अजित पवार के निधन के 48 घंटे बाद एनसीपी में सियासी हलचल, पत्नी सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाने की तैयारी

अजित पवार के निधन के 48 घंटे बाद एनसीपी में सियासी हलचल, पत्नी सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाने की तैयारी

प्रेषित समय :20:40:12 PM / Thu, Jan 29th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

बारामती. महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सत्ता संतुलन को लेकर हलचल तेज हो गई है. उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के निधन के महज 48 घंटे के भीतर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने उनकी पत्नी और राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार का नाम उपमुख्यमंत्री पद के लिए आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है. पार्टी के वरिष्ठ नेता लगातार बैठकें कर रहे हैं और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस प्रस्ताव पर चर्चा की संभावना जताई जा रही है. इसके साथ ही पार्टी सूत्रों के अनुसार सुनेत्रा पवार को बारामती विधानसभा सीट से उपचुनाव में उतारने की योजना पर भी मंथन चल रहा है. अजीत पवार की मौत के बाद राजनीतिक रूप से अहम बारामती गढ़ पर अब सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में नया समीकरण खड़ा होता दिखाई दे रहा है.

एनसीपी के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री नर्हरी जिरवाल ने समाचार एजेंसी  से बात करते हुए कहा कि जनभावना इस समय सुनेत्रा पवार के पक्ष में है. उन्होंने कहा कि “लोग चाहते हैं कि अजीत पवार की जगह सुनेत्रा पवार को राज्य मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए.” जिरवाल के अनुसार अजीत पवार गुट और शरद पवार गुट दोनों ही अब एकजुट हैं और यह समझ लिया गया है कि विभाजन से किसी को लाभ नहीं होगा. पार्टी के दोनों गुटों के एकीकरण के बीच सुनेत्रा पवार का नाम उपमुख्यमंत्री पद के लिए सर्वसम्मति से सामने आना, महाराष्ट्र की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है.

रिपोर्टों के मुताबिक, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबळ, धनंजय मुंडे और सुनील तटकरे ने गुरुवार को सुनेत्रा पवार से मुलाकात की. ये बैठकें आंतरिक परामर्श का हिस्सा बताई जा रही हैं. बताया गया है कि सभी नेताओं ने सुनेत्रा पवार को सक्रिय राजनीति में अग्रणी भूमिका निभाने का आग्रह किया है. पार्टी सूत्रों ने यह भी संकेत दिए हैं कि बारामती सीट, जो अजीत पवार के निधन से खाली हुई है, से सुनेत्रा पवार के चुनाव लड़ने की पूरी संभावना है. यह वही सीट है जिसने दशकों से पवार परिवार की राजनीतिक विरासत को संभाला है.

सुनेत्रा पवार की राजनीतिक यात्रा अब तक पर्दे के पीछे से रही है, लेकिन उनके सामाजिक, शैक्षिक और औद्योगिक योगदान ने उन्हें जनता के बीच जाना-पहचाना चेहरा बना दिया है. सुनेत्रा पवार पूर्व मंत्री और लोकसभा सांसद पद्मासिंह पाटिल की बेटी हैं. साल 1985 में उनका विवाह अजीत पवार से हुआ था. उनके दो बेटे हैं – पार्थ और जय पवार. सुनेत्रा पवार ने 2019 में बारामती लोकसभा सीट से अपनी भाभी सुप्रिया सुले के खिलाफ चुनाव लड़ा था, हालांकि उस चुनाव में उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा था. इसके बावजूद राजनीतिक क्षेत्र में उनका सक्रिय रहना जारी रहा और 2024 में प्रफुल्ल पटेल के बाद वे राज्यसभा में निर्विरोध निर्वाचित हुईं.

संसद में प्रतिनिधित्व के साथ-साथ सुनेत्रा पवार ने सामाजिक क्षेत्र में भी अपनी मजबूत पहचान बनाई है. वे बारामती टेक्सटाइल कंपनी की अध्यक्ष हैं और ‘एनवायरनमेंटल फोरम ऑफ इंडिया’ (EFOI) की सीईओ भी हैं — यह संस्था 2010 में पर्यावरणीय जागरूकता के लिए स्थापित की गई थी. इसके अतिरिक्त, वे शरद पवार के शैक्षणिक संस्थान ‘विद्या प्रतिष्ठान’ की ट्रस्टी भी हैं. यही वह संस्था है जहां अजीत पवार का अंतिम संस्कार किया गया था, और जहां से अब सुनेत्रा पवार के राजनीतिक सफर की नई शुरुआत मानी जा रही है.

एनसीपी के भीतर चल रही हलचल को देखते हुए यह स्पष्ट है कि पार्टी, अजीत पवार के अचानक निधन के बाद उत्पन्न हुए राजनीतिक और भावनात्मक खालीपन को भरने की कोशिश कर रही है. सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व का मानना है कि सुनेत्रा पवार की स्वीकार्यता और जनता के बीच उनके प्रति सहानुभूति की लहर, एनसीपी को एकजुट रखने और बारामती सहित पश्चिम महाराष्ट्र में अपनी पकड़ और मजबूत करने में मदद कर सकती है. अजीत पवार हमेशा से पार्टी संगठन का सशक्त चेहरा रहे हैं, और अब सुनेत्रा पवार को उसी विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपे जाने की तैयारी लगभग तय मानी जा रही है.

इधर, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ एनसीपी नेताओं की बैठक इसी सप्ताह होने की संभावना है. इस बैठक में उपमुख्यमंत्री पद रिक्त रहने के मुद्दे पर विचार-विमर्श के साथ-साथ सरकार में पवार गुट के प्रतिनिधित्व पर भी चर्चा की जाएगी. सूत्र बताते हैं कि भाजपा नेतृत्व भी सुनेत्रा पवार को लेकर सकारात्मक रुख रख सकता है, क्योंकि इससे राज्य सरकार में स्थिरता और सहयोग की भावना बनी रह सकती है.

महाराष्ट्र की राजनीति के जानकारों का कहना है कि अजीत पवार का निधन पार्टी के लिए बड़ा झटका जरूर है, लेकिन सुनेत्रा पवार की नियुक्ति एनसीपी को भावनात्मक और रणनीतिक दोनों स्तरों पर एक नई ऊर्जा दे सकती है. बारामती की जनता, जो पवार परिवार के साथ दशकों से जुड़ी है, अब एक बार फिर उसी परिवार की महिला नेतृत्व को देखने की उम्मीद कर रही है. आने वाले दिनों में यह तय होगा कि क्या अजीत पवार की राजनीतिक विरासत संभालने का जिम्मा वाकई सुनेत्रा पवार को मिलता है या एनसीपी के भीतर कोई और समीकरण आकार लेता है. लेकिन इतना तय है कि अजीत पवार के निधन ने न केवल एनसीपी बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा किया है, और सुनेत्रा पवार को अब उसी शून्य को भरने वाले संभावित चेहरे के रूप में देखा जा रहा है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-