बॉलीवुड में कम ही देखने को मिलने वाली सर्वाइवल थ्रिलर फिल्म तू या मैं रिलीज से पहले ही चर्चा का केंद्र बन गई है. आदर्श गौरव और शनाया कपूर स्टारर इस फिल्म ने अपने अनोखे विषय और सस्पेंस से दर्शकों का ध्यान खींचा है. निर्देशक बेजॉय नाम्बियार की यह फिल्म दर्शकों को रोमांस, थ्रिल और खतरनाक परिस्थितियों के बीच संघर्ष की कहानी दिखाती है. फिल्म को समीक्षकों से मिली-जुली लेकिन सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है और इसे लगभग साढ़े तीन स्टार की रेटिंग दी गई है.
फिल्म की कहानी दो बिल्कुल अलग दुनिया से आने वाले किरदारों के इर्द-गिर्द घूमती है. फिल्म में शनाया कपूर अवनि शाह का किरदार निभा रही हैं, जो एक लोकप्रिय सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर है और उसके लाखों फॉलोअर्स हैं. वहीं आदर्श गौरव मराठी रैपर मरुति कदम की भूमिका में नजर आ रहे हैं, जो नालासोपारा का रहने वाला एक संघर्षरत कलाकार है. दोनों की मुलाकात होती है और धीरे-धीरे उनके बीच प्यार पनपने लगता है. फिल्म की शुरुआत में दोनों की अलग-अलग जीवनशैली और सोच को दिखाया गया है, जो कहानी को दिलचस्प बनाता है.
कहानी में मोड़ तब आता है जब दोनों गोवा जाने के दौरान रास्ते में फंस जाते हैं और एक छोटे से होटल में शरण लेने को मजबूर हो जाते हैं. इसके बाद कहानी अचानक रोमांस से निकलकर थ्रिलर मोड में चली जाती है. फिल्म का सबसे बड़ा और रोमांचक हिस्सा तब सामने आता है जब दोनों एक स्विमिंग पूल में फंस जाते हैं, जहां एक मगरमच्छ भी मौजूद होता है. इस स्थिति से बचने की उनकी कोशिश फिल्म को बेहद तनावपूर्ण और रोमांचक बना देती है.
फिल्म का क्लाइमेक्स दर्शकों के लिए सबसे ज्यादा चौंकाने वाला और सस्पेंस से भरपूर बताया जा रहा है. कई दर्शकों ने इस सीन को देखकर सांसें थाम लेने वाला अनुभव बताया है. फिल्म का यह हिस्सा दर्शकों को सीट से बांधे रखने में सफल माना जा रहा है. समीक्षकों का कहना है कि फिल्म का मकसद दर्शकों को डर और तनाव का अनुभव कराना था, जिसमें यह काफी हद तक सफल साबित होती है.
यह फिल्म साल 2018 की थाई हॉरर थ्रिलर फिल्म द पूल से प्रेरित बताई जा रही है. फिल्म की कहानी को हिमांशु शर्मा ने रूपांतरित किया है, जबकि पटकथा अभिषेक अरुण बांडेकर ने लिखी है. निर्देशक बेजॉय नाम्बियार ने फिल्म में सामाजिक अंतर और रोमांस को थ्रिलर तत्वों के साथ जोड़ने की कोशिश की है. फिल्म में कई जगह पुराने बॉलीवुड फिल्मों के संदर्भ भी देखने को मिलते हैं, जिनमें रेखा की फिल्म खून भरी मांग का उल्लेख शामिल है.
फिल्म का पहला भाग युवा प्रेम और रिश्तों की कहानी पर आधारित है, जबकि दूसरा भाग पूरी तरह सर्वाइवल थ्रिलर में बदल जाता है. समीक्षकों का मानना है कि फिल्म का दूसरा भाग ज्यादा प्रभावशाली और रोमांचक है. हालांकि कुछ जगहों पर फिल्म की गति धीमी पड़ती दिखाई देती है, लेकिन अचानक आने वाले सस्पेंस और डरावने दृश्य कहानी को फिर से गति दे देते हैं.
