जबलपुर.मध्य प्रदेश की संस्कारधानी अब केवल सांस्कृतिक और न्यायिक केंद्र ही नहीं बल्कि प्रदेश के एक बड़े औद्योगिक पावरहाउस के रूप में उभर रही है. वर्तमान में प्रोफेशनल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म लिंक्डइन और अन्य व्यापारिक हलकों में जबलपुर के हरगढ़ और उमरिया-डुंगरिया औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार और वहां हो रहे नए निवेश को लेकर जबरदस्त चर्चाएं व्याप्त हैं. पिछले कुछ महीनों में राज्य सरकार द्वारा जबलपुर को मेट्रोपॉलिटन सिटी बनाने की घोषणा और मास्टर प्लान 2041 के तहत औद्योगिक बुनियादी ढांचे पर दिए गए जोर ने वैश्विक और राष्ट्रीय निवेशकों का ध्यान इस ओर खींचा है.
हरगढ़ औद्योगिक क्षेत्र जो पहले मुख्य रूप से खनिज आधारित उद्योगों के लिए जाना जाता था अब उसे मल्टी-प्रोडक्ट क्लस्टर के रूप में पुनर्विकसित किया जा रहा है. यहाँ करीब 178 हेक्टेयर भूमि पर सड़क, बिजली और जल आपूर्ति जैसे बुनियादी ढांचे को आधुनिकतम बनाने का काम अंतिम चरण में है. लिंक्डइन पर सक्रिय उद्यमी और व्यापारिक विश्लेषक लगातार पोस्ट साझा कर रहे हैं कि किस प्रकार हरगढ़ में अब राइस मिलों से लेकर लॉजिस्टिक हब और मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों के लिए जमीन का आवंटन तेजी से शुरू हो गया है. विशेष रूप से खनिज आधारित विशेष आर्थिक प्रक्षेत्र (एसईजेड) की डी-नोटिफाइड जमीन को अब सामान्य औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करना स्थानीय रोजगार के लिए एक मील का पत्थर साबित होने वाला है.
इसी तरह उमरिया-डुंगरिया क्षेत्र में औद्योगिक इकाइयों के लिए अब जगह की भारी कमी देखी जा रही है जो इस क्षेत्र की सफलता का स्पष्ट प्रमाण है. करीब 316 हेक्टेयर में फैले इस बहु-उत्पाद औद्योगिक क्षेत्र में एयरोस्पेस, बेवरेजेस, टेक्सटाइल और परिधान जैसे क्षेत्रों में निवेश की भारी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं. लिंक्डइन पर चल रही चर्चाओं के अनुसार कई मल्टीनेशनल कंपनियां और बड़े भारतीय उद्योग समूह इस क्षेत्र में जॉइंट वेंचर या कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग के लिए सक्रिय रूप से जमीन और संसाधनों की खोज कर रहे हैं. निवेश प्रोत्साहन केंद्र की स्थापना के बाद से निवेशकों के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाएं बेहद सरल हो गई हैं.
जिससे स्थानीय स्टार्टअप और अनुभवी उद्योगपतियों दोनों का उत्साह बढ़ा है. जबलपुर की भौगोलिक स्थिति जो इसे उत्तर और दक्षिण भारत के बीच एक सेतु की तरह बनाती है यहाँ के औद्योगिक विकास के लिए सबसे बड़ा प्लस पॉइंट साबित हो रही है. रिंग रोड फेज-1 का काम पूरा होने और हवाई कनेक्टिविटी के विस्तार ने उमरिया-डुंगरिया को रसद और वितरण के लिए एक आदर्श स्थान बना दिया है.
전문 हलकों में यह भी चर्चा है कि राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 को उद्योग और रोजगार वर्ष के रूप में मनाए जाने का सीधा लाभ जबलपुर को मिल रहा है. रीज़नल इंडस्ट्री समिट के बाद प्राप्त निवेश प्रस्ताव अब जमीन पर उतरने लगे हैं जिससे न केवल भारी मशीनरी बल्कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को भी नई ऊर्जा मिली है. लिंक्डइन पर मौजूद स्थानीय युवाओं और प्रोफेशनल्स का मानना है कि इन क्षेत्रों के विस्तार से आईटी पार्कों और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में हजारों नए रोजगार पैदा होंगे जिससे प्रतिभा पलायन रुकेगा. जबलपुर में प्रस्तावित ग्रीन फील्ड सिटी और 3200 करोड़ के निवेश की योजनाएं भी इन चर्चाओं के केंद्र में हैं.
महाकौशल क्षेत्र का यह औद्योगिक पुनर्जागरण आने वाले समय में मध्य प्रदेश की जीडीपी में जबलपुर की हिस्सेदारी को कई गुना बढ़ाने की क्षमता रखता है. विशेषज्ञों का कहना है कि हरगढ़ में हो रहे री-डेवलपमेंट और उमरिया-डुंगरिया में मौजूदा इकाइयों की सफलता ने एक ऐसा सकारात्मक वातावरण तैयार किया है जहाँ अब निवेशक लंबी अवधि के प्रोजेक्ट्स पर काम करने के लिए उत्सुक नजर आ रहे हैं. कुल मिलाकर जबलपुर अब एक बड़े बदलाव की दहलीज़ पर खड़ा है जहाँ औद्योगिक विस्तार और आधुनिक निवेश के संगम से शहर की आर्थिक पहचान पूरी तरह बदलने वाली है.
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