भारत अमेरिका ट्रेड डील पर पीयूष गोयल ने दी बड़ी प्रतिक्रिया, कहा यह देश के लिए सबसे अच्छा सौदा

भारत अमेरिका ट्रेड डील पर पीयूष गोयल ने दी बड़ी प्रतिक्रिया, कहा यह देश के लिए सबसे अच्छा सौदा

प्रेषित समय :21:51:20 PM / Tue, Feb 3rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. भारत और अमेरिका के बीच सोमवार रात को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फोन वार्ता के बाद हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते ने राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और आर्थिक हलचल पैदा कर दी है. वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को इस डील का स्वागत करते हुए इसे “देश के लिए सभी पड़ोसी और प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में सबसे अच्छा सौदा” बताया.

गोयल ने कहा कि यह समझौता किसानों, मछुआरों, माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs), युवा उद्यमियों और कुशल कर्मचारियों के लिए अपार अवसर खोलेगा. उन्होंने बताया कि अमेरिका और भारत के बीच किए गए इस $500 बिलियन डॉलर के समझौते के तहत अमेरिकी पक्ष ने भारतीय वस्तुओं पर वर्तमान 25 प्रतिशत की टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति जताई है. इसके साथ ही sensitive क्षेत्रों जैसे कृषि और डेयरी के हितों की रक्षा भारत ने सुनिश्चित की है.

गोयल ने कहा कि यह सौदा भारत और अमेरिका के बीच व्यक्तिगत मित्रता के कारण भी संभव हुआ. उन्होंने कहा कि मोदी और ट्रंप की व्यक्तिगत संबंधों ने व्यापारिक समझौते में विश्वास और गति लाई. मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि यह समझौता देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभ संकेत है.

वाणिज्य मंत्री ने विस्तार से बताया कि यह समझौता विशेष रूप से इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल, रत्न और आभूषण, चमड़ा और फुटवियर तथा मरीन सेक्टर में काम कर रहे व्यवसायियों और उद्यमियों के लिए नए अवसर खोलेगा. इसके अलावा यह सौदा किसानों और छोटे उद्योगों के लिए वैश्विक बाजार में प्रवेश के दरवाजे खोलेगा. गोयल ने कहा कि इससे भारत की अर्थव्यवस्था में निवेश और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और यह “चाइना-प्लस-वन” नीति को और मजबूती देगा.

इस समझौते की सबसे बड़ी राजनीतिक चर्चा यह है कि विपक्ष ने इसे “किसानों और देश की मेहनत की बिक्री” करार दिया है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी अमेरिकी दबाव में आकर यह डील अंतिम रूप देने पर सहमत हो गए और इससे भारतीय किसानों के हितों को नुकसान होगा. इस पर गोयल ने पलटवार करते हुए कहा कि राहुल गांधी देश को गुमराह कर रहे हैं और उनके पास भारत की प्रगति में कोई भूमिका नहीं है.

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह डील मोदी सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक उपलब्धि है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि भारत ने अमेरिका से 500 बिलियन डॉलर के सामान खरीदने, अमेरिकी टैरिफ को शून्य करने और रूस से तेल आयात बंद करने पर सहमति दी है, जबकि भारत की ओर से इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई. इसके बावजूद इस डील को निवेशकों और उद्योग जगत ने स्वागत किया.

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक अवसर और निवेश बढ़ सकते हैं. भारतीय अर्थव्यवस्था में “चाइना-प्लस-वन” नीति को गति मिलने की उम्मीद है, जिससे भारत विदेशी निवेशकों के लिए चीन का विकल्प बन सकता है. वर्तमान में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है और इस डील से भारतीय वस्तुओं की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ने की संभावना है.

गोयल ने यह भी बताया कि अमेरिकी पक्ष ने इस डील में कृषि, डेयरी और संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सहमति दी है. अमेरिका की कृषि सचिव ब्रूक रोलिंस ने कहा है कि इस डील के तहत अमेरिकी कृषि उत्पादों के भारत में प्रवेश की संभावना बढ़ेगी. इसके साथ ही भारत ने यह सुनिश्चित किया कि उसकी घरेलू कृषि और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के हितों पर कोई खतरा न हो.

इस डील के पीछे लंबे समय से चल रहे अमेरिका-भारत वार्ता की प्रक्रिया है. ट्रंप प्रशासन के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध कुछ समय के लिए तनावपूर्ण रहे, लेकिन अब यह समझौता द्विपक्षीय व्यापार को नए स्तर पर ले जाने की दिशा में कदम माना जा रहा है. भारत की प्रमुख आर्थिक संस्थाओं का मानना है कि यह सौदा निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ भारत की निर्यात क्षमताओं को भी मजबूत करेगा.

विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका की ओर से टैरिफ कम करने का यह कदम भारत में उद्योग और विनिर्माण निवेश को आकर्षित करेगा. इससे भारत वैश्विक व्यापार में एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी भूमिका निभा सकता है. यह समझौता भारतीय युवाओं और उद्यमियों के लिए भी नए अवसर प्रदान करेगा.

राजनीतिक दृष्टिकोण से देखें तो यह डील प्रधानमंत्री मोदी के लिए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में सामने आई है. विपक्षी दलों ने इसे आलोचनात्मक नजरिए से देखा है, लेकिन सरकार ने इसे देश के हित में रणनीतिक कदम बताया है. उद्योग जगत ने इसे सकारात्मक संकेत माना है और निवेश और व्यापार में नए अवसरों के तौर पर देखा है.

वाणिज्य मंत्री ने कहा कि भारत ने इस डील में संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा की और व्यापार में पारदर्शिता सुनिश्चित की. इस समझौते से भारत-अमेरिका संबंध और मजबूत होंगे, और वैश्विक व्यापार में भारत की भूमिका और प्रभाव बढ़ेगा.

इस डील के तहत दोनों देशों ने एक-दूसरे के व्यापारिक हितों को ध्यान में रखते हुए टैरिफ में कटौती की और व्यापारिक सहयोग बढ़ाने की सहमति दी. इसके अलावा, समझौते से ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, कृषि और लोगों के बीच संपर्क के क्षेत्र में भी नए अवसर खुलेंगे.

कुल मिलाकर, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह दोनों देशों के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक संबंधों को भी नई दिशा देगा. यह सौदा किसानों, मछुआरों, छोटे उद्यमियों और युवाओं के लिए अवसरों के द्वार खोलेगा और भारत की वैश्विक अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धात्मक भूमिका को और मजबूत करेगा.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-