गोरखपुर. पूर्वोत्तर रेलवे में रेलवे भर्ती बोर्ड के जरिए फर्जी नियुक्ति करने के मामले की जांच अब सीबीआई करेगी. सीबीआई ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है. इससे जुड़े आरोपियों को जल्द ही पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा. भर्ती बोर्ड में तैनात दो कर्मचारियों ने फर्जीवाड़ा कर अपने बेटों को पैनल में शामिल कर लिया था और उनकी नियुक्ति करा दी थी. इस मामले में तत्कालीन बोर्ड अध्यक्ष के संलिप्तता की जांच भी हो रही है.
बता दें कि रेलवे की सेंट्रल विजिलेंस की टीम ने इस मामले की गहनता से जांच की है. दोनों कर्मचारियों पर कार्रवाई भी हो चुकी है. पुलिस इस मामले में गैंगस्टर की कार्रवाई भी कर चुकी है. अब सीबीआई यह देखेगी कि कहीं और अधिक गड़बड़ी तो नहीं की गई थी. पुराने मामलों को भी इससे जोड़कर देखा जाएगा. माना जा रहा है कि केस सीबीआई के हाथ में जाने के बाद कुछ और लोगों पर कार्रवाई हो सकती है.
ऐसे हुआ था रेलवे भर्ती में फर्जीवाड़ा
जानकारी के मुताबिक रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) गोरखपुर में तैनात रहे चंद्रशेखर आर्य और रामसजीवन ने 26 अप्रैल 2024 को जारी पैनल में अपने बेटों का नाम शामिल कर दिया था. दरअसल जो पैनल बना था, उसमें शामिल दो अभ्यर्थियों ने यहां आने से इनकार कर दिया था.
चयनित अभ्यर्थियों ने नौकरी से किया इंकार, तो जोड़ा बेटों का नाम
उनकी कहीं और नौकरी लग गई थी. उन्हें डाक्यूमेंट वेरीफिकेशन के लिए बुलाते समय यह जानकारी कर्मचारियों को हो गई थी. इसका फायदा उठाते हुए दोनों ने चालाकी से उसकी रोल नंबर के आगे अपने बेटों का नाम दर्ज कर लिया और पैनल को अप्रूव कराकर ज्वाइनिंग के लिए भेज दिया.
आरोपी कर्मियों के पुत्रों की बिना परीक्षा लग गई थी नौकरी
उनके पुत्रों ने न तो फार्म भरा था, न परीक्षा ही और न ही उनका मेडिकल कराया गया लेकिन माडर्न कोच फैक्ट्री रायबरेली में उन्हें नौकरी मिल गई. यह पैनल तत्कालीन चेयरमैन के हस्ताक्षर से जारी हुआ था. चंद्रशेखर आर्य ने अपने बेटे राहुल प्रताप व निजी सचिव रामसजीवन ने अपने बेटे सौरभ कुमार को नौकरी दी थी.
बिगड़ा सामंजस्य तब खुला पोल
आपसी तालमेल गड़बड़ होने के बाद तत्कालीन चेयरमैन ने यह गड़बड़ी पकडऩे का दावा किया था. आनन-फानन में रेल कोच फैक्ट्री रायबरेली को पत्र लिखकर गड़बड़ी की जानकारी दी गई, जिसके बाद दोनों कर्मचारियों को निकाल दिया गया. हालांकि जांच में चेयरमैन को भी जिम्मेदार मानते हुए निलंबित कर दिया गया. दोनों रेल कर्मियों पर एफआईआर भी दर्ज कराई गई.
पहले भी हो चुकी है गड़बड़ी, स्वीकृत पदों से ज्यादे दुगुना भर्ती निकाली
रेलवे भर्ती बोर्ड में यह गड़बड़ी तब हुई, जब पहले से ही एक मामले में विजिलेंस की जांच चल रही थी. पूर्वोत्तर रेलवे में वर्ष 2018-19 में सहायक लोको पायलटों की भर्ती में भी गड़बड़ी का मामला सामने आया था. बोर्ड ने स्वीकृत पदों से दोगुनी भर्ती निकाल दी थी. परीक्षा के बाद 1681 अभ्यर्थियों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हुई तो खेल उजागर हुआ.
तत्कालीन चेयरमैन भी किए थे गड़बड़ी
यह मामला खुलने के बाद तत्कालीन चेयरमैन को हटा दिया गया. इन्होंने भी लिखित परीक्षा के बाद कर्मचारियों के सहयोग से पैनल बनाने, जारी करने, अभिलेखों की जांच में हेराफेरी व मेडिकल में गड़बड़ी शुरू कर दी. मनमाने ढग से पैनल बने और नियुक्ति दी गई.

