घूसखोर पंडित फिल्म पर बढ़ा विवाद, नेटफ्लिक्स ने हटाई लिस्टिंग प्रमोशनल सामग्री भी हटाई गई

घूसखोर पंडित फिल्म पर बढ़ा विवाद, नेटफ्लिक्स ने हटाई लिस्टिंग प्रमोशनल सामग्री भी हटाई गई

प्रेषित समय :20:58:16 PM / Fri, Feb 6th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

मुंबई. बॉलीवुड अभिनेता मनोज बाजपेयी और निर्देशक नीरज पांडे की आगामी फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. फिल्म के शीर्षक को लेकर उठे विरोध और धार्मिक भावनाएं आहत होने के आरोपों के बीच अब ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स ने भी इस फिल्म को अपनी लिस्टिंग से हटा दिया है. इससे पहले फिल्म निर्माताओं ने सार्वजनिक भावनाओं को देखते हुए फिल्म से जुड़ी सभी प्रमोशनल सामग्री हटाने का निर्णय लिया था.

दरअसल ‘घूसखोर पंडित’ फिल्म की घोषणा हाल ही में मुंबई में आयोजित नेटफ्लिक्स के ग्रैंड स्लेट अनाउंसमेंट कार्यक्रम में की गई थी. फिल्म की घोषणा के साथ ही इसका शीर्षक सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया. कुछ लोगों और संगठनों ने फिल्म के नाम को धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताते हुए विरोध शुरू कर दिया. देखते ही देखते यह मामला सोशल मीडिया से निकलकर राजनीतिक और कानूनी स्तर तक पहुंच गया.

विवाद बढ़ने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फिल्म के निर्माताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए. इसके बाद फिल्म निर्देशक नीरज पांडे और अभिनेता मनोज बाजपेयी दोनों को सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा. कई लोगों ने फिल्म के नाम को बदलने और इसे रिलीज नहीं करने की मांग की.

मामले को गंभीर होता देख अभिनेता मनोज बाजपेयी ने सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि वह लोगों की भावनाओं और चिंताओं का सम्मान करते हैं और उन्हें गंभीरता से लेते हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि एक अभिनेता के रूप में वह किसी फिल्म से उसके किरदार और कहानी के आधार पर जुड़ते हैं. उनके अनुसार यह फिल्म किसी समुदाय या वर्ग के खिलाफ बयान देने के उद्देश्य से नहीं बनाई गई थी, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो अपनी गलतियों को समझते हुए आत्मबोध की यात्रा करता है.

मनोज बाजपेयी ने अपने बयान में निर्देशक नीरज पांडे के काम करने के तरीके की भी सराहना की और कहा कि वह हमेशा संवेदनशील विषयों को गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ प्रस्तुत करते हैं. उन्होंने बताया कि जनता की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए फिल्म निर्माताओं ने फिलहाल फिल्म से जुड़ी सभी प्रमोशनल सामग्री हटाने का निर्णय लिया है. इसे लोगों की चिंताओं को गंभीरता से लेने की दिशा में उठाया गया कदम बताया जा रहा है.

इस विवाद के बीच सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने यह भी देखा कि नेटफ्लिक्स ने अपनी आधिकारिक लिस्टिंग से फिल्म को हटा दिया है. नेटफ्लिक्स की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन प्लेटफॉर्म से फिल्म का नाम हटाए जाने को विवाद से जुड़े दबाव का परिणाम माना जा रहा है. फिल्म को हटाए जाने के बाद अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या निर्माता फिल्म को नए नाम के साथ दोबारा लॉन्च करने की योजना बना रहे हैं.

फिल्म को लेकर देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिला है. भोपाल सहित कई शहरों में ब्राह्मण समाज के लोगों ने फिल्म के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए अभिनेता और फिल्म निर्माताओं के खिलाफ नारेबाजी की. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि फिल्म का शीर्षक समाज की एक विशेष पहचान को गलत तरीके से प्रस्तुत करता है और इससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है.

फिल्म जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने वाली फिल्मों और वेब सीरीज को लेकर दर्शकों की संवेदनशीलता लगातार बढ़ रही है. ऐसे में फिल्म निर्माताओं के लिए विषय और शीर्षक चयन करते समय सामाजिक और सांस्कृतिक पहलुओं को ध्यान में रखना आवश्यक हो गया है. कई मामलों में देखा गया है कि विवाद बढ़ने पर फिल्म निर्माताओं को अपने प्रोजेक्ट में बदलाव करना पड़ा है.

‘घूसखोर पंडित’ को लेकर जारी विवाद ने फिल्म उद्योग में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है. कुछ लोग इसे रचनात्मक स्वतंत्रता का मामला बता रहे हैं, जबकि अन्य इसे सामाजिक मर्यादा और संवेदनशीलता से जुड़ा विषय मान रहे हैं.

फिलहाल फिल्म का भविष्य अनिश्चित नजर आ रहा है. प्रमोशनल सामग्री हटाए जाने और नेटफ्लिक्स की लिस्टिंग से फिल्म के हटने के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि निर्माता आगे क्या कदम उठाते हैं. फिल्म को नए नाम से रिलीज किया जाएगा या प्रोजेक्ट को स्थगित किया जाएगा, इस पर अभी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है.

विवाद के बीच फिल्म जगत और दर्शकों की नजरें अब निर्माताओं के अगले निर्णय पर टिकी हुई हैं. आने वाले दिनों में यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है, यह फिल्म उद्योग के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-