ईशान किशन इफेक्ट से हिला पावरप्ले, भारत ने न्यूजीलैंड के खिलाफ शुरुआती झटकों को बनाया हथियार

ईशान किशन इफेक्ट से हिला पावरप्ले, भारत ने न्यूजीलैंड के खिलाफ शुरुआती झटकों को बनाया हथियार

प्रेषित समय :23:55:44 PM / Mon, Jan 26th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

मुंबई/गुवाहाटी। भारत और न्यूजीलैंड के बीच चल रही टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज में भारतीय टीम की बढ़त केवल रन बोर्ड पर नहीं दिख रही, बल्कि उस मानसिकता में साफ झलक रही है, जिससे टीम शुरुआती झटकों का सामना कर रही है। इस बदलाव का सबसे बड़ा प्रतीक बनकर उभरे हैं ईशान किशन, जिनका आक्रामक और निडर रवैया पावरप्ले में भारत की रणनीति को नई दिशा दे रहा है। स्कोरकार्ड पर 0/1 या 6/2 जैसी स्थिति को जहां पारंपरिक तौर पर संकट माना जाता रहा है, वहीं ईशान किशन इसे विरोधी गेंदबाजों की लय तोड़ने के मौके में बदलते नजर आ रहे हैं।

गुवाहाटी में खेले गए तीसरे टी20 मुकाबले में भारत की पारी की शुरुआत पहले ही गेंद पर संजू सैमसन के आउट होने से हुई। न्यूज़ीलैंड के गेंदबाजों को लगा कि उन्होंने मैच में शुरुआती पकड़ बना ली है। लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने न सिर्फ मुकाबले की दिशा बदल दी बल्कि भारत की मौजूदा टी20 सोच को भी उजागर कर दिया। क्रीज पर आते ही ईशान किशन ने रक्षात्मक रवैया अपनाने के बजाय आक्रमण को ही सबसे बेहतर बचाव माना। शुरुआती 19 गेंदों में से 13 गेंदें खुद खेलकर उन्होंने न सिर्फ रन गति को तेज रखा, बल्कि दूसरे छोर पर मौजूद अभिषेक शर्मा को भी बिना दबाव के सेट होने का समय दिया।

इस रणनीति का असर तुरंत दिखा। पावरप्ले के भीतर ही स्कोरबोर्ड पर रन तेजी से जुड़ने लगे और भारत ने महज 19 गेंदों में 50 रन पूरे कर लिए, जो अपने आप में रिकॉर्ड था। यह केवल आंकड़ों की बात नहीं थी, बल्कि उस संदेश की भी थी जो भारतीय बल्लेबाजी ने विपक्ष को दिया—कि शुरुआती विकेट गिरना अब भारत के लिए कमजोरी नहीं, बल्कि आक्रमण तेज करने का संकेत है। ईशान किशन की बल्लेबाजी में यही ‘इफेक्ट’ सबसे स्पष्ट रूप से दिखा।

ईशान किशन का मौजूदा फॉर्म और मानसिकता भारतीय टी20 टीम के व्यापक बदलाव का हिस्सा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत पर अक्सर यह आरोप लगता रहा कि वह शुरुआती विकेट गिरने के बाद जरूरत से ज्यादा संभलकर खेलता है, जिससे पावरप्ले का फायदा हाथ से निकल जाता है। लेकिन न्यूजीलैंड के खिलाफ इस सीरीज में तस्वीर बदली हुई नजर आ रही है। चाहे पहला ओवर हो या तीसरा विकेट जल्दी गिरने की स्थिति, भारत की प्रतिक्रिया आक्रामक ही रही है। इसका केंद्र बिंदु बन रहे हैं ईशान किशन, जो जोखिम को डर नहीं, बल्कि रणनीति के तौर पर देख रहे हैं।

