जीवन की तेज़ रफ्तार और काम के बढ़ते दबाव के बीच अक्सर हम उन दिनों का सामना करते हैं जब शरीर पूरी तरह थका हुआ महसूस करता है और व्यायाम करने का विचार ही कठिन लगता है. ऐसे समय में कई लोग पूरी तरह से व्यायाम छोड़ देते हैं, जिससे नियमित फिटनेस और स्वास्थ्य बनाए रखना मुश्किल हो जाता है. लेकिन फिटनेस एक्सपर्ट स्पूर्ति एस ने बताया है कि कम ऊर्जा वाले दिनों में भी शरीर को हल्की गतिविधियों के माध्यम से सक्रिय रखा जा सकता है. उन्होंने कहा कि कुछ सरल और कम प्रयास वाले मूवमेंट रूटीन न केवल शरीर की गतिविधि बनाए रखते हैं बल्कि मानसिक ऊर्जा और ताजगी भी प्रदान करते हैं.
स्पूर्ति एस, जो एक प्रख्यात फिटनेस ट्रेनर और स्वास्थ्य सलाहकार हैं, उनका कहना है कि अगर आपको किसी दिन पूर्ण वर्कआउट करना मुश्किल लग रहा है, तो इसका मतलब यह नहीं कि आप आलसी हैं, बल्कि यह शरीर और मस्तिष्क की थकावट का संकेत है. उन्होंने कहा कि लंबे काम के घंटे, मानसिक दबाव, नींद की कमी और लगातार डिजिटल स्टिमुलेशन से तंत्रिका तंत्र थक जाता है, जिससे कठिन व्यायाम चुनौतीपूर्ण लगता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यायाम हमेशा भारी और कठिन नहीं होना चाहिए. हल्के और कम प्रयास वाले मूवमेंट भी शरीर के लिए उतने ही प्रभावी होते हैं.
उन्होंने कहा कि कम ऊर्जा वाले दिनों में हल्की गतिविधियां अपनाने का उद्देश्य कैलोरी जलाना नहीं बल्कि शरीर को हल्का और सक्रिय रखना होना चाहिए. हल्के मूवमेंट ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाते हैं, जोड़ और मांसपेशियों को लचीला बनाते हैं और पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय करते हैं, जो तनाव हार्मोन कोर्टिसोल को कम करने में मदद करता है. इसके परिणामस्वरूप शरीर मूवमेंट के बाद अधिक ऊर्जावान महसूस करता है बजाय इसके कि थका हुआ महसूस हो.
स्पूर्ति एस ने बताया कि ऐसे दिन के लिए सबसे प्रभावी तरीका यह है कि मूवमेंट को नियमित और लगातार बनाए रखें. उन्होंने इसे "रखरखाव" के रूप में देखा, न कि प्रशिक्षण. उनके अनुसार, कम ऊर्जा वाले दिनों में निम्नलिखित हल्की गतिविधियां अपनाई जा सकती हैं.
सबसे पहले, एक त्वरित मोबिलिटी रिफ्रेश. जो लोग लंबे समय तक बैठते हैं उनके लिए यह विशेष रूप से फायदेमंद है. इसमें गर्दन और कंधों के घुमाव, रीढ़ की हल्की फ्लेक्सन और एक्सटेंशन, हिप रोटेशन और टखने की हल्की मूवमेंट शामिल हैं. ये सरल मूवमेंट शरीर की कठोरता को कम करते हैं और गतिशीलता में सुधार करते हैं.
दूसरी गतिविधि है आसान गति से चलना. एक 10–20 मिनट की आरामदायक वॉक शरीर के लिए कई फायदे लाती है. यह मूड को सुधारने, पाचन प्रणाली को सक्रिय करने और रक्त संचार बढ़ाने में मदद करती है. स्पूर्ति एस ने कहा कि इस वॉक में किसी दूरी या गति का दबाव नहीं होना चाहिए. महत्वपूर्ण यह है कि इसे नियमित रूप से किया जाए.
तीसरी सलाह है दिनभर में छोटे मूवमेंट ब्रेक लेना. हर घंटे या दो घंटे में केवल एक-दो मिनट के लिए उठना और हल्का मूवमेंट करना बहुत फायदेमंद होता है. इसमें हल्की स्क्वैट्स, वॉल पुश-अप्स, हल्की ट्विस्टिंग या कमरे में घूमना शामिल हो सकता है. ये छोटे ब्रेक थकावट को कम करते हैं और ऊर्जा बनाए रखते हैं.
चौथा उपाय है धीमी गति से मूवमेंट को गहरी सांसों के साथ जोड़ना. Controlled और slow मूवमेंट के साथ गहरी श्वास लेना मस्तिष्क और शरीर को शांत करता है. यह मानसिक थकान को कम करता है और शांति और ताजगी का एहसास दिलाता है. स्पूर्ति एस के अनुसार, यह तकनीक शरीर और मन को तनाव मुक्त करने में मदद करती है, जिससे पूरे दिन अधिक ऊर्जावान महसूस होता है.
