काश्मीर मूल की शबाना महमूद ब्रिटेन की पहली मुस्लिम प्रधानमंत्री बन सकती हैं, एपस्टीन फाइल्स विवाद से PM स्टार्मर की कुर्सी खतरे में

काश्मीर मूल की शबाना महमूद ब्रिटेन की पहली मुस्लिम प्रधानमंत्री बन सकती हैं, एपस्टीन फाइल्स विवाद से PM स्टार्मर की कुर्सी खतरे में

प्रेषित समय :18:10:02 PM / Tue, Feb 10th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

लंदन. अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े विवादों के कारण ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की कुर्सी खतरे में है. अब उनकी अपनी लेबर पार्टी के एक धड़े ने ही इस्तीफे की मांग कर दी है. हालांकि स्टार्मर अभी पद छोडऩे से इनकार कर रहे हैं.

इस बीच नए प्रधानमंत्री पद की होड़ में गृह मंत्री शबाना महमूद के साथ ही स्वास्थ्य मंत्री वेस्ट स्ट्रीटिंग और पूर्व उपप्रधानमंत्री अंगेला रेनर का नाम सामने आ रहा है. कश्मीरी मूल की शबाना महमूद POK के मीरपुर से हैं. वह ब्रिटेन की गृह मंत्री बनने वाली पहली मुस्लिम महिला हैं. अगर वह प्रधानमंत्री बनती हैं तो ब्रिटेन की पहली मुस्लिम प्रधानमंत्री भी होंगी. गौरतलब है कि ब्रिटेन में एपस्टीन फाइल से जुड़े विवाद की वजह से पीएम स्टार्मर के सबसे भरोसेमंद सहयोगी और डाउनिंग स्ट्रीट के चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी को इस्तीफा देना पड़ा है.

मैकस्वीनी पर आरोप है कि उन्होंने यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन का समर्थन करने वाले पीटर मंडेलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत बनाकर भेजा था. मैकस्वीनी ने भी माना है कि यह नियुक्ति गलत थी. अमेरिका में ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर के साथ पीटर मंडेलसन.

मंडेलसन पर आरोप है कि जेफ्री एपस्टीन को बच्चों के यौन शोषण के मामलों में सजा होने के बाद भी मंडेलसन उसके संपर्क में रहे और उसका समर्थन किया. अमेरिका में ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर के साथ पीटर मंडेलसन. मंडेलसन पर आरोप है कि जेफ्री एपस्टीन को बच्चों के यौन शोषण के मामलों में सजा होने के बाद भी मंडेलसन उसके संपर्क में रहे और उसका समर्थन किया.

स्टार्मर को चुनौती देने के लिए 20 प्रतिशत सदस्यों का समर्थन जरूरी-

लेबर पार्टी के नियमों के अनुसारए अगर कोई कीर स्टार्मर के खिलाफ चुनौती देना चाहता है तो इसके लिए कुछ सख्त शर्तें पूरी करनी पड़ती हैं. इनमें सबसे महत्वपूर्ण है कि चुनौती देने वाले उम्मीदवार को पार्टी के संसदीय सदस्यों से कम से कम 20: का समर्थन हासिल करना जरूरी है. यह नियम 2021 में पार्टी कॉन्फ्रेंस में बदलाव के बाद लागू हुआ था. पहले यह सीमा सिर्फ 10 प्रतिशत थी. लेकिन अब इसे बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया है ताकि कोई भी आसानी से लीडरशिप चुनौती न दे सके और पार्टी में स्थिरता बनी रहे.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-