नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब भारत की अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवाओं पर भी साफ दिखाई देने लगा है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने शुक्रवार को जानकारी दी कि क्षेत्र में जारी अस्थिर स्थिति और कई देशों के हवाई क्षेत्र पर लगे प्रतिबंधों के कारण भारतीय एयरलाइंस की कुल 278 अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को रद्द करना पड़ा है। सरकार ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे अपनी उड़ानों से जुड़ी ताजा जानकारी पर लगातार नजर रखें और एयरलाइंस द्वारा जारी सूचनाओं को ध्यान से देखें।
मंत्रालय के अनुसार पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात के चलते कई महत्वपूर्ण हवाई मार्ग प्रभावित हुए हैं। इसी वजह से भारतीय एयरलाइंस को अपनी उड़ानों के शेड्यूल में बदलाव करना पड़ा और कई सेवाएं रद्द करनी पड़ीं। हालांकि शुक्रवार को भारतीय घरेलू एयरलाइंस द्वारा पश्चिम एशिया के विभिन्न शहरों के लिए कुल 96 उड़ानों का संचालन निर्धारित किया गया था, लेकिन बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय सेवाएं प्रभावित हुईं।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में कहा कि पश्चिम एशिया में चल रही घटनाओं और हवाई क्षेत्र पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण कई सेक्टरों में उड़ान संचालन प्रभावित हुआ है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है और एयरलाइंस लगातार हालात की समीक्षा कर रही हैं।
मंत्रालय ने यात्रियों से अपील की है कि वे अपनी यात्रा से पहले उड़ान की स्थिति की जांच अवश्य करें और एयरलाइंस द्वारा भेजे गए संदेशों, ईमेल या अन्य संचार माध्यमों पर ध्यान दें। अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा हालात में उड़ानों के समय और मार्गों में अचानक बदलाव संभव है, इसलिए यात्रियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
यात्रियों की सहायता के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने अपने पैसेंजर असिस्टेंस कंट्रोल रूम को चौबीसों घंटे सक्रिय रखा है। यह नियंत्रण कक्ष एयरलाइंस और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर यात्रियों की समस्याओं का समाधान करने का काम कर रहा है। मंत्रालय के अनुसार अब तक एयरसेवा पोर्टल, सोशल मीडिया और हेल्पलाइन कॉल के माध्यम से कुल 1,881 यात्रियों की शिकायतों और समस्याओं का समाधान किया जा चुका है।
यात्रियों को सहायता प्रदान करने के लिए मंत्रालय ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं। जरूरत पड़ने पर यात्री 011-24604283 और 011-24632987 पर संपर्क कर सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन नंबरों पर यात्रियों को उड़ानों की स्थिति, टिकट रिफंड और यात्रा से जुड़े अन्य मुद्दों पर सहायता दी जा रही है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर देश के कई प्रमुख हवाई अड्डों पर भी देखने को मिला है। बेंगलुरु अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कुल 33 उड़ानों को रद्द करना पड़ा, जिनमें 15 प्रस्थान और 18 आगमन वाली उड़ानें शामिल हैं। इसी तरह दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी 29 उड़ानें प्रभावित हुईं, जिनमें 15 प्रस्थान और 14 आगमन वाली सेवाएं शामिल हैं। कोलकाता हवाई अड्डे पर भी सात उड़ानें रद्द की गईं, जिनमें चार प्रस्थान और तीन आगमन की उड़ानें शामिल थीं।
विमानन अधिकारियों के अनुसार पश्चिम एशिया के कई हिस्सों में हवाई क्षेत्र अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के मार्ग प्रभावित हुए हैं। कई एयरलाइंस को लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है, जबकि कुछ सेवाओं को पूरी तरह से स्थगित करना पड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक उड़ानों का संचालन पूरी तरह सामान्य होना मुश्किल है।
इस बीच कुछ एयरलाइंस ने सीमित सेवाएं फिर से शुरू करने की भी घोषणा की है। एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने बताया है कि सऊदी अरब और ओमान का हवाई क्षेत्र फिलहाल सुरक्षित माना जा रहा है, इसलिए जेद्दा और मस्कट के लिए उड़ान सेवाएं फिर से शुरू की गई हैं। हालांकि पश्चिम एशिया के अन्य कई गंतव्यों के लिए एयर इंडिया समूह की नियमित सेवाएं 10 मार्च तक निलंबित रखी गई हैं।
दूसरी ओर कुछ निजी एयरलाइंस ने भी यात्रियों को राहत देने के लिए विशेष कदम उठाए हैं। स्पाइसजेट ने संयुक्त अरब अमीरात से भारत आने वाले यात्रियों को वापस लाने के लिए 14 विशेष उड़ानें संचालित करने की घोषणा की है। इन विशेष उड़ानों का उद्देश्य उन यात्रियों को मदद पहुंचाना है जो क्षेत्र में अचानक बदले हालात के कारण फंस गए हैं।
अकासा एयर ने भी जानकारी दी कि वह मुंबई से जेद्दा के बीच अपनी निर्धारित उड़ान का संचालन जारी रखेगी। इसके अलावा शनिवार को मुंबई, अहमदाबाद और कोच्चि से जेद्दा के लिए अतिरिक्त उड़ानें संचालित करने की योजना भी बनाई गई है। एयरलाइंस का कहना है कि वे यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए स्थिति की लगातार समीक्षा कर रही हैं।
पश्चिम एशिया में मौजूदा संकट पिछले कुछ दिनों में तेजी से बढ़ा है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद क्षेत्र में सैन्य तनाव चरम पर पहुंच गया है। इसके जवाब में ईरान ने भी कई ठिकानों पर जवाबी हमले किए हैं, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। इसी कारण कई देशों ने अपने हवाई क्षेत्र पर अस्थायी प्रतिबंध लगाए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों का असर वैश्विक विमानन क्षेत्र पर तुरंत दिखाई देता है, क्योंकि हवाई मार्गों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होती है। यदि किसी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ जाती हैं या मिसाइल और ड्रोन हमलों का खतरा रहता है, तो एयरलाइंस और विमानन प्राधिकरण तुरंत वैकल्पिक मार्ग अपनाने या उड़ानों को रद्द करने का निर्णय लेते हैं।
भारत सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि वह पश्चिम एशिया में बदलते हालात पर लगातार नजर रख रही है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय और एयरलाइंस मिलकर स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और जहां संभव हो वहां सेवाओं को धीरे-धीरे बहाल किया जा सके।
फिलहाल यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा से पहले अपनी उड़ान की स्थिति की पुष्टि अवश्य करें और किसी भी तरह की परेशानी होने पर तुरंत एयरलाइंस या मंत्रालय की हेल्पलाइन से संपर्क करें। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति सामान्य होते ही उड़ानों का संचालन भी धीरे-धीरे पटरी पर लौट आएगा।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

