जबलपुर. आसपास के क्षेत्रों में मौसम के बदलते मिजाज ने आम जनमानस के साथ-साथ कृषि विशेषज्ञों को भी हैरत में डाल दिया है. फरवरी का महीना जिसे आमतौर पर गुलाबी ठंड और सुहावने मौसम के लिए जाना जाता है वह इस बार जेठ की तपिश का अहसास कराने लगा है. पिछले कुछ दिनों से आसमान पूरी तरह साफ रहने और तेज धूप खिलने के कारण दिन के तापमान में अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है जिससे शहरवासियों के बीच 'सर्दी का जल्दी जाना' सबसे बड़ा चर्चा का विषय बन गया है. मौसम विज्ञान केंद्र के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि फरवरी के पहले सप्ताह में ही पारा सामान्य से तीन से चार डिग्री सेल्सियस ऊपर पहुंच गया है जिसने आने वाले दिनों में भीषण गर्मी के संकेत दे दिए हैं.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स विशेषकर ट्विटर और इंस्टाग्राम पर #JabalpurWeather तेजी से ट्रेंड कर रहा है जिसमें लोग सुबह की ओस गायब होने और दोपहर में पंखे चलाने की नौबत आने पर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस साल ठंड का अहसास उम्मीद से बहुत पहले खत्म हो गया है और सुबह-शाम की जो हल्की ठंडक बची थी वह भी अब गायब होती नजर आ रही है. आसमान के पूरी तरह साफ होने से सूरज की किरणें सीधे धरती पर पहुंच रही हैं जिससे दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरने लगा है और लोग अभी से शीतल पेय पदार्थों की ओर रुख करने लगे हैं. मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और वायुमंडल के ऊपरी हिस्से में बन रहे एंटी साइक्लोन के प्रभाव के कारण ठंडी हवाओं का रुख बदल गया है जिससे मैदानी इलाकों में गर्मी ने समय से पहले दस्तक दे दी है.
इस समय से पहले आई गर्मी का सबसे ज्यादा असर खेती-किसानी पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है क्योंकि गेहूं की फसल के लिए इस समय हल्की ठंड का होना बेहद जरूरी होता है. यदि तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो फसलों की पैदावार और उनकी गुणवत्ता पर विपरीत असर पड़ सकता है जिससे किसान काफी चिंतित नजर आ रहे हैं. वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी इस बदलते मौसम को लेकर चेतावनी जारी की है. डॉक्टरों का कहना है कि सर्दी और गर्मी के इस संधि काल में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है जिससे वायरल फीवर और मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. अचानक गर्म हुए मौसम के कारण लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे खान-पान में सावधानी बरतें और सीधे धूप के संपर्क में आने से बचें.
जबलपुर के विभिन्न चौक-चौराहों और चाय की अड़ियों पर अब राजनीति के साथ-साथ मौसम की चर्चा भी जोरों पर है. बुजुर्गों का कहना है कि दशकों बाद फरवरी में इस तरह की गर्मी देखने को मिल रही है जो पर्यावरण असंतुलन का एक गंभीर संकेत है. शहरी क्षेत्रों में बढ़ते कंक्रीट के जंगल और कम होते जा रहे पेड़ों के कारण भी 'अर्बन हीट आइलैंड' का प्रभाव बढ़ रहा है जिससे रात के समय भी गर्मी का अहसास कम नहीं हो रहा है. फिलहाल मौसम विभाग के पूर्वानुमानों की मानें तो आने वाले एक सप्ताह तक आसमान साफ रहेगा और धूप का प्रभाव और तीखा हो सकता है. शहरवासियों को अब इस बात का डर सता रहा है कि यदि फरवरी का यह हाल है तो अप्रैल और मई की भीषण गर्मी का सामना करना कितना चुनौतीपूर्ण होगा. कुल मिलाकर जबलपुर में इस साल सर्दी की विदाई ने न केवल स्वेटर और कंबलों को समय से पहले अलमारियों में पहुंचा दिया है बल्कि भविष्य की जल संकट और बिजली की बढ़ती मांग जैसी समस्याओं के प्रति भी आगाह कर दिया है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

