अग्नि-3 के सफल परीक्षण से भारत की सैन्य ताकत में इजाफा, चीन-पाकिस्तान तक पहुंची मारक क्षमता से बढ़ी रणनीतिक बढ़त

अग्नि-3 के सफल परीक्षण से भारत की सैन्य ताकत में इजाफा, चीन-पाकिस्तान तक पहुंची मारक क्षमता से बढ़ी रणनीतिक बढ़त

प्रेषित समय :21:57:22 PM / Fri, Feb 6th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. भारत ने अपनी सामरिक रक्षा क्षमता को एक बार फिर मजबूती प्रदान करते हुए ओडिशा तट से परमाणु क्षमता से लैस अग्नि-3 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा किए गए इस परीक्षण को भारत की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता और सामरिक सुरक्षा ढांचे के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है. अधिकारियों के अनुसार मिसाइल परीक्षण के दौरान सभी मिशन उद्देश्यों को सफलतापूर्वक हासिल किया गया, जिससे भारत की लंबी दूरी तक मार करने वाली सैन्य क्षमता को नया बल मिला है.

अग्नि-3 इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM) श्रेणी की मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता लगभग 3,000 से 3,500 किलोमीटर तक बताई जाती है. इस दूरी के दायरे में एशिया के कई सामरिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र आते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इस मिसाइल की तैनाती भारत की रणनीतिक सुरक्षा नीति को और मजबूत बनाती है और संभावित खतरों के खिलाफ प्रभावी प्रतिरोधक शक्ति प्रदान करती है.

डीआरडीओ सूत्रों के मुताबिक परीक्षण पूरी तरह पूर्व निर्धारित मानकों के अनुसार किया गया और मिसाइल ने अपने लक्ष्य को सटीकता से भेदा. परीक्षण के दौरान मिसाइल की उड़ान, दिशा नियंत्रण, लक्ष्य भेदन क्षमता और तकनीकी प्रणाली का विस्तृत मूल्यांकन किया गया. अधिकारियों ने बताया कि परीक्षण के नतीजे बेहद संतोषजनक रहे और यह भारत की रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता का बड़ा संकेत है.

अग्नि-3 मिसाइल ठोस ईंधन से संचालित होती है, जिससे इसे त्वरित लॉन्च और बेहतर स्थिरता की क्षमता मिलती है. इसकी लंबाई लगभग 16 मीटर और वजन करीब 48 टन के आसपास बताया जाता है. मिसाइल को मोबाइल लॉन्चर प्लेटफॉर्म से भी दागा जा सकता है, जिससे इसकी रणनीतिक उपयोगिता और बढ़ जाती है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल लॉन्च क्षमता युद्ध जैसी परिस्थितियों में मिसाइल प्रणाली को सुरक्षित और प्रभावी बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है.

भारत लंबे समय से अपनी अग्नि श्रृंखला की मिसाइलों के जरिए परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता रहा है. अग्नि-1 से लेकर अग्नि-5 तक विभिन्न रेंज की मिसाइलें भारतीय रक्षा प्रणाली का हिस्सा हैं. अग्नि-3 इस श्रृंखला की ऐसी मिसाइल है, जो मध्यम दूरी के लक्ष्य को सटीकता से भेदने में सक्षम मानी जाती है और इसे भारत की ‘क्रेडिबल मिनिमम डिटरेंस’ नीति का अहम हिस्सा माना जाता है.

रणनीतिक मामलों के जानकारों का कहना है कि मौजूदा वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में इस प्रकार के सफल परीक्षण भारत की रक्षा तैयारियों को दर्शाते हैं. चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के संदर्भ में अग्नि-3 की क्षमता भारत की सामरिक स्थिति को मजबूत बनाती है. हालांकि भारत की रक्षा नीति रक्षात्मक और संतुलित मानी जाती है, लेकिन ऐसी तकनीकी उपलब्धियां देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.

रक्षा विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि भारत लगातार अपनी मिसाइल तकनीक में सुधार कर रहा है और अत्याधुनिक गाइडेंस सिस्टम तथा सटीक लक्ष्य भेदन तकनीक विकसित करने पर जोर दे रहा है. अग्नि-3 के सफल परीक्षण से यह संकेत मिलता है कि भारत भविष्य में और अधिक उन्नत मिसाइल प्रणालियों के विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.

भारत सरकार और रक्षा प्रतिष्ठानों ने इस उपलब्धि को देश की वैज्ञानिक क्षमता और रक्षा अनुसंधान में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम बताया है. डीआरडीओ के वैज्ञानिकों और रक्षा बलों के समन्वय को इस सफलता का प्रमुख कारण माना जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सफल परीक्षण भारत को वैश्विक रक्षा तकनीक के क्षेत्र में मजबूत स्थान दिलाने में सहायक साबित होंगे.

अग्नि-3 मिसाइल का यह सफल परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब भारत अपनी सुरक्षा रणनीति को और अधिक मजबूत बनाने के लिए आधुनिक रक्षा तकनीकों पर लगातार काम कर रहा है. रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत मिसाइल तकनीक और सैन्य उपकरणों के स्वदेशी विकास को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है. यह उपलब्धि न केवल भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत करती है बल्कि वैश्विक मंच पर देश की तकनीकी और सामरिक शक्ति को भी प्रदर्शित करती है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-