रंगभरी एकादशी 2026 पर करें, ये तीन सरल उपाय कार्यक्षेत्र में मिलेगी तरक्की और जीवन में आएगी सुख शांति

रंगभरी एकादशी 2026 पर करें, ये तीन सरल उपाय कार्यक्षेत्र में मिलेगी तरक्की और जीवन में आएगी सुख शांति

प्रेषित समय :22:14:27 PM / Wed, Feb 25th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

धर्म डेस्क. फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाने वाली रंगभरी एकादशी इस वर्ष 27 फरवरी 2026 को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाएगी. इस पावन तिथि को आमलकी एकादशी और आंवला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने का विशेष महत्व है. मान्यता है कि सच्चे मन से किए गए व्रत और उपाय जीवन के संकटों को दूर करते हैं और सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं.

पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि की शुरुआत 27 फरवरी को रात 12 बजकर 33 मिनट पर होगी और उसी दिन रात 10 बजकर 32 मिनट पर इसका समापन होगा. ऐसे में 27 फरवरी को ही रंगभरी एकादशी का व्रत रखा जाएगा. ज्योतिष शास्त्र में इस दिन कुछ विशेष उपाय बताए गए हैं, जिन्हें करने से कार्यक्षेत्र में उन्नति, मानसिक शांति और जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं.

पहला उपाय जीवन में सुख-शांति के लिए बताया गया है. यदि व्यक्ति अपने जीवन में मानसिक तनाव, पारिवारिक कलह या अशांति का सामना कर रहा है तो उसे इस दिन प्रातःकाल किसी पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए. यदि संभव न हो तो घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान भी किया जा सकता है. इसके बाद श्री हरि विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करें और उन्हें आंवला अर्पित करें. धार्मिक मान्यता है कि आंवला भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है. ऐसा करने से भगवान की कृपा बनी रहती है और घर में सुख-शांति का वास होता है.

दूसरा उपाय जीवन में सफलता प्राप्त करने से जुड़ा है. यदि आप शिक्षा, व्यवसाय या किसी अन्य क्षेत्र में निरंतर प्रयास के बावजूद अपेक्षित सफलता नहीं पा रहे हैं, तो रंगभरी एकादशी के दिन भगवान विष्णु को 1 या 21 ताजे पीले फूलों की माला अर्पित करें. पूजा के समय श्रद्धा भाव से विष्णु मंत्रों का जाप करें और उन्हें खीर का भोग लगाएं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह उपाय व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और सफलता के मार्ग खोलता है.

तीसरा उपाय कार्यक्षेत्र में तरक्की और बाधाओं को दूर करने के लिए बताया गया है. इस दिन आंवले के पेड़ में जल अर्पित करें और उसकी जड़ की थोड़ी सी मिट्टी लेकर माथे पर तिलक लगाएं. ऐसा करने से कार्यक्षेत्र में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और पदोन्नति या नए अवसर मिलने की संभावनाएं बढ़ती हैं. मान्यता है कि आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु का वास होता है, इसलिए इसकी पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है.

धार्मिक ग्रंथों में रंगभरी एकादशी को भक्ति और समर्पण का पर्व बताया गया है. इस दिन व्रत रखने के साथ-साथ दान-पुण्य करने का भी विशेष महत्व है. जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या आंवला दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है. श्रद्धालु इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी करते हैं, जिससे मानसिक शांति और आध्यात्मिक बल मिलता है.

मान्यता है कि रंगभरी एकादशी केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और सकारात्मक संकल्प का अवसर भी है. यदि व्यक्ति सच्चे मन से पूजा और उपाय करता है, तो उसके जीवन में सुख-समृद्धि, सफलता और शांति का मार्ग प्रशस्त होता है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-