नई दिल्ली। आगामी जीएसटी काउंसिल की बैठक में कर व्यवस्था को सरल और तकनीक आधारित बनाने के लिए कई बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। सूत्रों के अनुसार यह बैठक संसद के बजट सत्र के बाद आयोजित होने की संभावना है, जिसमें खास तौर पर जीएसटी रजिस्ट्रेशन, रिफंड प्रक्रिया, ऑडिट सिस्टम और ई-वे बिल व्यवस्था में व्यापक सुधारों पर चर्चा हो सकती है। सरकार का उद्देश्य कारोबारियों के लिए अनुपालन प्रक्रिया को आसान बनाना और व्यापार लागत को कम करना बताया जा रहा है।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सरकार जीएसटी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को तेज और सुगम बनाने पर विशेष जोर दे रही है। मौजूदा समय में कई छोटे और नए कारोबारियों को रजिस्ट्रेशन के दौरान दस्तावेजी प्रक्रिया और तकनीकी अड़चनों का सामना करना पड़ता है। सरकार की कोशिश है कि कम समय में और कम बाधाओं के साथ रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी हो सके, जिससे छोटे व्यापारियों और स्टार्टअप्स को सीधे तौर पर लाभ मिल सके। विशेषज्ञों का मानना है कि रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया आसान होने से औपचारिक अर्थव्यवस्था में नए व्यापारों की संख्या बढ़ सकती है।
जीएसटी व्यवस्था में रिफंड की प्रक्रिया लंबे समय से विवाद का विषय रही है। निर्यातकों और कारोबारियों की ओर से रिफंड मिलने में देरी की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। सूत्रों के अनुसार आगामी बैठक में रिफंड प्रणाली को अधिक ऑटोमेटेड और पारदर्शी बनाने पर विचार किया जा सकता है। नई व्यवस्था में रिफंड स्टेटस को डिजिटल तरीके से ट्रैक करने की सुविधा भी दी जा सकती है, जिससे कारोबारियों को अपने भुगतान की स्थिति की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी और नकदी प्रवाह से जुड़ी समस्याओं में कमी आ सकती है।
सरकार ऑडिट और कंप्लायंस प्रक्रियाओं को भी सरल बनाने पर ध्यान दे रही है। वर्तमान में कई व्यापारियों को जटिल ऑडिट नियमों के कारण अतिरिक्त समय और संसाधन खर्च करने पड़ते हैं। प्रस्तावित सुधारों के तहत ऑडिट रिपोर्टिंग को डिजिटल और अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकता है, जिससे कारोबारियों पर अनुपालन का बोझ कम होगा और टैक्स प्रशासन भी अधिक प्रभावी तरीके से काम कर सकेगा।
जीएसटी काउंसिल की बैठक में ई-वे बिल प्रणाली में बड़े बदलावों पर भी चर्चा होने की संभावना है। ई-वे बिल व्यवस्था माल ढुलाई के दौरान निगरानी और कर अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए लागू की गई थी, लेकिन कई बार कारोबारियों को बार-बार जांच और परिवहन में देरी की समस्या का सामना करना पड़ता है। सरकार अब तकनीक के बेहतर इस्तेमाल के जरिए इस व्यवस्था को अधिक स्मार्ट और सहज बनाने की योजना बना रही है।
सूत्रों का कहना है कि नई तकनीकी व्यवस्था लागू होने से लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने में मदद मिल सकती है। अनावश्यक चेकिंग और माल ढुलाई में होने वाली देरी कम होने से ट्रांसपोर्ट सेक्टर और व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है। इससे विशेष रूप से अंतर्राज्यीय व्यापार को सुचारू बनाने में मदद मिल सकती है।
जीएसटी परिषद अंतर्राज्यीय व्यापार के दौरान आने वाली बाधाओं को कम करने के उपायों पर भी विचार कर सकती है। वर्तमान व्यवस्था में अलग-अलग राज्यों के नियमों और प्रक्रियाओं के कारण कई बार माल परिवहन में रुकावट आती है। सरकार एक समान और पारदर्शी प्रणाली विकसित करने की दिशा में काम कर रही है, जिससे देशभर में व्यापार करना अधिक आसान हो सके।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रस्तावित सुधार लागू होते हैं तो यह जीएसटी प्रणाली को और अधिक प्रभावी तथा व्यापार अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इससे न केवल कारोबारियों को राहत मिलेगी बल्कि कर संग्रह में भी सुधार होने की संभावना है।
सरकार का लक्ष्य जीएसटी को पूरी तरह डिजिटल और तकनीक आधारित प्रणाली में बदलना है, जिससे पारदर्शिता बढ़े और टैक्स चोरी पर रोक लगाई जा सके। इसके साथ ही व्यापारियों को सरल प्रक्रियाओं के जरिए बेहतर कारोबारी माहौल उपलब्ध कराया जा सकेगा।
बजट सत्र के बाद होने वाली संभावित जीएसटी काउंसिल की बैठक को कारोबारी जगत काफी अहम मान रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस बैठक में लिए जाने वाले फैसले देश के व्यापारिक वातावरण को मजबूत करने और आर्थिक गतिविधियों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

