मेटा के स्वामित्व वाले लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप ने यूजर्स की डिजिटल सुरक्षा को एक नए स्तर पर ले जाते हुए “स्ट्रिक्ट अकाउंट सेटिंग्स” नाम का नया फीचर लॉन्च कर दिया है. इस फीचर को लेकर टेक और साइबर सुरक्षा जगत में काफी चर्चा है, क्योंकि इसे व्हाट्सऐप का अब तक का सबसे सख्त और एडवांस प्राइवेसी फीचर माना जा रहा है. कंपनी के मुताबिक, यह फीचर खास तौर पर उन यूजर्स के लिए तैयार किया गया है, जिन्हें अत्यधिक उन्नत और टारगेटेड साइबर हमलों का खतरा रहता है. इनमें पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता, सरकारी तंत्र से जुड़े लोग, सार्वजनिक हस्तियां और संवेदनशील क्षेत्रों में काम करने वाले पेशेवर शामिल हैं.
व्हाट्सऐप ने अपने आधिकारिक ब्लॉग में बताया है कि हाल के वर्षों में साइबर हमलों का स्वरूप काफी बदल गया है. अब केवल सामान्य स्कैम या स्पैम तक ही खतरा सीमित नहीं रहा, बल्कि स्पाइवेयर, फिशिंग लिंक, दुर्भावनापूर्ण अटैचमेंट और टारगेटेड सर्विलांस जैसे हमले भी तेजी से बढ़े हैं. ऐसे में कुछ खास यूजर्स को सामान्य प्राइवेसी सेटिंग्स से कहीं अधिक मजबूत सुरक्षा की जरूरत होती है. इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए स्ट्रिक्ट अकाउंट सेटिंग्स को डिजाइन किया गया है.
कंपनी के अनुसार, इस फीचर को एक्टिव करने के बाद व्हाट्सऐप लगभग लॉकडाउन मोड में काम करने लगता है. इसका सीधा मतलब यह है कि यूजर के अकाउंट पर बाहरी दखल और संभावित हमलों की गुंजाइश काफी हद तक कम हो जाती है. इस मोड के चालू होते ही सबसे पहले उन लोगों से आने वाले अटैचमेंट और मीडिया फाइल्स को ब्लॉक कर दिया जाता है, जो यूजर की कॉन्टैक्ट लिस्ट में शामिल नहीं हैं. साइबर हमलों में अक्सर मैलवेयर या स्पाइवेयर को फोटो, वीडियो या डॉक्यूमेंट के रूप में भेजा जाता है. ऐसे में यह कदम यूजर को बड़ी राहत देता है.
इसके अलावा स्ट्रिक्ट अकाउंट सेटिंग्स के तहत लिंक प्रीव्यू की सुविधा भी बंद कर दी जाती है. विशेषज्ञों के मुताबिक, कई बार लिंक प्रीव्यू के जरिए ही खतरनाक कोड एक्टिव हो जाते हैं या यूजर को फर्जी वेबसाइट की ओर रीडायरेक्ट कर दिया जाता है. लिंक प्रीव्यू बंद होने से फिशिंग और डेटा चोरी के जोखिम में काफी कमी आती है. इसी तरह, यह फीचर इस बात पर भी नियंत्रण लगाता है कि कौन यूजर को कॉल कर सकता है और कौन उसे किसी ग्रुप में जोड़ सकता है. अनजान नंबरों से आने वाली कॉल और ग्रुप इनवाइट्स पर सख्त पाबंदी लग जाती है, जिससे अनचाहे संपर्क और संभावित सोशल इंजीनियरिंग अटैक को रोका जा सकता है.
व्हाट्सऐप ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह फीचर सभी यूजर्स के लिए जरूरी नहीं है. कंपनी ने चेतावनी दी है कि स्ट्रिक्ट अकाउंट सेटिंग्स को ऑन करने से मैसेजिंग और कॉलिंग का अनुभव सीमित हो सकता है. कुछ सुविधाएं, जो आम यूजर्स के लिए सहज और उपयोगी होती हैं, इस मोड में उपलब्ध नहीं रहेंगी. इसलिए इसे केवल तभी इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है, जब किसी यूजर को वास्तविक और गंभीर साइबर खतरे की आशंका हो.
