झारखंड का 1 लाख 58 हजार 560 करोड़ का बजट चुनौतियों के बीच विकास और आत्मनिर्भरता का बड़ा संदेश

झारखंड का 1 लाख 58 हजार 560 करोड़ का बजट चुनौतियों के बीच विकास और आत्मनिर्भरता का बड़ा संदेश

प्रेषित समय :20:26:35 PM / Tue, Feb 24th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

अनिल मिश्र/रांची. झारखंड विधानसभा में वित्त वर्ष 2026–27 के लिए ₹1,58,560 करोड़ का बजट प्रस्तुत करते हुए वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने स्पष्ट कर दिया कि राज्य सरकार आर्थिक और संघीय चुनौतियों के बावजूद विकास की रफ्तार को थमने नहीं देगी. यह बजट केवल आय-व्यय का वार्षिक लेखा-जोखा नहीं, बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति, वित्तीय अनुशासन और सामाजिक न्याय के समन्वय का दस्तावेज बनकर सामने आया है. बजट भाषण की शुरुआत वीर शहीदों और झारखंड आंदोलन के महानायक शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि देकर की गई, जिससे यह संकेत मिला कि सरकार विकास को ऐतिहासिक चेतना और सामाजिक प्रतिबद्धता से जोड़कर देखती है.

₹1,58,560 करोड़ का बजट आकार राज्य की बढ़ती वित्तीय क्षमता का संकेत देता है. पिछले वर्षों की तुलना में बजट में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है, जो आंतरिक राजस्व संग्रह में सुधार, खनिज संसाधनों से आय में वृद्धि और कर प्रशासन में पारदर्शिता का परिणाम बताया जा रहा है. पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता देना इस बात का संकेत है कि सरकार अल्पकालिक राहत से आगे बढ़कर दीर्घकालिक आर्थिक आधार मजबूत करना चाहती है. संसाधनों पर दबाव और केंद्र से सहयोग में असंतुलन की परिस्थितियों में इतना बड़ा बजट प्रस्तुत करना प्रशासनिक आत्मविश्वास को दर्शाता है.

वित्त मंत्री ने सदन में बताया कि केंद्र सरकार से कर हिस्सेदारी के लगभग ₹5,000 करोड़ लंबित हैं. जीएसटी व्यवस्था के कारण राज्य को अनुमानित ₹5,640 करोड़ का नुकसान हो रहा है. मनरेगा की राशि वितरण प्रणाली में बदलाव से भी हजारों करोड़ की संभावित कमी का आकलन किया गया है. इन परिस्थितियों के बावजूद राज्य सरकार ने विकास योजनाओं में कटौती नहीं करने का निर्णय लिया है. यह संदेश देने की कोशिश की गई कि झारखंड अपनी आंतरिक संसाधन क्षमता के बल पर आगे बढ़ेगा.

सामाजिक क्षेत्र पर बजट में विशेष जोर दिया गया है. शिक्षा के लिए विद्यालय भवनों के निर्माण और मरम्मत, डिजिटल कक्षाओं के विस्तार, छात्रवृत्ति योजनाओं में वृद्धि और शिक्षक नियुक्तियों को गति देने का प्रावधान किया गया है. सरकार का मानना है कि मानव संसाधन में निवेश ही दीर्घकालीन आर्थिक विकास की कुंजी है. स्वास्थ्य क्षेत्र में जिला अस्पतालों के उन्नयन, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सक और उपकरण उपलब्ध कराने, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों के विस्तार तथा कुपोषण उन्मूलन के लिए समेकित पोषण अभियान को प्राथमिकता दी गई है.

इस बजट की विशेषता “बाल बजट” की पहल भी रही. राज्य के विभिन्न जिलों में बाल बजट संवाद आयोजित कर बच्चों से उनकी अपेक्षाएं पूछी गईं. स्कूल, खेल, पोषण और सुरक्षा जैसे विषयों पर बच्चों की राय को शामिल करना लोकतांत्रिक भागीदारी का अनूठा उदाहरण माना जा रहा है. सरकार का दावा है कि इससे योजनाओं को जमीनी जरूरतों के अनुरूप बनाया जा सकेगा.

