जबलपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ क्षेत्र में संगठनात्मक मजबूती को लेकर बड़ा निर्णय लेते हुए हितानंद शर्मा को जबलपुर क्षेत्र की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है. संघ के इस फैसले को संगठन के विस्तार और वैचारिक गतिविधियों को और सशक्त बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है. हितानंद शर्मा को अब एमपी-छत्तीसगढ़ क्षेत्र के बौद्धिक प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी भी दी गई है, जिससे संघ के वैचारिक और प्रशिक्षण संबंधी कार्यक्रमों को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.
संघ के इस बदलाव को संगठनात्मक स्तर पर एक अहम कदम माना जा रहा है, क्योंकि जबलपुर क्षेत्र लंबे समय से संघ की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है. संघ सूत्रों के अनुसार, हितानंद शर्मा को संगठन में लंबे अनुभव और वैचारिक कार्यों में सक्रिय योगदान को देखते हुए यह जिम्मेदारी सौंपी गई है. संघ की कार्यप्रणाली में बौद्धिक प्रकोष्ठ की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि यही प्रकोष्ठ संगठन के वैचारिक कार्यक्रमों, प्रशिक्षण शिविरों और विचार प्रसार से जुड़े कार्यों का संचालन करता है.
हितानंद शर्मा लंबे समय से संघ के विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते रहे हैं और संगठन के वैचारिक विस्तार में उनकी सक्रिय भूमिका रही है. संघ से जुड़े पदाधिकारियों का मानना है कि उनके अनुभव और संगठनात्मक समझ से जबलपुर क्षेत्र सहित एमपी और छत्तीसगढ़ में संघ की गतिविधियों को नई मजबूती मिलेगी. यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब संघ अपने वैचारिक कार्यक्रमों को व्यापक स्तर पर विस्तार देने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है.
संघ के संगठनात्मक ढांचे में समय-समय पर जिम्मेदारियों में बदलाव करना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है. इसके पीछे उद्देश्य संगठन को नई ऊर्जा देना और कार्यकर्ताओं को नई जिम्मेदारियों के माध्यम से नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर प्रदान करना होता है. हितानंद शर्मा की नियुक्ति को भी इसी क्रम में देखा जा रहा है. संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों का मानना है कि नए नेतृत्व से संघ के कार्यों में गति आएगी और समाज के विभिन्न वर्गों तक संगठन की विचारधारा को प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकेगा.
जबलपुर क्षेत्र संघ के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह क्षेत्र लंबे समय से सामाजिक और वैचारिक गतिविधियों का केंद्र रहा है. संघ यहां नियमित शाखाओं, प्रशिक्षण वर्गों और सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों से संवाद बनाए रखता है. हितानंद शर्मा की नियुक्ति से इन गतिविधियों को और व्यवस्थित एवं प्रभावी बनाने की उम्मीद जताई जा रही है. संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं का मानना है कि उनके नेतृत्व में बौद्धिक कार्यक्रमों की गुणवत्ता और व्यापकता दोनों में वृद्धि होगी.
संघ के जानकारों के अनुसार बौद्धिक प्रकोष्ठ की भूमिका केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह संगठन की विचारधारा को समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाने और समसामयिक मुद्दों पर संगठनात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. ऐसे में हितानंद शर्मा की जिम्मेदारी को संघ के लिए काफी अहम माना जा रहा है. संघ का प्रयास रहता है कि बौद्धिक गतिविधियों के माध्यम से युवाओं और समाज के शिक्षित वर्ग को संगठन से जोड़ा जाए और राष्ट्रीय व सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाई जाए.
इस संगठनात्मक बदलाव को राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि संघ का प्रभाव विभिन्न सामाजिक और वैचारिक गतिविधियों में व्यापक रूप से देखा जाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि संघ के भीतर इस तरह के बदलाव संगठन की दीर्घकालीन रणनीति का हिस्सा होते हैं, जिनका उद्देश्य संगठनात्मक मजबूती और वैचारिक विस्तार को सुनिश्चित करना होता है.
हितानंद शर्मा की नियुक्ति के बाद संघ कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है. संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि उनके अनुभव और नेतृत्व क्षमता से संगठन को नई दिशा मिलेगी. साथ ही यह भी उम्मीद जताई जा रही है कि उनके मार्गदर्शन में संघ समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी गतिविधियों को और व्यापक रूप से संचालित करेगा.
संघ के इस फैसले को संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है और आने वाले समय में इसके प्रभाव संघ की गतिविधियों और कार्यक्रमों में देखने को मिल सकते हैं. हितानंद शर्मा के नेतृत्व में बौद्धिक प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी संभालने से संगठन के वैचारिक कार्यक्रमों को नई गति मिलने की संभावना जताई जा रही है. संघ लगातार अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और समाज में सक्रिय भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से इस प्रकार के बदलाव करता रहा है और यह निर्णय भी उसी दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

