फरवरी मार्च में मिनी स्विट्जरलैंड चोपता बनेगा पर्यटकों का पसंदीदा डेस्टिनेशन बढ़ने की उम्मीद

फरवरी मार्च में मिनी स्विट्जरलैंड चोपता बनेगा पर्यटकों का पसंदीदा डेस्टिनेशन बढ़ने की उम्मीद

प्रेषित समय :21:31:40 PM / Sat, Feb 7th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

उत्तराखंड का खूबसूरत हिल स्टेशन चोपता इन दिनों देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। हिमालय की गोद में बसा यह छोटा लेकिन बेहद मनमोहक पर्यटन स्थल अपनी प्राकृतिक सुंदरता, बर्फ से ढकी पहाड़ियों और हरियाली से भरपूर वादियों के कारण “मिनी स्विट्जरलैंड ऑफ इंडिया” के नाम से प्रसिद्ध हो चुका है। फरवरी और मार्च 2026 के दौरान यहां पर्यटकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। ट्रेकिंग प्रेमियों, धार्मिक श्रद्धालुओं और एडवेंचर पसंद करने वाले युवाओं के लिए चोपता सबसे पसंदीदा डेस्टिनेशन बनता जा रहा है। खासतौर पर तुंगनाथ मंदिर और चंद्रशिला पीक ट्रेक यहां आने वाले यात्रियों के लिए मुख्य आकर्षण बने हुए हैं।

पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार फरवरी और मार्च के महीनों में चोपता का मौसम बेहद खास रहता है। इस समय पर्यटकों को एक साथ बर्फ और हरियाली का दुर्लभ मिश्रण देखने को मिलता है। फरवरी में जहां पहाड़ बर्फ की सफेद चादर से ढके रहते हैं वहीं मार्च के दौरान बर्फ धीरे-धीरे पिघलने लगती है और घाटियों में हरियाली लौटने लगती है। यही कारण है कि यह समय प्रकृति प्रेमियों के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। होटल संचालकों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया और ट्रैवल व्लॉग के कारण चोपता की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है और इस वर्ष भी भारी संख्या में बुकिंग दर्ज की जा रही है।

चोपता पहुंचने के लिए पर्यटक सबसे पहले उत्तराखंड के प्रमुख शहरों तक पहुंचते हैं। दिल्ली, हरिद्वार, ऋषिकेश या देहरादून से चोपता के लिए सड़क मार्ग सबसे सुविधाजनक माना जाता है। दिल्ली से चोपता की दूरी लगभग 450 किलोमीटर है और सड़क मार्ग से यहां पहुंचने में करीब 10 से 12 घंटे का समय लगता है। सबसे पहले यात्रियों को दिल्ली से ऋषिकेश या हरिद्वार पहुंचना होता है। इसके बाद वहां से बस, टैक्सी या निजी वाहन के माध्यम से रुद्रप्रयाग और उखीमठ होते हुए चोपता पहुंचा जा सकता है। देहरादून तक हवाई यात्रा करने वाले पर्यटक जॉली ग्रांट एयरपोर्ट से टैक्सी लेकर भी आसानी से चोपता पहुंच सकते हैं। रेलवे मार्ग से आने वाले यात्रियों के लिए हरिद्वार और ऋषिकेश सबसे नजदीकी स्टेशन माने जाते हैं।

चोपता यात्रा की योजना बनाते समय पर्यटकों को सबसे पहले मौसम की जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। फरवरी में यहां तापमान शून्य से नीचे जा सकता है इसलिए भारी ऊनी कपड़े, दस्ताने, जैकेट और ट्रेकिंग शूज साथ रखना आवश्यक होता है। मार्च में मौसम थोड़ा नरम हो जाता है लेकिन सुबह और शाम के समय ठंड बनी रहती है। पर्यटकों को मेडिकल किट, टॉर्च, पानी की बोतल और एनर्जी फूड भी साथ रखना चाहिए ताकि ट्रेकिंग के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो।

