नई दिल्ली. अमेरिकी एआई कंपनी एंथ्रोपिक द्वारा विकसित उन्नत एंटरप्राइज ऑटोमेशन टूल के सामने आने के बाद वैश्विक आईटी उद्योग में हलचल तेज हो गई है और इसका सीधा असर भारत की प्रमुख आईटी कंपनियों के भविष्य के राजस्व अनुमानों पर पड़ता दिखाई दे रहा है. बाजार विश्लेषकों और उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि नई एआई आधारित तकनीक पारंपरिक आईटी सेवाओं के मॉडल को चुनौती दे सकती है, जिससे टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस और एचसीएल टेक जैसी कंपनियों की आय वृद्धि की गति पर दबाव बन सकता है. हालांकि कई विशेषज्ञ यह भी मान रहे हैं कि यही तकनीकी बदलाव इन कंपनियों के लिए नए अवसर भी पैदा कर सकता है.
एंथ्रोपिक के नए एंटरप्राइज एआई असिस्टेंट की सबसे बड़ी विशेषता यह बताई जा रही है कि यह केवल कर्मचारियों की सहायता करने तक सीमित नहीं है बल्कि पूरे कारोबारी वर्कफ्लो को स्वतः संचालित करने की क्षमता रखता है. यह सिस्टम कानूनी दस्तावेजों की जांच, अनुपालन प्रक्रियाओं का मूल्यांकन, बिक्री रणनीति तैयार करने, मार्केटिंग डेटा का विश्लेषण, वित्तीय समायोजन, डेटा विजुअलाइजेशन और एसक्यूएल आधारित रिपोर्टिंग जैसे जटिल कार्यों को स्वचालित तरीके से पूरा कर सकता है. यही वजह है कि निवेशकों को आशंका है कि भविष्य में कंपनियां कई ऐसे कामों के लिए बाहरी आईटी सेवा प्रदाताओं पर कम निर्भर हो सकती हैं.
टीसीएस, जो भारत की सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी मानी जाती है, लंबे समय से आउटसोर्सिंग आधारित सेवाओं के जरिए वैश्विक बाजार में मजबूत पकड़ बनाए हुए है. कंपनी का प्रमुख राजस्व स्रोत ग्राहकों को सॉफ्टवेयर विकास, सिस्टम मेंटेनेंस, टेक्निकल सपोर्ट और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन सेवाएं प्रदान करना रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एआई आधारित ऑटोमेशन टूल्स इन सेवाओं को तेजी से बदलने लगते हैं तो टीसीएस के पारंपरिक बिलेबल आवर्स मॉडल पर असर पड़ सकता है. यह मॉडल इस बात पर आधारित रहा है कि कंपनी के इंजीनियर और विशेषज्ञ ग्राहकों के प्रोजेक्ट्स पर काम करते हैं और उसी के आधार पर राजस्व उत्पन्न होता है. यदि एआई टूल्स कई प्रक्रियाओं को स्वतः पूरा करने लगते हैं तो ग्राहक कम मानव संसाधन का उपयोग करना चाहेंगे, जिससे कंपनी के राजस्व वृद्धि दर पर दबाव बन सकता है.
हालिया कारोबारी प्रदर्शन के आंकड़े भी इस बदलते माहौल की ओर संकेत कर रहे हैं. टीसीएस की राजस्व वृद्धि पिछले कुछ तिमाहियों में सीमित दायरे में रही है और कई विश्लेषकों का मानना है कि ग्राहकों द्वारा तकनीकी खर्चों की समीक्षा और एआई निवेश की प्राथमिकता इस प्रवृत्ति के पीछे एक महत्वपूर्ण कारण हो सकती है. उद्योग सूत्रों के अनुसार कंपनी ने अपने कार्यबल संरचना में भी बदलाव किए हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि वह भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप खुद को ढालने की कोशिश कर रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह परिवर्तन कंपनी के लिए अल्पकालिक दबाव पैदा कर सकता है, लेकिन दीर्घकाल में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए यह आवश्यक कदम माना जा रहा है.
एचसीएल टेक की स्थिति कुछ अलग लेकिन समान चुनौतियों से घिरी हुई दिखाई दे रही है. कंपनी ने हाल के वर्षों में एआई आधारित सेवाओं और समाधान विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया है. कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, एआई और एडवांस्ड एनालिटिक्स से जुड़े प्रोजेक्ट्स से उसे पहले ही उल्लेखनीय राजस्व प्राप्त होने लगा है. विश्लेषकों का कहना है कि एचसीएल टेक ने समय रहते एआई को अपनी सेवा संरचना में शामिल करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, जिससे वह संभावित जोखिमों को कम करने में सक्षम हो सकती है. हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि पारंपरिक आईटी सेवाओं से जुड़े अनुबंधों में संभावित गिरावट को पूरी तरह संतुलित करना अभी भी चुनौती बना हुआ है.
