राज्यसभा में इतिहास रचने की तैयारी मेनका गुरुस्वामी बन सकती हैं देश की पहली LGBTQ सांसद

राज्यसभा में इतिहास रचने की तैयारी मेनका गुरुस्वामी बन सकती हैं देश की पहली LGBTQ सांसद

प्रेषित समय :21:46:00 PM / Sat, Feb 28th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. आगामी 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलकों में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. All India Trinamool Congress ने सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता Menaka Guruswamy को राज्यसभा के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया है. यदि वे निर्वाचित होती हैं, तो वे भारत की पहली खुलकर पहचान रखने वाली LGBTQ सांसद बन सकती हैं. यह नामांकन भारतीय राजनीति में प्रतिनिधित्व और विविधता के संदर्भ में ऐतिहासिक माना जा रहा है.

मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने मेनका गुरुस्वामी के साथ गायक से राजनेता बने Babul Supriyo, टॉलीवुड अभिनेत्री Koel Mallick और हाल ही में सेवानिवृत्त पश्चिम बंगाल के पूर्व डीजीपी Rajeev Kumar को भी राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है. पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी बयान में सभी उम्मीदवारों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे पार्टी की प्रतिबद्धता, लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रत्येक भारतीय के अधिकारों एवं गरिमा की रक्षा की विरासत को आगे बढ़ाएंगे.

मेनका गुरुस्वामी देश की जानी-मानी संवैधानिक वकील हैं. उन्होंने 1992 में नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी में प्रवेश लिया और 1997 में अपने कानूनी करियर की शुरुआत पूर्व अटॉर्नी जनरल अशोक देसाई के मार्गदर्शन में की. प्रारंभिक वर्षों में उन्होंने संवैधानिक मामलों और जटिल वादों पर काम किया. बाद में उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ सिविल लॉ की डिग्री प्राप्त की और हार्वर्ड लॉ स्कूल से एलएलएम किया. वे न्यूयॉर्क की प्रतिष्ठित लॉ फर्म डेविस पोल्क एंड वार्डवेल में भी प्रैक्टिस कर चुकी हैं. वर्ष 2015 में वे रोड्स स्कॉलर के रूप में ऑक्सफोर्ड लौटीं और कानून में डॉक्टरेट (डी.फिल.) पूरी की.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनका अनुभव व्यापक रहा है. उन्होंने येल लॉ स्कूल, कोलंबिया लॉ स्कूल और न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ लॉ में विजिटिंग फैकल्टी के रूप में अध्यापन किया. संयुक्त राष्ट्र विकास कोष और यूनिसेफ के साथ सलाहकार के रूप में भी उन्होंने काम किया. भारत में वे कई महत्वपूर्ण मामलों से जुड़ी रही हैं, जिनमें भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को चुनौती देने वाला ऐतिहासिक मामला भी शामिल है. इस फैसले ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर भारतीय LGBTQ समुदाय के अधिकारों की दिशा में बड़ा बदलाव लाया था.

इसके अलावा उन्होंने नौकरशाही सुधार, अगस्ता वेस्टलैंड रिश्वत प्रकरण, सलवा जुडूम मामला और शिक्षा का अधिकार अधिनियम से जुड़े मामलों में भी भूमिका निभाई. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 1,528 कथित फर्जी मुठभेड़ों से जुड़े मामले में एमिकस क्यूरी नियुक्त किया था, जहां उन्होंने स्वतंत्र कानूनी विशेषज्ञ के रूप में अदालत की सहायता की. वर्ष 2019 में उन्हें ‘फॉरेन पॉलिसी’ पत्रिका की 100 सबसे प्रभावशाली वैश्विक चिंतकों की सूची में भी शामिल किया गया था.

हाल के समय में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की ओर से प्रवर्तन निदेशालय द्वारा आई-पैक कार्यालयों पर की गई तलाशी के खिलाफ कानूनी कार्यवाही में पार्टी का प्रतिनिधित्व किया था. उनके राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने को राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम न केवल पेशेवर योग्यता को महत्व देता है, बल्कि संसद में विविध समुदायों की आवाज को भी मजबूत कर सकता है.

यदि मेनका गुरुस्वामी राज्यसभा पहुंचती हैं, तो यह भारतीय लोकतंत्र में समावेशिता की दिशा में एक ऐतिहासिक पड़ाव होगा. 16 मार्च को होने वाले चुनाव के बाद तस्वीर साफ होगी, लेकिन फिलहाल उनका नामांकन राष्ट्रीय राजनीति में व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-