आईपीएस प्रतिनियुक्ति पर नया कानून ला सकती है केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट को गृह मंत्रालय ने दी जानकारी

आईपीएस प्रतिनियुक्ति पर नया कानून ला सकती है केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट को गृह मंत्रालय ने दी जानकारी

प्रेषित समय :21:57:19 PM / Sat, Feb 14th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने भारतीय पुलिस सेवा अधिकारियों की केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में प्रतिनियुक्ति को लेकर बड़ा कदम उठाने के संकेत दिए हैं. गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक शपथ पत्र में कहा है कि वह इस विषय पर “वैधानिक हस्तक्षेप” पर विचार कर रहा है. मंत्रालय ने अदालत को अवगत कराया कि इस हस्तक्षेप के तहत आईपीएस अधिकारियों की केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में प्रतिनियुक्ति के मुद्दे पर कानून बनाया जा सकता है और साथ ही सीएपीएफ अधिकारियों को ऑर्गनाइज्ड ग्रुप ए सर्विसेज का दर्जा देने पर भी विचार किया जा रहा है.

यह हलफनामा उस पृष्ठभूमि में दायर किया गया है जब सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में इंस्पेक्टर जनरल रैंक तक के आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को चरणबद्ध तरीके से कम करने की दिशा में कदम उठाए. अदालत ने कहा था कि बलों के कैडर प्रबंधन और पदोन्नति से जुड़े मुद्दों को संतुलित और संस्थागत तरीके से सुलझाया जाना चाहिए, ताकि सेवा में पारदर्शिता और अवसरों की समानता सुनिश्चित हो सके.

गृह मंत्रालय ने अपने शपथपत्र में स्पष्ट किया है कि वह न्यायालय के आदेशों और बलों के संगठनात्मक ढांचे को ध्यान में रखते हुए व्यापक समीक्षा कर रहा है. मंत्रालय का कहना है कि आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति लंबे समय से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के नेतृत्व ढांचे का हिस्सा रही है, लेकिन बदलती परिस्थितियों और सेवा संबंधी मांगों को देखते हुए अब इस व्यवस्था को कानूनी रूप से परिभाषित करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है.

मंत्रालय ने अदालत को बताया कि प्रस्तावित वैधानिक हस्तक्षेप का उद्देश्य सेवा संरचना में स्पष्टता लाना, पदोन्नति की प्रक्रिया को व्यवस्थित करना और विभिन्न कैडरों के बीच उत्पन्न विवादों को स्थायी समाधान की दिशा में ले जाना है. यदि इस संबंध में कानून बनाया जाता है तो आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की सीमा, अवधि और पदों की प्रकृति को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जा सकेगा. साथ ही सीएपीएफ अधिकारियों को ऑर्गनाइज्ड ग्रुप ए सर्विसेज का दर्जा देने से उनकी सेवा शर्तों, पदोन्नति और वरिष्ठता से जुड़े मुद्दों में भी स्थायित्व आएगा.

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में वर्तमान में सीमा सुरक्षा बल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और सशस्त्र सीमा बल शामिल हैं. इन बलों में शीर्ष नेतृत्व के कई पदों पर आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति होती रही है. दूसरी ओर, बलों के स्थायी कैडर अधिकारियों ने समय-समय पर यह मांग उठाई है कि उन्हें भी उच्च पदों पर पदोन्नति का समान अवसर मिलना चाहिए और सेवा ढांचे में स्पष्टता होनी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में यह तर्क दिया गया था कि बड़ी संख्या में आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति के कारण सीएपीएफ अधिकारियों की पदोन्नति प्रभावित होती है और उन्हें शीर्ष पदों तक पहुंचने में बाधाएं आती हैं. अदालत ने अपने पूर्व आदेश में कहा था कि प्रतिनियुक्ति की व्यवस्था को संतुलित किया जाना चाहिए और बलों के आंतरिक कैडर को मजबूत करने के उपाय किए जाने चाहिए.

गृह मंत्रालय ने अपने हलफनामे में यह भी संकेत दिया कि किसी भी संभावित कानून को लाने से पहले सभी संबंधित पक्षों से परामर्श किया जाएगा. इसमें राज्यों की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि आईपीएस अधिकारी अखिल भारतीय सेवा के अंतर्गत राज्य कैडर से आते हैं और उनकी प्रतिनियुक्ति केंद्र और राज्य दोनों की सहमति से होती है. मंत्रालय ने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था से न केवल न्यायालय के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित होगा बल्कि बलों की परिचालन क्षमता और नेतृत्व संरचना में भी स्थिरता आएगी.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आईपीएस प्रतिनियुक्ति पर स्पष्ट कानून बनाया जाता है तो यह प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा. इससे लंबे समय से चल रहे सेवा विवादों का समाधान संभव हो सकता है. वहीं, कुछ विश्लेषकों का यह भी कहना है कि संतुलन बनाए रखना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण होगा, क्योंकि आईपीएस अधिकारियों का अनुभव और अखिल भारतीय दृष्टिकोण केंद्रीय बलों के लिए उपयोगी माना जाता रहा है.

गृह मंत्रालय ने अदालत से यह भी अनुरोध किया है कि उसे इस विषय पर व्यापक नीति निर्धारण के लिए समय दिया जाए. मंत्रालय का कहना है कि वह न्यायालय के निर्देशों का सम्मान करता है और एक ऐसी व्यवस्था विकसित करना चाहता है जो संस्थागत रूप से टिकाऊ और सभी पक्षों के लिए न्यायसंगत हो.

इस घटनाक्रम को प्रशासनिक ढांचे में संभावित बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है. यदि कानून अस्तित्व में आता है तो यह पहली बार होगा जब आईपीएस अधिकारियों की केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में प्रतिनियुक्ति को विधिक रूप से विनियमित किया जाएगा और सीएपीएफ अधिकारियों को संगठित ग्रुप ए सेवा का दर्जा स्पष्ट रूप से प्रदान किया जाएगा. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई जारी है और केंद्र सरकार के अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं.