेड़े में शामिल होंगी. योजना इस प्रकार तैयार की गई है कि यात्रियों को प्रमुख मार्गों पर हर 5 से 10 मिनट के अंतराल में बस उपलब्ध हो सके.

इन 12 प्रमुख रूटों पर होगा संचालन

ई-1: मदर टेरेसा से रांझी, घाना, सोनपुर (वाया घमापुर)
ई-2: करमेता से रांझी, घाना (वाया कांचघर)
ई-3: पनागर से पनागर (वाया दमोहनाका)
ई-4: पनागर से पनागर (वाया घमापुर)
ई-5: आईएसबीटी से बरेला शारदा मंदिर (वाया तीन पत्ती)
ई-6: आई.एस.बी.टी. से भेड़ाघाट (वाया अंधमूक बायपास)
ई-7: आईएसबीटी से गौरीघाट (वाया त्रिमूर्ति नगर)
ई-8: रेलवे स्टेशन से भेड़ाघाट (वाया सगडा, चौकीताल)
ई-9: आईएसबीटी से बरगी डेम (वाया तीन पत्ती, तिलवारा)
ई-10: आईएसबीटी से शहपुरा (वाया तीन पत्ती, अन्धमुख)
ई-11: रेलवे स्टेशन से पाटन
ई-12: आईएसबीटी से एयरपोर्ट (वाया यूनिवर्सिटी)

हाईटेक सुरक्षा और जीरो एमिशन पर फोकस

ये बसें पूरी तरह डिजिटल होंगी, जिनमें यात्रियों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे, पैनिक बटन और जीपीएस ट्रैकिंग की सुविधा होगी. साथ ही, डिजिटल पेमेंट और ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम से यात्रा सुगम होगी. ग्रॉस कॉस्ट मॉडल पर आधारित इस परियोजना में ऑपरेटर को 58.14 रुपये प्रति किमी का भुगतान किया जाएगा. पर्यावरणीय दृष्टि से यह पहल सालाना 47.45 लाख किलोग्राम कॉर्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करेगी और रोजाना लगभग 50,000 यात्रियों को सस्ती व सुलभ यात्रा का लाभ देगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-