इस नए फीचर के साथ मेटा ने अपनी तकनीकी संरचना में भी बड़े बदलाव की जानकारी दी है. कंपनी के अनुसार, अब व्हाट्सऐप अपने कोर सिस्टम में Rust प्रोग्रामिंग भाषा का अधिक उपयोग कर रहा है. साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच Rust को एक सुरक्षित और आधुनिक भाषा माना जाता है, जो मेमोरी से जुड़ी कमजोरियों को काफी हद तक कम कर देती है. मेटा का दावा है कि इससे यूजर्स की फोटो, वीडियो और मैसेज को स्पाइवेयर और अन्य खतरनाक सॉफ्टवेयर से बेहतर सुरक्षा मिलेगी.
व्हाट्सऐप का यह कदम ऐसे समय पर आया है, जब दुनियाभर में डिजिटल निगरानी और साइबर जासूसी को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं. कई देशों में पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के फोन में स्पाइवेयर पाए जाने की खबरें सामने आ चुकी हैं. इन घटनाओं के बाद टेक कंपनियों पर दबाव बढ़ा है कि वे यूजर्स को अधिक मजबूत और पारदर्शी सुरक्षा विकल्प उपलब्ध कराएं. स्ट्रिक्ट अकाउंट सेटिंग्स को इसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.
हालांकि, मेटा इस तरह का फीचर लाने वाली पहली कंपनी नहीं है. इससे पहले एप्पल ने वर्ष 2022 में अपने यूजर्स के लिए लॉकडाउन मोड लॉन्च किया था. वह भी खास तौर पर हाई-रिस्क प्रोफाइल वाले लोगों के लिए डिजाइन किया गया था, जिसमें मैसेज अटैचमेंट, लिंक प्रीव्यू और अनजान फेसटाइम कॉल जैसी सुविधाओं को सीमित कर दिया जाता है. इसी तरह, गूगल के एंड्रॉयड प्लेटफॉर्म ने भी हाल के वर्षों में एडवांस्ड प्रोटेक्शन मोड पेश किया है, जो खतरनाक ऐप्स, फर्जी वेबसाइट्स और डेटा लीक से यूजर्स को बचाने पर फोकस करता है.
टेक जानकारों का मानना है कि व्हाट्सऐप का स्ट्रिक्ट अकाउंट सेटिंग्स फीचर डिजिटल सुरक्षा को लेकर बढ़ती जागरूकता का संकेत है. आने वाले समय में ऐसे और भी फीचर देखने को मिल सकते हैं, जो यूजर्स को अपनी जरूरत और जोखिम के अनुसार सुरक्षा स्तर चुनने की आजादी देंगे. हालांकि, विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि किसी भी तकनीकी सुरक्षा के साथ-साथ यूजर की सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है. अनजान लिंक पर क्लिक न करना, संदिग्ध अटैचमेंट डाउनलोड न करना और अपनी प्राइवेसी सेटिंग्स की समय-समय पर समीक्षा करना आज के डिजिटल दौर में बेहद अहम हो गया है.
कुल मिलाकर, व्हाट्सऐप का यह नया फीचर उन लोगों के लिए एक मजबूत ढाल की तरह है, जिनकी डिजिटल गतिविधियां किसी न किसी रूप में संवेदनशील हैं. यह न केवल संभावित साइबर हमलों को रोकने में मदद करेगा, बल्कि यह भी दिखाता है कि बड़ी टेक कंपनियां अब केवल सुविधा ही नहीं, बल्कि सुरक्षा को भी प्राथमिकता देने लगी हैं. स्ट्रिक्ट अकाउंट सेटिंग्स के साथ व्हाट्सऐप ने साफ संकेत दिया है कि बदलते साइबर खतरों के दौर में यूजर की सुरक्षा उसके लिए सर्वोपरि है.
व्हाट्सऐप पर स्ट्रिक्ट अकाउंट सेटिंग्स कैसे ऑन करें?
1. व्हाट्सऐप को लेटेस्ट वर्जन में अपडेट करें.
2. व्हाट्सऐप खोलें और Settings में जाएं.
3. Privacy पर टैप करें और नीचे स्क्रॉल करके Advanced चुनें.
4. स्ट्रिक्ट अकाउंट सेटिंग्स पर टैप करें और शर्तों से सहमति दें.
5. फीचर ऑन करने से पहले आपको 6 अंकों का PIN सेट करना हो.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