वैश्विक बाजार में निवेशकों की प्रतिक्रिया से भी यह स्पष्ट हो गया है कि आईटी सेवाओं के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है. कई अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्मों ने चेतावनी दी है कि यदि एंटरप्राइज एआई प्लेटफॉर्म कंपनियों के संचालन मॉडल को तेजी से बदलते हैं तो आउटसोर्सिंग उद्योग की वृद्धि दर धीमी पड़ सकती है. कुछ अनुमानों के अनुसार आने वाले वर्षों में पारंपरिक आईटी सेवाओं की राजस्व वृद्धि दर सीमित रह सकती है और कई कंपनियों को अपने व्यापार मॉडल में व्यापक बदलाव करना पड़ सकता है.
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय आईटी कंपनियों के लिए सबसे बड़ा जोखिम यह है कि वे लंबे समय से लागत-प्रभावी मानव संसाधन मॉडल पर निर्भर रही हैं. यदि ग्राहक एआई आधारित ऑटोमेशन को प्राथमिकता देते हैं तो उन्हें कम कर्मचारियों के साथ अधिक कार्य करने की क्षमता मिल सकती है. इससे सेवा प्रदाताओं की मांग में कमी आने की आशंका जताई जा रही है. हालांकि, कई विश्लेषकों का यह भी कहना है कि बड़े पैमाने पर डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और एआई इंटीग्रेशन के लिए कंपनियों को विशेषज्ञ आईटी भागीदारों की जरूरत बनी रहेगी, जिससे भारतीय आईटी कंपनियों को नए अवसर मिल सकते हैं.
टीसीएस और एचसीएल टेक जैसी कंपनियां पहले ही एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ा रही हैं. उद्योग सूत्रों का कहना है कि आने वाले समय में इन कंपनियों का ध्यान केवल सॉफ्टवेयर सेवाएं प्रदान करने तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि वे एआई-संचालित समाधान, प्लेटफॉर्म विकास और रणनीतिक परामर्श सेवाओं पर अधिक जोर देंगी. इससे उनके राजस्व मॉडल में बदलाव देखने को मिल सकता है, जहां पारंपरिक सेवाओं का हिस्सा कम और उच्च मूल्य वाली डिजिटल सेवाओं का हिस्सा बढ़ सकता है.
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में आईटी उद्योग में प्रतिस्पर्धा का स्वरूप बदल सकता है. जो कंपनियां तेजी से एआई तकनीक को अपनाने और ग्राहकों की बदलती जरूरतों के अनुरूप सेवाएं विकसित करने में सफल होंगी, वे बाजार में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रख सकेंगी. वहीं जो कंपनियां पारंपरिक मॉडल पर निर्भर रहेंगी, उन्हें राजस्व वृद्धि और लाभप्रदता दोनों मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.
निवेशकों के लिए भी यह स्थिति सतर्कता का संकेत मानी जा रही है. विश्लेषकों का कहना है कि आईटी कंपनियों के भविष्य का आकलन करते समय केवल मौजूदा राजस्व आंकड़ों को नहीं बल्कि उनकी एआई रणनीति, अनुसंधान एवं विकास निवेश और डिजिटल सेवाओं की विस्तार योजना को भी ध्यान में रखना जरूरी होगा. विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी बदलाव के इस दौर में भारतीय आईटी कंपनियां यदि समय रहते अपनी रणनीति में बदलाव करती हैं तो वे वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रख सकती हैं, लेकिन परिवर्तन में देरी उनके लिए जोखिम बढ़ा सकती है.
कुल मिलाकर एआई ऑटोमेशन की तेजी से बढ़ती क्षमता ने वैश्विक आईटी उद्योग को एक ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है जहां पारंपरिक सेवाओं और नई तकनीकों के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है. टीसीएस और एचसीएल टेक जैसी कंपनियां इस बदलाव के केंद्र में हैं और उनके भविष्य के राजस्व प्रदर्शन पर अब काफी हद तक इस बात का असर पड़ेगा कि वे एआई क्रांति के साथ कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से कदम मिलाती हैं.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

