सरकारी वाहन में अनधिकृत चेकिंग का आरोप, जबलपुर परिवहन विभाग पर बड़ा सवाल, मामला आयुक्त उमेश जोगा-सचिव मनीष सिंह तक पहुँचा

सरकारी वाहन में अनधिकृत चेकिंग का आरोप, जबलपुर परिवहन विभाग पर बड़ा सवाल, मामला आयुक्त उमेश जोगा-सचिव मनीष सिंह तक पहुँचा

प्रेषित समय :19:08:33 PM / Tue, Feb 24th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. एमपी के जबलपुर में जबलपुर परिवहन विभाग एक गंभीर विवाद के केंद्र में आ गया है.  20 जनवरी 2026 को दी गई लिखित शिकायत के बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं. मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर के अधिवक्ता धर्मराज सिंह द्वारा क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी को प्रस्तुत आवेदन में वाहन चेकिंग के दौरान गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है.

शिकायत के अनुसार वाहन चेकिंग के दौरान बिना निर्धारित वर्दी व बिना स्पष्ट पहचान चिह्न के कार्रवाई की गई. सबसे गंभीर आरोप यह है कि सरकारी वाहन में बैठकर एक अनधिकृत व्यक्ति द्वारा वाहन चेकिंग की गई, जो विभागीय अधिकार व वैधानिक प्रक्रिया पर सीधा प्रश्नचिह्न लगाता है. आवेदन के साथ फोटोग्राफ भी संलग्न किए गए हैं. जिन्हें प्रथम दृष्टया साक्ष्य बताया गया है. शिकायत मिलने के बाद क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी मधु सिंह एवं संतोष पाल ने संबंधित फ्लाइंग प्रभारी राजेंद्र साहू को नोटिस जारी कर तीन दिवस में बिंदुवार स्पष्टीकरण मांगा था. विभागीय पत्राचार में स्पष्ट समयसीमा का उल्लेख किया गया था. लेकिन शिकायतकर्ता का दावा है कि निर्धारित अवधि बीत जाने के बावजूद स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है. इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या विभागीय कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है.

मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरी शिकायत सीएम हेल्पलाइन में भी दर्ज कराई गई है. शिकायत में उल्लेख है कि 20 जनवरी को लिखित आवेदन देने के बाद नोटिस तो जारी हुआ परंतु संबंधित अधिकारी द्वारा जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया. प्रकरण अब उच्च प्रशासनिक स्तर तक पहुंच चुका है. परिवहन आयुक्त ग्वालियर उमेश जोगा तथा परिवहन विभाग के सचिव मनीष सिंह को भी साक्ष्यों सहित शिकायत भेजी गई है. शिकायतकर्ता ने ईमेल और अन्य आधिकारिक माध्यमों से स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है.

कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि सरकारी वाहन का उपयोग कर किसी अनधिकृत व्यक्ति द्वारा चेकिंग की पुष्टि होती है तो यह केवल विभागीय लापरवाही नहीं बल्कि अधिकारों के दुरुपयोग का गंभीर मामला माना जा सकता है. अब निगाहें आयुक्त व सचिव स्तर की कार्रवाई पर टिकी हैं. क्या स्वतंत्र जांच के आदेश जारी होंगे. क्या जिम्मेदारी तय होगी या मामला विभागीय स्तर पर ही शांत कर दिया जाएगा. फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है. यदि समयब व पारदर्शी जांच नहीं होती है तो यह मामला न्यायालय तक पहुंच सकता है

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-