लंदन/नई दिल्ली: विश्व के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में से एक, यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज ने भारत में अपनी उपस्थिति को और मजबूत करने के लिए एक नया शोध और सहयोग केंद्र लॉन्च किया है। इस नई पहल के तहत कैम्ब्रिज-इंडिया सेंटर फॉर एडवांस्ड स्टडीज (CAS) स्थापित किया गया है, जिसका उद्देश्य भारत में नवाचार, अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना और दोनों देशों के बीच बौद्धिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करना है। यूनिवर्सिटी ने यह भी घोषणा की कि कुछ अंडरग्रेजुएट पाठ्यक्रमों में अब CBSE कक्षा 12 के अंकांकन को स्वीकार किया जाएगा, हालांकि इसके लिए अतिरिक्त शर्तें भी होंगी।
कैम्ब्रिज के उप-कुलपति डेबोरा प्रेंटिस ने इस अवसर पर कहा, "कैम्ब्रिज-इंडिया CAS भारत के सर्वश्रेष्ठ शोधकर्ताओं और नवाचारकर्ताओं के साथ सहयोग का एक रोमांचक अवसर प्रदान करता है और तेजी से बढ़ती ज्ञान अर्थव्यवस्था के साथ हमारे संबंधों को मजबूत बनाता है।" यह केंद्र केवल एक शोध केंद्र ही नहीं, बल्कि भारत में विश्वविद्यालय की उपस्थिति का हब और बौद्धिक आदान-प्रदान का प्लेटफॉर्म होगा, जो नीति निर्माण और सामाजिक प्रभाव को भी बढ़ावा देगा।
इस केंद्र की स्थापना के साथ ही विश्वविद्यालय ने कैम्ब्रिज इंडिया रिसर्च फाउंडेशन का भी गठन किया है। यह संस्था भारतीय छात्रों के लिए छात्रवृत्ति, फीस और अन्य खर्चों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए काम करेगी। इसके साथ ही यह भारत और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के बीच शोध साझेदारी और नवाचार के अवसरों को भी बढ़ावा देगा। फाउंडेशन का उद्देश्य भारत के सबसे प्रतिभाशाली छात्रों के लिए छात्रवृत्ति और शिक्षा की नई वित्तीय संभावनाओं का पता लगाना है।
ब्रिटेन की उच्चायुक्त लिंडी कैमरन ने कहा, "शिक्षा यूके-भारत विजन 2035 का केंद्र है और यह हमारी साझा प्रतिबद्धता है कि हम वैश्विक प्रतिभा की अगली पीढ़ी का पोषण करें। ये पहल दोनों देशों के विश्व स्तरीय शिक्षा और शोध को और करीब लाने में मदद कर रही हैं।"
कैम्ब्रिज-इंडिया CAS को एक "छत्र" के रूप में तैयार किया गया है, जो विभिन्न कार्यक्रमों और साझेदारियों के लिए एक बहु-साइट और बहुआयामी केंद्र के रूप में काम करेगा। इस केंद्र के तहत भारत के अलग-अलग हिस्सों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनके लिए किसी विशेष भौतिक उपस्थिति की आवश्यकता नहीं होगी। यह केंद्र शिक्षा, शोध और खेल सहित कई क्षेत्रों में भारत के साथ विश्वविद्यालय के संबंधों को मजबूत करेगा।
इस सप्ताह के दौरान, उप-कुलपति डेबोरा प्रेंटिस और वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में भारतीय साझेदारों से मिले। उन्होंने घोषणा की कि कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय का पुरुष क्रिकेट टीम मार्च 2026 में भारत का दौरा करेगा। यह पहला मौका होगा जब पिछले 15 वर्षों में विश्वविद्यालय की पुरुष टीम भारत दौरे पर जाएगी। महिलाओं की टीम के भारत दौरे की योजना भी बनाई जा रही है। उप-कुलपति ने कहा, "हमारे सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट खिलाड़ी अपनी क्षमताओं की परीक्षा भारतीय खिलाड़ियों के खिलाफ लगाने के लिए उत्साहित हैं।"
