आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। निजी फोटो, बैंकिंग जानकारी, चैट, दस्तावेज और कई संवेदनशील जानकारियां अब मोबाइल फोन में ही सुरक्षित रखी जाती हैं। लेकिन तकनीकी विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि कुछ सामान्य और लोकप्रिय मोबाइल ऐप्स उपयोगकर्ताओं का निजी डेटा चोरी कर सकते हैं। हाल ही में सामने आई रिपोर्ट्स के अनुसार फ्री वीपीएन, क्लीनर, फ्लैशलाइट और फोटो एडिटिंग ऐप्स जैसे कई एप्लिकेशन उपयोगकर्ताओं की निजी जानकारी को बिना जानकारी के एक्सेस कर रहे हैं और इसे थर्ड पार्टी सर्वर पर भेज सकते हैं।
तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि स्मार्टफोन में इंस्टॉल किए गए ऐप्स के जरिए डेटा लीक का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। कई बार लोग बिना सोचे समझे ऐप्स को सभी परमिशन दे देते हैं, जिससे उनकी निजी जानकारी खतरे में पड़ सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐप इंस्टॉल करते समय मांगी जाने वाली अनुमति को ध्यान से पढ़ना बेहद जरूरी है क्योंकि यही डेटा सुरक्षा का पहला कदम होता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि फ्री वीपीएन ऐप्स सबसे ज्यादा जोखिम वाले माने जा रहे हैं। वीपीएन का इस्तेमाल इंटरनेट ब्राउजिंग को सुरक्षित और निजी बनाने के लिए किया जाता है, लेकिन मुफ्त वीपीएन सेवाएं कई बार उपयोगकर्ताओं की ब्राउजिंग हिस्ट्री और ऑनलाइन गतिविधियों को अपने सर्वर पर स्टोर कर लेती हैं। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ फ्री वीपीएन कंपनियां उपयोगकर्ताओं के डेटा को विज्ञापन कंपनियों या अन्य एजेंसियों को बेच सकती हैं। इससे न केवल प्राइवेसी प्रभावित होती है बल्कि साइबर फ्रॉड का खतरा भी बढ़ सकता है।
इसके अलावा फ्लैशलाइट और क्लीनर जैसे साधारण दिखने वाले ऐप्स भी डेटा सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल लगभग सभी स्मार्टफोन में फ्लैशलाइट फीचर पहले से मौजूद होता है, लेकिन कई लोग अलग से फ्लैशलाइट ऐप डाउनलोड कर लेते हैं। ये ऐप्स अक्सर फोन की स्टोरेज, कॉन्टैक्ट्स और अन्य निजी जानकारी तक पहुंच मांगते हैं, जिसकी वास्तव में जरूरत नहीं होती। इसी तरह क्लीनर और बूस्टर ऐप्स फोन की स्पीड बढ़ाने और स्टोरेज साफ करने का दावा करते हैं, लेकिन कई बार ये संवेदनशील डेटा तक पहुंच बना लेते हैं।
फोटो एडिटिंग, फेस फिल्टर और वीडियो एडिटिंग ऐप्स भी डेटा चोरी के मामले में चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। सोशल मीडिया के बढ़ते ट्रेंड के कारण लोग बड़ी संख्या में इन ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ फेस फिल्टर और एडिटिंग ऐप्स उपयोगकर्ताओं के चेहरे का डेटा कैप्चर कर अपने सर्वर पर भेज सकते हैं। यह डेटा भविष्य में गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे पहचान चोरी या डिजिटल फ्रॉड का खतरा बढ़ सकता है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार सबसे बड़ी समस्या यह है कि कई ऐप्स जरूरत से ज्यादा परमिशन मांगते हैं। उदाहरण के तौर पर यदि कोई फोटो एडिटिंग ऐप उपयोगकर्ता के मैसेज, कॉल लॉग या माइक्रोफोन तक पहुंच मांगता है तो यह संदिग्ध माना जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि उपयोगकर्ताओं को ऐसे ऐप्स से सावधान रहना चाहिए और केवल जरूरी परमिशन ही देनी चाहिए।
तकनीकी जानकारों ने यह भी बताया कि कई ऐप्स उपयोगकर्ताओं को आकर्षित करने के लिए मुफ्त सेवाएं देते हैं। हालांकि इन ऐप्स की कमाई का मुख्य जरिया उपयोगकर्ताओं का डेटा होता है। कई बार लोग मुफ्त सेवा के लालच में ऐप डाउनलोड कर लेते हैं और अनजाने में अपनी निजी जानकारी साझा कर देते हैं।
डेटा सुरक्षा विशेषज्ञों ने उपयोगकर्ताओं को कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां बरतने की सलाह दी है। सबसे पहले केवल भरोसेमंद और आधिकारिक ऐप स्टोर से ही ऐप डाउनलोड करना चाहिए। अज्ञात स्रोतों से ऐप डाउनलोड करने से डेटा चोरी का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा ऐप इंस्टॉल करने से पहले उसके रिव्यू और रेटिंग जरूर देखनी चाहिए।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि उपयोगकर्ताओं को अपने फोन में इंस्टॉल ऐप्स की समय-समय पर जांच करनी चाहिए। जिन ऐप्स का उपयोग नहीं किया जा रहा है या जो जरूरत से ज्यादा परमिशन मांग रहे हैं, उन्हें तुरंत हटा देना चाहिए। इसके अलावा फोन की सेटिंग में जाकर ऐप परमिशन को मैन्युअली कंट्रोल करना भी जरूरी माना जाता है।
साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने यह भी चेतावनी दी है कि डेटा चोरी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कई बार चोरी हुआ डेटा साइबर अपराधियों के हाथ लग जाता है, जिससे बैंकिंग फ्रॉड, पहचान चोरी और ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसी घटनाएं बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल सुरक्षा के लिए उपयोगकर्ताओं को जागरूक होना बेहद जरूरी है।
टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं को सुविधा देने के साथ-साथ कई जोखिम भी लेकर आते हैं। इसलिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते समय सतर्क रहना जरूरी है। किसी भी ऐप को बिना समझे सभी परमिशन देना भविष्य में गंभीर समस्या बन सकता है।
सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई यूजर्स ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया है कि कुछ ऐप्स इंस्टॉल करने के बाद फोन में अनचाहे विज्ञापन और संदिग्ध गतिविधियां बढ़ गई थीं। इसके बाद उन्होंने ऐसे ऐप्स को हटाकर अपनी सुरक्षा सुनिश्चित की।
कुल मिलाकर विशेषज्ञों का कहना है कि स्मार्टफोन का सुरक्षित उपयोग ही डेटा सुरक्षा का सबसे प्रभावी तरीका है। उपयोगकर्ताओं को केवल वही ऐप्स इंस्टॉल करने चाहिए जो वास्तव में जरूरी हों और जिनकी विश्वसनीयता साबित हो चुकी हो। तकनीकी सावधानी और जागरूकता के जरिए ही निजी जानकारी को सुरक्षित रखा जा सकता है। लगातार बढ़ते डिजिटल खतरे के बीच यह जरूरी हो गया है कि लोग अपने डेटा की सुरक्षा को प्राथमिकता दें और किसी भी संदिग्ध ऐप से दूरी बनाए रखें।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