ग्रामीण विकास और रोजगार पर भी विशेष ध्यान दिया गया है. मनरेगा फंड आवंटन में संभावित कमी के बावजूद राज्य सरकार ने ग्रामीण रोजगार योजनाओं को प्राथमिकता देने और आवश्यकता पड़ने पर राज्य संसाधनों से पूरक वित्त उपलब्ध कराने की बात कही है. कृषि क्षेत्र में सिंचाई परियोजनाओं के पुनर्जीवन, फसल विविधीकरण, कृषि प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना और न्यूनतम समर्थन मूल्य तंत्र को मजबूत करने की दिशा में कदम प्रस्तावित किए गए हैं. स्वयं सहायता समूहों को सस्ती दर पर ऋण और विपणन सहायता उपलब्ध कराना भी प्राथमिकता में शामिल है.

अवसंरचना विकास के तहत ग्रामीण और शहरी सड़कों के विस्तार, पुल और फ्लाईओवर निर्माण, ऊर्जा वितरण प्रणाली में सुधार तथा औद्योगिक क्लस्टर और लॉजिस्टिक पार्क की स्थापना पर जोर दिया गया है. पूंजीगत व्यय में वृद्धि से रोजगार सृजन और निजी निवेश आकर्षित होने की उम्मीद जताई गई है. खनिज संपदा से समृद्ध झारखंड में ई-नीलामी प्रणाली के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ाने, रॉयल्टी संग्रह में वृद्धि और अवैध खनन पर नियंत्रण की रणनीति अपनाई जा रही है. खनन से प्राप्त आय को सामाजिक क्षेत्र और अधोसंरचना में पुनर्निवेश करने की बात कही गई है.

युवाओं के लिए कौशल विकास मिशन, स्टार्टअप नीति, एमएसएमई प्रोत्साहन और आईटी व सेवा क्षेत्र में निवेश पर जोर दिया गया है. सरकार का मानना है कि राज्य की युवा आबादी को रोजगार और उद्यमिता से जोड़ना दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक है. शहरी विकास के अंतर्गत नगर निकायों की वित्तीय सुदृढ़ता, पेयजल और स्वच्छता परियोजनाओं का विस्तार तथा स्मार्ट प्रबंधन प्रणाली लागू करने की योजना प्रस्तुत की गई है.

वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता के लिए डिजिटल ट्रेजरी प्रणाली, ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन भुगतान प्रणाली और बजट मॉनिटरिंग डैशबोर्ड जैसे उपायों को लागू करने पर बल दिया गया है. इन कदमों से भ्रष्टाचार पर अंकुश और राजस्व की बेहतर निगरानी संभव होने की बात कही गई है.

राजनीतिक स्तर पर भी बजट को लेकर चर्चा तेज है. गठबंधन सरकार ने स्पष्ट किया है कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर विकास सर्वोच्च प्राथमिकता है. केंद्र से अपेक्षित सहयोग की जरूरत को स्वीकार करते हुए भी राज्य ने आत्मनिर्भरता का संदेश दिया है. ₹5,000 करोड़ की लंबित हिस्सेदारी और जीएसटी से ₹5,640 करोड़ के अनुमानित नुकसान के बावजूद योजनाओं में कटौती न करना प्रशासनिक दृढ़ता का संकेत माना जा रहा है.

₹1,58,560 करोड़ का यह बजट झारखंड की विकास यात्रा का नया अध्याय बताया जा रहा है. सामाजिक न्याय, वित्तीय अनुशासन, पूंजीगत निवेश और समावेशी दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत यह बजट आने वाले वर्षों में राज्य की दिशा तय करेगा. अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि घोषित योजनाओं का क्रियान्वयन किस गति और पारदर्शिता के साथ किया जाता है और क्या झारखंड संसाधनों की धरती से आगे बढ़कर अवसरों की धरती बनने के अपने लक्ष्य को हासिल कर पाता है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-