राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव लोकसभा में हंगामे के बीच पारित, पीएम मोदी नहीं दे सके जवाब

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव लोकसभा में हंगामे के बीच पारित, पीएम मोदी नहीं दे सके जवाब

प्रेषित समय :17:48:35 PM / Thu, Feb 5th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में गुरुवार को भारी हंगामे के बीच राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित कर दिया गया। यह प्रस्ताव भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री सरबानंद सोनोवाल द्वारा पेश किया गया था, जिसे भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने समर्थन दिया। हालांकि, सदन में लगातार जारी विपक्ष के विरोध और शोर-शराबे के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस प्रस्ताव पर अपना परंपरागत जवाब नहीं दे सके, जो आमतौर पर राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के समापन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

लोकसभा की कार्यवाही गुरुवार सुबह 11 बजे शुरू होते ही बाधित हो गई। जैसे ही सदन की बैठक शुरू हुई, विपक्षी सदस्यों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी, जिसके चलते सदन को मात्र एक मिनट के भीतर दोपहर 12 बजे तक स्थगित करना पड़ा। जब सदन दोबारा दोपहर 12 बजे शुरू हुआ तो पहले आवश्यक कागजात सदन पटल पर रखे गए। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को सदन के समक्ष मतदान के लिए प्रस्तुत किया। विपक्ष के तीव्र विरोध और शोरगुल के बीच इस प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सदन में स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण बनी रही। विपक्षी दलों के सदस्य लगातार अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन करते रहे, जिसके कारण सदन की सामान्य कार्यवाही प्रभावित होती रही। संसदीय परंपरा के अनुसार राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित होने के बाद प्रधानमंत्री द्वारा चर्चा का जवाब देना एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया मानी जाती है, लेकिन इस बार विपक्ष के हंगामे के कारण यह परंपरा पूरी नहीं हो सकी।

इससे पहले बुधवार को भी लोकसभा में इसी मुद्दे को लेकर भारी हंगामा देखने को मिला था। उस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देने वाले थे, लेकिन विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस सांसदों के विरोध के कारण सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। कांग्रेस सांसदों ने उस समय सदन के भीतर ट्रेजरी बेंच की ओर मार्च किया और अपने साथ एक बड़ा बैनर लेकर पहुंचे, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर के साथ “जो उचित समझो वो करो” का नारा लिखा हुआ था।

यह नारा उस कथित टिप्पणी से जुड़ा हुआ बताया गया, जिसका जिक्र लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कुछ दिन पहले किया था। राहुल गांधी ने दावा किया था कि पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम. एम. नरवणे की एक अप्रकाशित पुस्तक में यह टिप्पणी दर्ज है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल सरकार से जवाब मांग रहे हैं और इसी कारण संसद में लगातार गतिरोध बना हुआ है।

संसद के बजट सत्र के दौरान इस तरह का गतिरोध सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते राजनीतिक तनाव को भी दर्शाता है। विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाब देने से बच रही है, जबकि सरकार का आरोप है कि विपक्ष जानबूझकर संसद की कार्यवाही को बाधित कर रहा है और महत्वपूर्ण विधायी कार्यों में रुकावट डाल रहा है।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कई बार सदन में व्यवस्था बनाए रखने और सदस्यों से सहयोग की अपील की, लेकिन इसका खास असर देखने को नहीं मिला। विपक्षी सदस्य अपनी मांगों पर अड़े रहे और नारेबाजी जारी रखी। अंततः सदन में मौजूद सदस्यों के बीच ध्वनिमत से धन्यवाद प्रस्ताव पारित कर दिया गया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री का जवाब न दे पाना एक असामान्य स्थिति है, क्योंकि यह संसदीय लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण परंपरा रही है। इस जवाब के दौरान प्रधानमंत्री आमतौर पर सरकार की नीतियों, योजनाओं और विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों पर विस्तृत प्रतिक्रिया देते हैं। इस बार यह अवसर नहीं मिल पाने से राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया है।

विपक्षी दलों ने इस घटनाक्रम को लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए चिंता का विषय बताया है, जबकि भाजपा और उसके सहयोगी दलों का कहना है कि विपक्ष ने जानबूझकर सदन की कार्यवाही को बाधित कर इस स्थिति को पैदा किया है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि विपक्ष रचनात्मक चर्चा के बजाय राजनीतिक प्रदर्शन करने में अधिक रुचि दिखा रहा है।

इस बीच संसद के दोनों सदनों में बजट सत्र के दौरान महत्वपूर्ण विधायी कार्य लंबित हैं और सरकार इन विधेयकों को पारित कराने के लिए विपक्ष से सहयोग की अपेक्षा कर रही है। हालांकि वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट नहीं है कि आने वाले दिनों में संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चल पाएगी या नहीं।

संसद के बजट सत्र का यह घटनाक्रम देश की राजनीति में बढ़ते टकराव और संवाद की कमी को भी उजागर करता है। आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत और समझौते की संभावनाओं पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी, ताकि संसद की कार्यवाही सामान्य हो सके और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा आगे बढ़ सके।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-