चोपता पहुंचने के बाद पर्यटक अपनी यात्रा की शुरुआत स्थानीय दर्शनीय स्थलों से कर सकते हैं। यहां कई सुंदर घास के मैदान और जंगल क्षेत्र मौजूद हैं जहां पर्यटक प्रकृति का आनंद ले सकते हैं। इसके बाद सबसे महत्वपूर्ण चरण तुंगनाथ मंदिर ट्रेक का माना जाता है। तुंगनाथ मंदिर विश्व का सबसे ऊंचाई पर स्थित शिव मंदिर है जो समुद्र तल से लगभग 3680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। चोपता से तुंगनाथ मंदिर की दूरी लगभग 3.5 किलोमीटर है और यह ट्रेक मध्यम कठिनाई स्तर का माना जाता है। पर्यटक सुबह जल्दी ट्रेक शुरू करें तो मौसम अनुकूल रहता है और रास्ते में बर्फ से ढकी पहाड़ियों का अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है।

तुंगनाथ मंदिर पहुंचने के बाद श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन करते हैं और यहां की आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर पंच केदार में शामिल है और इसकी ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। मंदिर दर्शन के बाद साहसिक यात्रियों के लिए अगला चरण चंद्रशिला पीक ट्रेक होता है। तुंगनाथ से चंद्रशिला की दूरी लगभग 1.5 किलोमीटर है और यह ट्रेक अपेक्षाकृत चुनौतीपूर्ण माना जाता है। हालांकि इस ट्रेक के दौरान हिमालय की बर्फीली चोटियों का जो दृश्य दिखाई देता है वह पर्यटकों को जीवनभर याद रहता है। चंद्रशिला पीक से नंदा देवी, त्रिशूल और चौखंभा जैसी प्रसिद्ध पर्वत श्रृंखलाओं का शानदार नजारा दिखाई देता है।

पर्यटन विशेषज्ञों का कहना है कि चोपता की यात्रा को आरामदायक बनाने के लिए पर्यटकों को कम से कम दो से तीन दिन का समय रखना चाहिए। पहले दिन चोपता पहुंचकर स्थानीय क्षेत्र में घूमना और विश्राम करना बेहतर रहता है। दूसरे दिन तुंगनाथ और चंद्रशिला ट्रेक पूरा किया जा सकता है जबकि तीसरे दिन आसपास के अन्य पर्यटन स्थलों का भ्रमण किया जा सकता है। यहां कैंपिंग और बोनफायर जैसी गतिविधियां भी पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय हैं।

स्थानीय होटल और होमस्टे संचालकों के अनुसार चोपता में रहने के लिए बजट से लेकर प्रीमियम श्रेणी तक की सुविधाएं उपलब्ध हैं। पर्यटक अपनी सुविधा के अनुसार होटल या कैंपिंग साइट चुन सकते हैं। स्थानीय भोजन में पहाड़ी व्यंजन पर्यटकों को खास पसंद आते हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों ने पर्यटकों से अपील की है कि वे यात्रा के दौरान स्वच्छता बनाए रखें और प्लास्टिक का उपयोग कम करें ताकि चोपता की प्राकृतिक सुंदरता बरकरार रह सके।

पर्यटन विभाग का मानना है कि चोपता का विकास उत्तराखंड के पर्यटन उद्योग को नई पहचान दे रहा है। सरकार द्वारा सड़क और पर्यटन सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कई योजनाएं भी शुरू की गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पर्यटक सुरक्षित और जिम्मेदार तरीके से यात्रा करें तो चोपता आने वाले वर्षों में देश का प्रमुख ईको-टूरिज्म केंद्र बन सकता है।

फरवरी और मार्च 2026 में चोपता की यात्रा प्रकृति प्रेमियों, एडवेंचर उत्साही और धार्मिक श्रद्धालुओं के लिए एक यादगार अनुभव साबित हो सकती है। बर्फ से ढकी पहाड़ियों, हरे-भरे मैदानों और आध्यात्मिक वातावरण के बीच चोपता आज देश के सबसे आकर्षक पर्यटन स्थलों में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-