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय भारत के साथ अपने 150 वर्षों से अधिक पुराने संबंधों पर गर्व करता है। इस दौरान कई महान वैज्ञानिकों और गणितज्ञों ने विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की, जिनमें जगदीश चंद्र बोस, श्रीनिवास रामानुजन, एम.एस. स्वामिनाथन और जयंत नारलिकार शामिल हैं। नोबेल पुरस्कार विजेता सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर, वेंकी रामकृष्णन और अमर्त्य सेन भी विश्वविद्यालय के भारतीय छात्र रहे। इसके अलावा, पूर्व प्रधानमंत्रियों जवाहरलाल नेहरू, राजीव गांधी और मनमोहन सिंह तथा पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा और स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद्र बोस भी कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित छात्र रहे।
उद्योग और व्यवसाय के क्षेत्र में भी कैम्ब्रिज के पूर्व छात्रों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। सर डोराबजी टाटा, सिप्ला के अध्यक्ष युसुफ हमीद, कोब्रा बीयर के संस्थापक लॉर्ड करण बिलिमोरिया, और साहित्य में हरिवंश राय बच्चन और सर सलमान रुशदी जैसे दिग्गज भी कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से जुड़े रहे हैं। विश्वविद्यालय का उद्देश्य इन ऐतिहासिक संबंधों का लाभ उठाकर भारत के साथ नए और गतिशील साझेदारी अवसर विकसित करना है।
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय ने यह भी घोषणा की कि वह मई 2026 में लार्ड्स क्रिकेट ग्राउंड, लंदन में UK-India पार्टनर्स इवेंट आयोजित करेगा, जो ऑक्सफोर्ड-कैम्ब्रिज वार्षिक वर्सिटी क्रिकेट मैच के अवसर पर होगा। इस पहल के तहत शिक्षा, अनुसंधान और खेल के माध्यम से UK और भारत के बीच सहयोग और साझेदारी को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है।
प्रो-वाइस-चांसलर प्रोफेसर भास्कर वीरा, जो विश्वविद्यालय के इतिहास में पहले भारतीय प्रो-वाइस-चांसलर हैं, ने कहा, "कैम्ब्रिज और भारत के बीच संबंधों के इस नए अध्याय को शुरू करना अत्यंत उत्साहजनक है। हमारे कैम्ब्रिज सहयोगियों और भारतीय साझेदारों के जोश को देखकर यह स्पष्ट है कि CAS एक महत्वपूर्ण मंच होगा।"
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय की यह पहल केवल शिक्षा और शोध तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक और खेल संबंधों को भी प्रोत्साहित करेगी। विश्वविद्यालय का यह कदम भारत में शीर्ष प्रतिभाओं को आकर्षित करने, शोध सहयोग को बढ़ावा देने और दोनों देशों के बीच स्थायी बौद्धिक और सामाजिक संबंध स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
भारत में शिक्षा, अनुसंधान और खेल के क्षेत्र में इस नए केंद्र की स्थापना से भविष्य में हजारों छात्रों और शोधकर्ताओं को लाभ मिलेगा। इसके माध्यम से कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय और भारत के बीच ज्ञान, संस्कृति और नवाचार का आदान-प्रदान और भी व्यापक रूप लेगा। इस पहल के साथ ही भारतीय छात्रों के लिए कैम्ब्रिज में अध्ययन और छात्रवृत्ति के अवसर और भी सुलभ और प्रभावशाली होंगे।
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय का यह कदम भारत में अपनी उपस्थिति को और मजबूत करने, CBSE कक्षा 12 को स्वीकार करने, खेल और शोध सहयोग बढ़ाने और भारतीय प्रतिभाओं के लिए नए अवसर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

