नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे संघर्ष का असर अब आम यात्रियों की जेब पर भी पड़ने लगा है. देश की प्रमुख विमान सेवा कंपनी एयर इंडिया ने मंगलवार को घोषणा की कि वह अपने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर फ्यूल सरचार्ज में बढ़ोतरी करने जा रही है. कंपनी का कहना है कि खाड़ी क्षेत्र में जारी भू-राजनीतिक संकट के कारण जेट ईंधन की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिसके चलते यह फैसला लेना पड़ा है. इस निर्णय के बाद आने वाले दिनों में हवाई टिकटों की कीमतें बढ़ने की संभावना जताई जा रही है.
एयर इंडिया द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार कंपनी फ्यूल सरचार्ज को एक साथ बढ़ाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से लागू करेगी. एयरलाइन ने इसे “फेज्ड एक्सपेंशन” यानी क्रमिक विस्तार बताया है. इसका मतलब यह है कि अलग-अलग रूट और दूरी के हिसाब से सरचार्ज में धीरे-धीरे बढ़ोतरी की जाएगी. कंपनी का कहना है कि पिछले कुछ हफ्तों में जेट फ्यूल की कीमतों में अप्रत्याशित तेजी आई है, जिसका सीधा असर एयरलाइनों के संचालन खर्च पर पड़ा है.
एयर इंडिया के अधिकारियों के मुताबिक पश्चिम एशिया में जारी सैन्य टकराव के कारण तेल आपूर्ति से जुड़े कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमले हुए हैं. इन हमलों से उत्पादन प्रभावित हुआ है और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है. इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र के कई व्यापारिक मार्गों पर भी असर पड़ा है, जिससे तेल की सप्लाई चेन में बाधा उत्पन्न हुई है. इसी कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं.
स्थिति को और गंभीर बना रहा है Strait of Hormuz के आसपास पैदा हुआ संकट. यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है. खाड़ी देशों से निकलने वाले बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी मार्ग से होकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है. लेकिन हालिया तनाव के कारण इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही बाधित हुई है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो ऊर्जा कीमतों में और अधिक बढ़ोतरी हो सकती है.
ऊर्जा बाजार के जानकारों के अनुसार पिछले दो सप्ताह में जेट ईंधन की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है. जेट फ्यूल किसी भी एयरलाइन के संचालन खर्च का एक बड़ा हिस्सा होता है, जो कुल लागत का लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक हो सकता है. ऐसे में ईंधन महंगा होने का सीधा असर हवाई किराए पर पड़ता है. एयरलाइनों के लिए बढ़ती लागत को लंबे समय तक खुद वहन करना संभव नहीं होता, इसलिए कंपनियां फ्यूल सरचार्ज के जरिए उसका कुछ हिस्सा यात्रियों से वसूलती हैं.
एयर इंडिया ने भी अपने बयान में कहा कि कंपनी लगातार बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ कम से कम रखने की कोशिश कर रही है. हालांकि मौजूदा परिस्थितियों में संचालन लागत को संतुलित रखने के लिए फ्यूल सरचार्ज बढ़ाना जरूरी हो गया है. कंपनी ने यह भी संकेत दिया है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतें स्थिर होती हैं या कम होती हैं तो भविष्य में सरचार्ज की समीक्षा भी की जा सकती है.
हवाई यात्रा उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि एयर इंडिया के इस कदम का असर दूसरी एयरलाइनों पर भी पड़ सकता है. यदि ईंधन की कीमतें इसी तरह ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो अन्य एयरलाइंस भी अपने किराए या फ्यूल सरचार्ज में बदलाव कर सकती हैं. इससे आने वाले समय में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह की उड़ानों के टिकट महंगे हो सकते हैं.
यात्रा क्षेत्र से जुड़े विश्लेषकों का कहना है कि मार्च और अप्रैल का समय आम तौर पर पर्यटन और व्यापारिक यात्राओं के लिए व्यस्त रहता है. ऐसे समय में किराए बढ़ने से यात्रियों की योजना प्रभावित हो सकती है. हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तेल बाजार में स्थिति जल्दी सामान्य हो जाती है तो किराए में वृद्धि सीमित रह सकती है.
उधर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया में संघर्ष यदि लंबा चलता है तो इसका असर केवल विमानन उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा. पेट्रोल-डीजल से लेकर परिवहन और लॉजिस्टिक्स तक कई क्षेत्रों में लागत बढ़ सकती है. इसका प्रभाव अंततः आम उपभोक्ताओं पर पड़ता है.
फिलहाल एयर इंडिया ने यह स्पष्ट किया है कि यात्रियों को नई दरों की जानकारी टिकट बुकिंग के समय ही मिल जाएगी. एयरलाइन ने यह भी कहा कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए फ्यूल सरचार्ज को टिकट के किराए में स्पष्ट रूप से दिखाया जाएगा, ताकि यात्रियों को पता रहे कि कुल किराए में कितना हिस्सा ईंधन लागत के कारण बढ़ा है.
विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार के बीच गहरा संबंध है. जैसे ही किसी महत्वपूर्ण तेल उत्पादक क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, उसका असर दुनिया भर के बाजारों पर दिखाई देता है. मौजूदा स्थिति भी इसी का उदाहरण है, जहां पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों को प्रभावित किया है और उसका असर भारत के विमानन क्षेत्र तक पहुंच गया है.
कुल मिलाकर एयर इंडिया द्वारा फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने का फैसला इस बात का संकेत है कि वैश्विक संकटों का असर सीधे आम यात्रियों तक पहुंच सकता है. आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पश्चिम एशिया की स्थिति किस दिशा में जाती है और ऊर्जा कीमतों में कितना उतार-चढ़ाव आता है, क्योंकि उसी के आधार पर हवाई यात्रा की लागत तय होगी.