सुको में ममता बैनर्जी ने एसआईआर पर खुद रखी दलीलें, बनी पहली सीएम, जानिए कैसे कोई खुद कर सकता है अपनी पैरवी

सुको में ममता बैनर्जी ने एसआईआर पर खुद रखी दलीलें, बनी पहली सीएम, जानिए कैसे कोई खुद कर सकता है अपनी पैरवी

प्रेषित समय :16:14:12 PM / Wed, Feb 4th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार 4 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) मुद्दे पर दायर अपनी याचिका में खुद अपनी दलीलें रखीं.

सुप्रीम कोर्ट में सीएम ने अपना पक्ष रखते हुए चुनाव आयोग को जमकर घेरा. सीएम ने आयोग को व्हाट्सएप कमीशन बताते हुए कहा कि बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने इस मामले की सुनवाई की. अदालत ने याचिका पर सुप्रीम कोर्ट को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. अब मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी को होगी.

यह पहला मौका है जब किसी राज्य की सीएम सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका पर खुद दलीलें पेश करती नजर आईं. दरअसल, ममता बनर्जी खुद प्रशिक्षित वकील हैं. कानून के जानकारों के अनुसार भारतीय न्याय व्यवस्था में कोई भी व्यक्ति  चाहे वह मुख्यमंत्री हो या साधारण नागरिक अपना केस खुद लड़ सकता है, लेकिन यह कोई स्वत: अधिकार नहीं है.

यह पार्टी इन पर्सन के तहत आता है जहां याचिकाकर्ता को कोर्ट की अनुमति लेनी पड़ती है. एडवोकेट्स एक्ट की धारा 32 के मुताबिक अदालत किसी भी व्यक्ति को अपनी अनुमति से पेश होने की इजाजत दे सकती है भले वह पेशेवर वकील हो या नहीं. लेकिन यह विशेष परिस्थितियों में होता है जैसे जब मामला व्यक्तिगत हो या याचिकाकर्ता कानूनी रूप से अपनी पैरवी करने में सक्षम हो.

अपनी पैरवी के लिए याचिकाकर्ता को कानून में तय एक पूरी प्रक्रिया तय करनी पड़ती है. जैसे खुद पैरवी के लिए वह याचिका के साथ अलग से आवेदन देगा. फिर जज यह देखते हैं कि क्या याचिकाकर्ता कोर्ट की मदद कर सकता है या मामला ठीक से संभाल सकता है. आमतौर पर सिविल या रिट याचिकाओं में कोर्ट ऐसी अनुमति दे देता है लेकिन क्रिमिनल केस में ऐसे कम ही उदाहरण देखने को मिलता हैं क्यों ऐसे मसलों में विशेषज्ञता की जरूरत होती है
 

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-