सिनेमेटोग्राफर रेमी दलई ने फिल्म के दूसरे भाग में शानदार काम किया है. स्विमिंग पूल के सीमित स्थान में शूट किए गए दृश्य दर्शकों को घुटन और डर का एहसास कराने में सफल रहते हैं. कैमरा एंगल और लाइटिंग का उपयोग फिल्म के तनावपूर्ण माहौल को और मजबूत बनाता है. फिल्म की तकनीकी गुणवत्ता को भी काफी सराहा जा रहा है.
अभिनय की बात करें तो आदर्श गौरव ने फिल्म में दमदार प्रदर्शन किया है. उन्होंने एक संघर्षरत रैपर के किरदार को बेहद प्रभावी ढंग से निभाया है. उनके संवाद, बॉडी लैंग्वेज और अभिनय की गहराई फिल्म को मजबूती देती है. वहीं शनाया कपूर ने भी अपने किरदार के साथ न्याय करने की कोशिश की है. उन्होंने एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के आत्मविश्वास और भावनात्मक संघर्ष को संतुलित तरीके से प्रस्तुत किया है.
फिल्म में सामाजिक वर्गों के अंतर को भी दिखाने की कोशिश की गई है. अवनि की ग्लैमरस और हाई-प्रोफाइल जिंदगी और मरुति की साधारण और संघर्षपूर्ण जिंदगी के बीच का फर्क फिल्म की कहानी को और गहराई देता है. एक दृश्य में मरुति मजाक में कहता है कि गोवा रोड ट्रिप ने उसकी जिंदगी को गली बॉय से सैराट बना दिया है, जो दोनों के सांस्कृतिक और सामाजिक अंतर को दर्शाता है.
फिल्म को बॉलीवुड में एक अलग प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि हिंदी सिनेमा में सर्वाइवल थ्रिलर कम ही देखने को मिलती हैं. निर्देशक बेजॉय नाम्बियार ने फिल्म को पारंपरिक फॉर्मूले से अलग रखने की कोशिश की है. हालांकि फिल्म कुछ जगहों पर अतिरंजित और अवास्तविक लग सकती है, लेकिन मनोरंजन और रोमांच के स्तर पर यह दर्शकों को बांधे रखने में सफल रहती है.
फिल्म की रिलीज बॉक्स ऑफिस पर शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी की फिल्म ओ रोमियो से टकरा रही है, जिससे दोनों फिल्मों के प्रदर्शन को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है. ट्रेड विश्लेषकों का मानना है कि अलग-अलग विषय होने के कारण दोनों फिल्मों को अपने-अपने दर्शक मिल सकते हैं.
तू या मैं को लेकर दर्शकों की प्रतिक्रिया भी काफी दिलचस्प देखने को मिल रही है. कुछ दर्शक फिल्म के थ्रिल और सस्पेंस को काफी पसंद कर रहे हैं, जबकि कुछ लोगों को कहानी का कुछ हिस्सा अवास्तविक लग रहा है. बावजूद इसके फिल्म दर्शकों को भावनात्मक और रोमांचक अनुभव देने में सफल मानी जा रही है.
फिल्म विशेषज्ञों का कहना है कि बॉलीवुड में नई तरह की कहानियों और प्रयोगों की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी और यह फिल्म उसी दिशा में एक प्रयास मानी जा सकती है. निर्देशक ने प्रेम कहानी, सामाजिक अंतर और जीवित रहने की जंग को एक साथ जोड़कर एक अलग तरह का सिनेमाई अनुभव देने की कोशिश की है.
कुल मिलाकर तू या मैं एक ऐसी फिल्म बनकर सामने आई है जो दर्शकों को डर, रोमांच और भावनात्मक जुड़ाव का मिश्रण देती है. फिल्म कहीं-कहीं अव्यवस्थित और असामान्य लग सकती है, लेकिन इसका मनोरंजन और सस्पेंस दर्शकों को अंत तक बांधे रखने में सफल रहता है. फिल्म दर्शकों को असहज महसूस कराती है, डराती है और कई जगह चौंकाती भी है, जो एक सफल सर्वाइवल थ्रिलर की पहचान मानी जाती है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