ईशान की बल्लेबाजी में यह बदलाव अचानक नहीं आया है। घरेलू क्रिकेट, आईपीएल और पिछले कुछ अंतरराष्ट्रीय मैचों में उन्होंने यह संकेत दिए थे कि वह अब केवल नैचुरल हिटर नहीं, बल्कि मैच की परिस्थिति को समझकर जोखिम लेने वाले बल्लेबाज बन चुके हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ यह सोच और अधिक निखरकर सामने आई। तेज गेंदबाजों के खिलाफ फ्रंट फुट पर आक्रामक शॉट्स, स्पिन के खिलाफ क्रीज का इस्तेमाल और गैप खोजने की क्षमता—इन सबने पावरप्ले को भारत के पक्ष में मोड़ दिया।

इस ‘ईशान किशन इफेक्ट’ का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि युवा बल्लेबाजों पर से दबाव कम हुआ। अभिषेक शर्मा जैसे खिलाड़ी, जो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खुद को स्थापित करने की प्रक्रिया में हैं, उन्हें दूसरे छोर पर एक ऐसा साथी मिला जो गेंदबाजों पर हावी था। इससे अभिषेक को अपने स्वाभाविक खेल में ढलने का मौका मिला और भारत की पारी में निरंतरता बनी रही। टीम प्रबंधन के नजरिए से देखें तो यह संयोजन भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत देता है।

न्यूजीलैंड के गेंदबाजों के लिए यह स्थिति असहज करने वाली रही। शुरुआती विकेट के बाद वे जिस नियंत्रण की उम्मीद कर रहे थे, वह उन्हें नहीं मिला। ईशान किशन ने लगातार स्ट्राइक अपने पास रखकर गेंदबाजों को लाइन-लेंथ बदलने पर मजबूर किया। जब गेंदबाजों ने फील्ड बदलने की कोशिश की, तब भी रन गति पर कोई खास असर नहीं पड़ा। यह दबाव धीरे-धीरे पूरे गेंदबाजी आक्रमण पर फैल गया, जिसका फायदा भारतीय टीम ने पूरे पावरप्ले में उठाया।

भारतीय टीम के इस नए रवैये को कप्तानी और कोचिंग स्टाफ की सोच से भी जोड़कर देखा जा रहा है। टी20 क्रिकेट में अब सुरक्षित खेल की गुंजाइश कम होती जा रही है और शुरुआती ओवरों में बढ़त बनाना जीत की कुंजी माना जा रहा है। ईशान किशन इस सोच के सबसे प्रभावी चेहरे बनकर सामने आए हैं। वह न सिर्फ खुद रन बना रहे हैं, बल्कि मैच की गति तय कर रहे हैं—और यही किसी भी शीर्ष क्रम के बल्लेबाज की असली भूमिका होती है।

इस सीरीज में भारत की पावरप्ले सफलता ने यह भी दिखाया है कि टीम अब स्कोरबोर्ड के दबाव से नहीं, बल्कि अपनी योजना से खेल रही है। 0/1 या 6/2 जैसे आंकड़े अब घबराहट की वजह नहीं, बल्कि विपक्ष को चौंकाने का अवसर बन चुके हैं। ईशान किशन का आत्मविश्वास, उनकी शॉट चयन और जोखिम उठाने की स्पष्टता भारत की टी20 पहचान को नया आकार दे रही है।

आगे आने वाले मुकाबलों और बड़े टूर्नामेंटों के लिहाज से यह ‘ईशान किशन इफेक्ट’ भारत के लिए अहम साबित हो सकता है। अगर शीर्ष क्रम इसी तरह शुरुआती झटकों को आक्रमण में बदलता रहा, तो विरोधी टीमों के लिए भारत को रोकना और मुश्किल हो जाएगा। न्यूजीलैंड के खिलाफ यह सीरीज शायद केवल जीत-हार की कहानी नहीं, बल्कि भारतीय टी20 क्रिकेट के एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में याद रखी जाएगी—जहां डर नहीं, बल्कि इरादा पावरप्ले को परिभाषित कर रहा है।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-