पांचवां उपाय है हल्की स्ट्रेचिंग. शाम के समय हिप्स, हैमस्ट्रिंग और पीठ की हल्की स्ट्रेचिंग शरीर को आराम देती है, तनाव मुक्त करती है और नींद की गुणवत्ता में सुधार करती है. हल्की स्ट्रेचिंग मांसपेशियों में खिंचाव को कम करती है और शरीर को अगले दिन की गतिविधियों के लिए तैयार करती है.
स्पूर्ति एस ने कहा कि कम ऊर्जा वाले दिनों में लक्ष्य यह होना चाहिए कि शरीर हल्का और सक्रिय रहे. उन्होंने यह भी जोर दिया कि इन दिनों में मूवमेंट की गुणवत्ता और नियमितता ज्यादा महत्वपूर्ण है, न कि उसकी तीव्रता. छोटे और सावधानीपूर्वक मूवमेंट लंबे समय तक स्वास्थ्य, गतिशीलता और ऊर्जा बनाए रखने में मदद कर सकते हैं.
उन्होंने यह भी बताया कि मानसिक थकान और शारीरिक थकावट के कारण हम कभी-कभी वर्कआउट के लिए प्रेरित नहीं हो पाते. लेकिन हल्की और कम प्रयास वाली गतिविधियां इस समस्या का समाधान देती हैं. शरीर धीरे-धीरे सक्रिय होता है और थकान के बावजूद ऊर्जा का स्तर बनाए रखा जा सकता है. ऐसे मूवमेंट न केवल फिजिकल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और मूड सुधारने में भी सहायक हैं.
स्पूर्ति एस ने यह सुझाव दिया कि कम ऊर्जा वाले दिनों में हल्की गतिविधियों को दिनचर्या में शामिल करना चाहिए. यह नियमित मूवमेंट, स्ट्रेचिंग और हल्की वॉक के रूप में हो सकता है. उन्होंने कहा कि शरीर को हल्का रखने के लिए छोटी-छोटी गतिविधियां भी पर्याप्त होती हैं. इसके अलावा, यह मस्तिष्क को भी सक्रिय रखती हैं और मानसिक थकान कम करती हैं.
फिटनेस एक्सपर्ट ने अंत में कहा कि यदि आप थके हुए हैं और पूरे वर्कआउट का विचार ही मुश्किल लग रहा है, तो भी चिंता न करें. हल्का मूवमेंट, स्ट्रेचिंग और सांस लेने के व्यायाम शरीर को सक्रिय रखने के लिए पर्याप्त हैं. ये गतिविधियां शरीर में ऊर्जा का संचार करती हैं, ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाती हैं, जोड़ और मांसपेशियों को लचीला बनाती हैं और मानसिक रूप से भी ताजगी प्रदान करती हैं.
इस प्रकार, कम ऊर्जा वाले दिन अब किसी बहाने के लिए नहीं हैं. स्पूर्ति एस के सुझाए सरल मूवमेंट रूटीन अपनाकर कोई भी व्यक्ति बिना अधिक मेहनत किए अपनी फिटनेस और ऊर्जा बनाए रख सकता है. हल्की वॉक, स्ट्रेचिंग, धीमी गति से मूवमेंट और छोटे ब्रेक्स शरीर और दिमाग दोनों के लिए लाभकारी हैं. यही समय है कि हम व्यायाम के बारे में अपने दृष्टिकोण को बदलें और समझें कि हल्की गतिविधियां भी स्वास्थ्य और जीवनशैली में बड़ा फर्क डाल सकती हैं.
कम प्रयास वाली गतिविधियों को अपनाकर शरीर को सक्रिय और मस्तिष्क को ऊर्जावान बनाए रखना अब आसान है. चाहे ऑफिस का काम हो, घर का बोझ हो या मानसिक थकान, इन सरल मूवमेंट्स के माध्यम से हर दिन को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाया जा सकता है. छोटे कदम ही सही, लेकिन निरंतरता और समझदारी के साथ किया गया हल्का मूवमेंट लंबी अवधि में स्वास्थ्य और जीवनशैली को बेहतर बनाने में निर्णायक साबित होता है.
यह स्पष्ट है कि फिटनेस केवल कसरत या जिम तक सीमित नहीं है. जीवन के व्यस्त और थकाऊ दिनों में भी हल्की गतिविधियां अपनाकर शरीर और दिमाग को सक्रिय बनाए रखना संभव है. स्पूर्ति एस ने यही संदेश दिया है कि कम प्रयास वाला मूवमेंट भी स्वास्थ्य बनाए रखने और ऊर्जा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. अब दिन चाहे कितना भी थकान भरा हो, हल्की गतिविधियों के जरिए फिटनेस और ताजगी बनाए रखना हर किसी के लिए संभव है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

