हैदराबाद। आंध्र प्रदेश को कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्वांटम प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री N. Chandrababu Naidu ने आक्रामक रणनीति पेश की है। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के अवसर पर नायडू ने एक मिलियन युवाओं को उन्नत तकनीकी कौशल प्रदान करने, क्वांटम विश्वविद्यालय की स्थापना और अत्याधुनिक एआई प्रयोगशालाओं के निर्माण की व्यापक रूपरेखा सामने रखी है। राज्य सरकार का कहना है कि यह पहल आंध्र प्रदेश को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे ले जाने और निवेश आकर्षित करने की दिशा में निर्णायक कदम होगी।
मुख्यमंत्री गुरुवार शाम जयपुर में एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने के बाद शुक्रवार सुबह भारत मंडपम में आयोजित शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। सुबह 9.30 बजे आयोजित पूर्ण अधिवेशन ‘एआई एक्सेलरेटर्स फ्यूलिंग इंडिया इकोनॉमिक ग्रोथ’ में नायडू के साथ असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma, केंद्रीय मंत्री Jitin Prasada तथा TCS के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस सत्र में देश की आर्थिक वृद्धि में एआई की भूमिका, राज्यों की प्रतिस्पर्धात्मकता और कौशल विकास की रणनीतियों पर चर्चा की जाएगी।
आंध्र प्रदेश सरकार ने संकेत दिया है कि सम्मेलन के दौरान राज्य में एआई अवसंरचना और कौशल विकास को सुदृढ़ करने के लिए कई महत्वपूर्ण समझौते किए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य है कि तकनीकी निवेश को आकर्षित करते हुए राज्य को एआई आधारित उद्योगों का केंद्र बनाया जाए। इसी क्रम में IBM के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाएंगे, जिसके तहत राज्य के दस लाख युवाओं को एआई, क्वांटम प्रौद्योगिकी और साइबर सुरक्षा में प्रशिक्षण दिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार यह कार्यक्रम चरणबद्ध तरीके से संचालित होगा और इसमें विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग कॉलेजों तथा कौशल प्रशिक्षण संस्थानों को जोड़ा जाएगा।
इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार United Nations International Computing Centre के साथ भी एक समझौता करेगी, जिसके अंतर्गत क्वांटम और एआई उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना की जाएगी। यह केंद्र अनुसंधान, नवाचार और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण का प्रमुख मंच बनेगा। सरकार का मानना है कि इस तरह के संस्थागत ढाँचे से राज्य में उन्नत प्रौद्योगिकी पारितंत्र विकसित होगा और वैश्विक कंपनियों के लिए निवेश का अनुकूल वातावरण तैयार होगा।
नायडू की रणनीति केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि दीर्घकालिक संस्थागत विकास पर केंद्रित है। सूत्रों के अनुसार राज्य में क्वांटम विश्वविद्यालय स्थापित करने की दिशा में भी प्रारंभिक चर्चा चल रही है। इस प्रस्तावित विश्वविद्यालय में क्वांटम कंप्यूटिंग, मशीन लर्निंग, डेटा विज्ञान और साइबर सुरक्षा जैसे विषयों पर विशेष पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे। राज्य सरकार का तर्क है कि भविष्य की अर्थव्यवस्था ज्ञान-आधारित होगी और यदि युवाओं को समय रहते उन्नत कौशल प्रदान किया जाए तो रोजगार और उद्यमिता दोनों के नए अवसर खुलेंगे।
मुख्यमंत्री ने अपने पूर्व कार्यकाल में सूचना प्रौद्योगिकी और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए कई पहलें की थीं। अब वे उसी अनुभव को आधार बनाकर एआई और क्वांटम प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आंध्र प्रदेश को अग्रणी बनाने का प्रयास कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि राज्य में पहले से मौजूद औद्योगिक आधार, बंदरगाह सुविधाएँ और शैक्षणिक संस्थान इस नई रणनीति को गति देने में सहायक होंगे।
सम्मेलन में भागीदारी को राज्य सरकार ने रणनीतिक अवसर के रूप में देखा है। विश्व आर्थिक मंच द्वारा आयोजित गोलमेज चर्चा ‘कम्पेटिटिवनेस थ्रू आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ में भी नायडू भाग लेंगे। इस बैठक में वैश्विक तकनीकी कंपनियों और नीति निर्माताओं के साथ प्रतिस्पर्धात्मकता, नवाचार और नियामक ढाँचे पर विचार-विमर्श होगा। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि आंध्र प्रदेश को एआई निवेश के लिए पसंदीदा गंतव्य के रूप में प्रस्तुत किया जाए।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार एक मिलियन युवाओं को प्रशिक्षित करने की योजना राज्य के कौशल विकास ढाँचे के साथ एकीकृत की जाएगी। प्रशिक्षण कार्यक्रमों में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों का उपयोग होगा। उद्योग साझेदारी के माध्यम से प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की भी योजना है। सरकार का दावा है कि इससे राज्य की अर्थव्यवस्था में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार के रोजगार सृजित होंगे।
विश्लेषकों का मानना है कि एआई और क्वांटम प्रौद्योगिकी में निवेश राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा को नई दिशा दे सकता है। तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों ने पहले ही तकनीकी पारितंत्र को मजबूत किया है। ऐसे में आंध्र प्रदेश का यह कदम क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा को तेज कर सकता है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि योजनाओं की सफलता क्रियान्वयन, निवेश की निरंतरता और उद्योग-शिक्षा सहयोग पर निर्भर करेगी।
राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि आगामी महीनों में एआई प्रयोगशालाओं, स्टार्टअप इनक्यूबेशन केंद्रों और अनुसंधान अनुदान योजनाओं की भी घोषणा की जा सकती है। लक्ष्य यह है कि राज्य में नवाचार आधारित स्टार्टअप संस्कृति को प्रोत्साहन मिले और स्थानीय उद्यमी वैश्विक बाजारों तक पहुँच बना सकें। अधिकारियों का कहना है कि यदि योजनाएँ निर्धारित समयसीमा में लागू होती हैं, तो आंध्र प्रदेश न केवल तकनीकी निवेश आकर्षित करेगा बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर कौशल विकास का मॉडल भी बन सकता है।
कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू का यह खाका आंध्र प्रदेश को उन्नत प्रौद्योगिकी के मानचित्र पर स्थापित करने का प्रयास है। दस लाख युवाओं को प्रशिक्षित करने, क्वांटम और एआई उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने और वैश्विक साझेदारियों के माध्यम से निवेश आकर्षित करने की यह योजना राज्य की आर्थिक संरचना में दीर्घकालिक परिवर्तन ला सकती है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि घोषित समझौते किस गति से जमीन पर उतरते हैं और क्या आंध्र प्रदेश वास्तव में एआई और क्वांटम नवाचार का नया केंद्र बन पाता है।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

