भोपाल. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल नगर निगम में 13 मार्च शुक्रवार की सुबह उस वक्त हड़कंप व अफरातफरी मच गई, जब लोकायुक्त पुलिस की विशेष टीम ने फतेहगढ़ स्थित कार्यालय और एक अन्य दफ्तर पर दबिश दी. यह कार्रवाई निर्माण कार्यों के नाम पर फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपये के भुगतान की शिकायतों के बाद की गई है. लोकायुक्त की टीम उस वक्त निगम दफ्तर पहुँची जब कर्मचारी अपनी सीटें संभाल ही रहे थे.
फाइनेंस और कंप्यूटर शाखा घेरे में
टीम ने सबसे पहले फायनेंस और कंप्यूटर शाखा को अपने घेरे में लिया. जानकारी के अनुसार, फतेहगढ़ ऑफिस खुलते ही लोकायुक्त की टीम वहाँ पहुँच गई थी. बताया जा रहा है कि लोकायुक्त को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि निगम में बिना किसी जमीनी काम के, केवल कागजों पर फर्जी बिल लगाकर भुगतान का खेल चल रहा है.
10 साल पुराने दस्तावेजों की जब्ती
कार्रवाई की सबसे बड़ी बात यह है कि पुलिस ने शिकायतों के आधार पर पिछले 10 वर्षों के पुराने रिकॉर्ड और दस्तावेज जब्त किए हैं. यह संकेत देता है कि यह घोटाला किसी एक कार्यकाल का नहीं, बल्कि एक दशक से चल रहा एक संगठित भ्रष्टाचार है. जांच टीम अब इन दस्तावेजों का मिलान जमीनी हकीकत से करने की तैयारी में है.
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