ग्वालियर. एमपी हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी करने वाले सरकारी अधिकारियों के मामले में सुनवाई हुई. हाई कोर्ट ने इन 26 अधिकारी-कर्मचारियों में से 24 के खिलाफ एससी-एसटी की धाराओं में मामला दर्ज करने के आदेश दिए हैं. इनमें से 12 अफसर हैं. ये मामला पिछले साल एसटीएफ की जांच में सामने आया था.
आरटीआई एक्टिविस्ट ने किया था गड़बड़ी का खुलासा
मध्य प्रदेश शासन द्वारा विभिन्न भर्तियों के दौरान कुछ अभ्यर्थियों द्वारा फर्जी जाति प्रमाण पत्र लगाकर नौकरियां हासिल की गई थी. इनमें डॉक्टर, इंजीनियर आदि शामिल हैं. ये मामला आरटीआई एक्टिविस्ट गौरी शंकर राजपूत की शिकायत के बाद उजागर हुआ था. मामले की जांच एसटीएफ द्वारा शुरू की गई थी. साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर शुरुआत में एसटीएफ द्वारा इन सभी के खिलाफ जांच की गई तो पता चला कि आरोपी इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 8 से लेकर 15 साल तक नौकरी भी कर चुके हैं.
एससी-एसटी एक्ट लगाने का आदेश
हाई कोर्ट के वकील विश्वजीत रातोनिया ने बताया इस केस में आरोपियों द्वारा लगायी गई याचिका को ग्वालियर खंड पीठ ने सुनवाई करते हुए खारिज कर दिया. साथ ही इस कृत्य को मध्यप्रदेश के मूल एससी एसटी जाति वर्ग के अभ्यर्थियों का हक छीनना माना है. आरोपियों के खिलाफ उच्च न्यायालय ने अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(1) (यक) व 3(1) (जा) (ए) जोडऩे के आदेश दिए हैं.
पढ़ाई में अलग, नौकरी के लिए अलग जाति प्रमाण-पत्र
ग्वालियर में एसटीएफ द्वारा केस दर्ज कर की जा रही जांच में ये बात सामने आई कि आरोपियों ने पढ़ाई के दौरान भी फज़ऱ्ी दस्तावेजों के आधार पर ओबीसी और अन्य कोटों का फायदा लिया और जब नौकरी के लिए आवेदन किया, तब भी एससी वर्ग के फर्जी प्रमाणपत्र लगाए. एसटीएफ की जांच अभी जारी है.
किस पद के कितने अधिकारियों पर जांच
जिनके खिलाफ एसटीएफ जांच कर रही है. इनमें 4 डॉक्टर, 1 आयुष अधिकारी, 1 इंजीनियर, 1 जीएम, एक संयुक्त संचालक, एक सूबेदार, 1 उपनिरीक्षक, 4 आरक्षक, 3 न्यायालय के स्टेनो 1 फार्मासिस्ट और 8 शिक्षक हैं, जो प्रदेश के ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, दमोह, बैतूल, भोपाल, श्योपुर और राजगढ़ जिलों में पदस्थ हैं.
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