फिल्म सर्टिफिकेशन में बड़ा बदलाव ऑनलाइन, सिस्टम से घटा समय अब औसतन 18 दिन में मिल रहा प्रमाण पत्र

फिल्म सर्टिफिकेशन में बड़ा बदलाव ऑनलाइन, सिस्टम से घटा समय अब औसतन 18 दिन में मिल रहा प्रमाण पत्र

प्रेषित समय :20:13:09 PM / Thu, Feb 5th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. सरकार ने फिल्म उद्योग को बड़ी राहत देते हुए फिल्म सर्टिफिकेशन प्रक्रिया को तेज करने का दावा किया है। संसद में गुरुवार को सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल मुरुगन ने बताया कि ऑनलाइन सर्टिफिकेशन सिस्टम लागू होने के बाद फिल्मों के प्रमाणन में लगने वाला औसत समय घटकर अब 18 कार्य दिवस रह गया है। इससे पहले फिल्मों को सर्टिफिकेट मिलने में तय समय सीमा 48 कार्य दिवस थी।

लोकसभा में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा उठाए गए सवाल के जवाब में मंत्री एल मुरुगन ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) सिनेमैटोग्राफ एक्ट 1952 और सिनेमैटोग्राफ (सर्टिफिकेशन) नियम 2024 के तहत कार्य करता है। नियम 37 के अनुसार फिल्मों के प्रमाणन के लिए 48 कार्य दिवस का समय निर्धारित था, लेकिन ऑनलाइन सर्टिफिकेशन सिस्टम लागू होने के बाद यह प्रक्रिया काफी तेज हो गई है।

सरकार के अनुसार अब फीचर फिल्मों को सर्टिफिकेट मिलने में औसतन 18 कार्य दिवस लग रहे हैं, जबकि शॉर्ट फिल्मों के लिए यह समय घटकर मात्र तीन कार्य दिवस रह गया है। मंत्रालय द्वारा जारी प्रेस नोट में कहा गया है कि डिजिटल प्रक्रिया से पारदर्शिता और दक्षता दोनों में सुधार हुआ है, जिससे फिल्म निर्माताओं को समय पर सर्टिफिकेशन मिल रहा है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025-26 में थिएटर रिलीज के लिए कुल 2248 फिल्मों को प्रमाणित किया गया। इनमें से 55 फिल्मों को रिवाइजिंग कमेटी के सामने चुनौती दी गई, जबकि 10 मामलों में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। फिल्म सर्टिफिकेशन अपीलेट ट्रिब्यूनल (FCAT) को 2021 में समाप्त कर दिया गया था, जिसके बाद अपील से जुड़े मामलों की सुनवाई अदालतों और रिवाइजिंग कमेटी के जरिए की जा रही है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि रिवाइजिंग कमेटी द्वारा मामलों के निपटारे में निर्धारित समय सीमा का पालन किया जा रहा है।

फिल्म सर्टिफिकेशन को लेकर यह बयान ऐसे समय में आया है जब अभिनेता और राजनेता विजय की फिल्म जन नायक को लेकर सेंसर बोर्ड और फिल्म निर्माताओं के बीच कानूनी विवाद चल रहा है। इस फिल्म की रिलीज में देरी और सर्टिफिकेशन को लेकर मामला अदालत तक पहुंच चुका है। CBFC ने सुप्रीम कोर्ट में एक कैविएट याचिका भी दाखिल की थी, जिसमें अनुरोध किया गया था कि फिल्म की रिलीज और सर्टिफिकेशन से जुड़े मामले में कोई आदेश देने से पहले बोर्ड की बात सुनी जाए।

विजय की फिल्म जन नायक के निर्माता केवीएन प्रोडक्शंस ने 15 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मद्रास हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसके कारण फिल्म की रिलीज प्रभावित हुई थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और हाईकोर्ट को ही मामले का फैसला करने का निर्देश दिया। इसके बाद 27 जनवरी को मद्रास हाईकोर्ट की दो जजों की बेंच ने सिंगल जज के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें CBFC को फिल्म को यू/ए सर्टिफिकेट देने का निर्देश दिया गया था।

सरकार का कहना है कि ऑनलाइन सर्टिफिकेशन सिस्टम लागू होने के बाद फिल्म निर्माताओं के लिए प्रक्रिया आसान और पारदर्शी बनी है। इससे फिल्मों की रिलीज में अनावश्यक देरी कम होने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं फिल्म इंडस्ट्री के कई विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्रक्रिया से प्रशासनिक देरी कम होगी और फिल्म निर्माताओं को आर्थिक नुकसान से भी बचाया जा सकेगा।

फिलहाल फिल्म सर्टिफिकेशन से जुड़ी नई व्यवस्था को फिल्म उद्योग के लिए सकारात्मक कदम माना जा रहा है। हालांकि कुछ मामलों में कानूनी विवाद और कंटेंट से जुड़े मुद्दों के कारण देरी अब भी हो सकती है। सरकार का दावा है कि तकनीकी सुधार और डिजिटल प्रक्रिया के जरिए आने वाले समय में सर्टिफिकेशन प्रक्रिया और तेज तथा पारदर्शी बनाई जाएगी।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-