प्रशासन का मानवीय चेहरा: जब ‘मसीहा’ बनकर बेबस जेठू के द्वार पहुंचे निगमायुक्त

प्रशासन का मानवीय चेहरा: जब ‘मसीहा’ बनकर बेबस जेठू के द्वार पहुंचे निगमायुक्त

प्रेषित समय :16:54:05 PM / Wed, Feb 4th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. अक्सर नगर निगम को हम फाइलों, नियमों और सख्त कार्रवाई के चश्मे से देखते हैं, लेकिन जब कभी व्यवस्था में संवेदना शामिल हो जाए, तो वही    प्रशासन किसी के लिए जीवन की सबसे बड़ी उम्मीद बन जाता है.  मध्यप्रदेश के जबलपुर में नगर निगम आयुक्त राम प्रकाश अहिरवार ने करिया पत्थर मरघटाई क्षेत्र के एक अभावग्रस्त परिवार के आंसू पोंछकर मानवता की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने प्रशासन की पारंपरिक छवि को बदलकर रख दिया.

करिया पत्थर मरघटाई क्षेत्र के निवासी जेठू वंशकार और उनके परिवार के लिए निगम प्रशासन की यह पहल किसी चमत्कार से कम नहीं रही. लंबे समय से बीमारी और आर्थिक अभाव से जूझ रहा यह परिवार निराशा के अंधेरे में घिरा हुआ था. ऐसे समय में जब निगमायुक्त स्वयं मदद लेकर उनके द्वार पहुंचे, तो मानो टूटती उम्मीदों में फिर से जान आ गई और जीवन में नई रोशनी दिखाई देने लगी.

दरअसल नगर निगम आयुक्त राम प्रकाश अहिरवार क्षेत्र के नियमित निरीक्षण पर निकले थे. इसी दौरान उनकी नजर गंभीर रूप से बीमार जेठू वंशकार पर पड़ी. बातचीत में सामने आया कि जेठू लंबे समय से गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं और आर्थिक तंगी के कारण उनका समुचित इलाज नहीं हो पा रहा है. परिवार की स्थिति ऐसी थी कि रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना ही एक बड़ी चुनौती बना हुआ था, इलाज का खर्च उठाना तो उनके लिए असंभव जैसा था. यह जानकर निगमायुक्त ने इसे केवल एक प्रशासनिक मामला मानकर आगे बढ़ जाना उचित नहीं समझा, बल्कि इसे अपना मानवीय कर्तव्य और जिम्मेदारी माना.

स्थिति की गंभीरता को समझते ही निगमायुक्त ने बिना किसी देरी के मौके से ही शासकीय चिकित्सकों से संपर्क किया और जेठू वंशकार के बेहतर उपचार की व्यवस्था करने का आग्रह किया. उनके निर्देश पर डॉक्टरों की टीम सीधे जेठू के घर पहुंची और इलाज शुरू किया गया. जब डॉक्टरों की टीम घर पहुंची, तो परिवार के सदस्यों की आंखों में राहत और कृतज्ञता के भाव साफ दिखाई दिए. लंबे समय से बीमारी, लाचारी और बेबसी से जूझ रहे इस परिवार को घर पर ही इलाज मिलता देख मानो उनकी बुझती उम्मीदें फिर से जीवित हो उठीं. आसपास के लोगों ने भी इस मानवीय पहल को देखा और निगम प्रशासन की संवेदनशीलता की खुले दिल से सराहना की.

निगमायुक्त राम प्रकाश अहिरवार ने यहीं रुकना उचित नहीं समझा. उन्होंने यह भी महसूस किया कि इलाज के साथ-साथ परिवार की आर्थिक सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है. इसी सोच के तहत उन्होंने नगर निगम उपायुक्त श्रीमती अंकिता जैन को निर्देश दिए और उनकी टीम को सीधे जेठू वंशकार के घर भेजा. निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर सभी आवश्यक दस्तावेजों की जांच की और कागजी औपचारिकताओं को वहीं पूरा किया. परिणामस्वरूप जेठू वंशकार की लंबे समय से रुकी हुई पेंशन तत्काल बहाल कर दी गई. पेंशन शुरू होते ही परिवार को आर्थिक राहत मिली और उनके चेहरों पर संतोष और भरोसे की झलक साफ नजर आने लगी.

इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया कि यदि प्रशासन संवेदनशीलता और तत्परता के साथ काम करे, तो समाज के सबसे कमजोर वर्ग के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है. इस पहल पर निगमायुक्त राम प्रकाश अहिरवार ने सादगी से कहा कि प्रशासन का वास्तविक उद्देश्य केवल फाइलों का निपटारा करना नहीं, बल्कि समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े उस व्यक्ति की सेवा करना है जिसे मदद की सबसे ज्यादा जरूरत होती है. उन्होंने यह भी कहा कि जेठू वंशकार और उनके परिवार के चेहरे पर लौटी मुस्कान ही पूरी निगम टीम के लिए सबसे बड़ी सफलता और पुरस्कार है.

जेठू वंशकार के परिजनों ने निगमायुक्त और नगर निगम प्रशासन के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया. भावुक स्वर में उन्होंने कहा कि उन्हें कभी उम्मीद नहीं थी कि प्रशासन खुद उनके घर तक पहुंचकर इस तरह मदद करेगा. स्थानीय नागरिकों ने भी इस पहल को प्रेरणादायक बताया और कहा कि ऐसे कार्यों से प्रशासन के प्रति आम लोगों का विश्वास और मजबूत होता है.

यह घटना केवल एक परिवार की सहायता भर नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज को यह संदेश देती है कि जब सत्ता और संवेदना एक साथ मिल जाती हैं, तब व्यवस्था का असली अर्थ सामने आता है. निगमायुक्त राम प्रकाश अहिरवार की यह पहल इस बात का प्रमाण है कि यदि अधिकारी मानवता को प्राथमिकता दें, तो शासन और जनता के बीच की दूरी अपने आप मिट जाती है और किसी निर्धन के जीवन में फिर से खुशियों का उजाला लौट सकता है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-