ताजमहल का नाम बदलने की चर्चा पर सरकार का बड़ा बयान संसद में साफ किया रुख

ताजमहल का नाम बदलने की चर्चा पर सरकार का बड़ा बयान संसद में साफ किया रुख

प्रेषित समय :21:00:41 PM / Fri, Mar 13th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

देश के सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्मारकों में शामिल Taj Mahal को लेकर एक बार फिर नाम बदलने की चर्चा सामने आई, जब संसद के उच्च सदन Rajya Sabha में इस मुद्दे पर सवाल पूछा गया. इस प्रश्न के बाद सरकार ने स्पष्ट रूप से अपना रुख सामने रखते हुए कहा कि ताजमहल का नाम बदलने का कोई प्रस्ताव फिलहाल सरकार के विचाराधीन नहीं है. सरकार की ओर से दिए गए इस जवाब के बाद लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश की गई है.

दरअसल, उत्तर प्रदेश के Agra में स्थित ताजमहल को लेकर समय-समय पर अलग-अलग तरह की बहसें सामने आती रही हैं. कुछ समूहों द्वारा यह दावा किया जाता रहा है कि ताजमहल एक प्राचीन मंदिर को तोड़कर बनाया गया था और इसका मूल नाम “तेजोमहालय” था. हालांकि इन दावों को लेकर इतिहासकारों और विशेषज्ञों के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं और इस विषय पर कई बार बहस भी हो चुकी है. इसी पृष्ठभूमि में संसद के भीतर भी यह मुद्दा उठाया गया.

प्रश्नकाल के दौरान मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद John Brittas ने सरकार से यह सवाल पूछा कि क्या केंद्र सरकार ताजमहल का नाम बदलने की कोई योजना बना रही है. उन्होंने यह सवाल पूरक प्रश्न के रूप में सदन में रखा. इस सवाल के जवाब में केंद्रीय संस्कृति मंत्री Gajendra Singh Shekhawat ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ताजमहल का नाम बदलने का मंत्रालय के पास कोई प्रस्ताव नहीं है और सरकार इस तरह के किसी कदम पर विचार नहीं कर रही है. मंत्री ने सदन में कहा कि इस विषय में मंत्रालय के स्तर पर कोई योजना नहीं बनाई गई है.

सरकार के इस जवाब के बाद यह स्पष्ट हो गया कि फिलहाल ताजमहल के नाम में किसी प्रकार का बदलाव किए जाने की संभावना नहीं है. हालांकि मंत्री ने इस दौरान ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण और उत्खनन कार्यों को लेकर सरकार की नीतियों पर भी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि पिछले दस वर्षों में ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थलों के उत्खनन और संरक्षण पर पहले की तुलना में काफी अधिक खर्च किया गया है.

इस दौरान तृणमूल कांग्रेस के सांसद Sukhendu Sekhar Ray ने पश्चिम बंगाल में पुरातात्विक स्थलों के उत्खनन को लेकर सवाल पूछा. उन्होंने जानना चाहा कि क्या केंद्र सरकार राज्य में और ऐतिहासिक स्थलों की खुदाई कराने की योजना बना रही है. इसके जवाब में संस्कृति मंत्री ने कहा कि उत्खनन एक सतत प्रक्रिया है और यह उपलब्ध संसाधनों तथा विशेषज्ञों की संख्या पर निर्भर करता है. उन्होंने कहा कि सरकार पुरातात्विक गतिविधियों को लेकर गंभीर है और पिछले दस वर्षों में इस क्षेत्र में खर्च की गई राशि लगभग दोगुनी हो गई है.

मंत्री ने यह भी बताया कि ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण के लिए सरकार लगातार काम कर रही है. उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में संरक्षण गतिविधियों पर लगभग 3,713 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जबकि इससे पहले 2004 से 2014 के बीच इस पर लगभग 1,310 करोड़ रुपये खर्च हुए थे. सरकार का कहना है कि ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखना और उनका संरक्षण करना उसकी प्राथमिकता में शामिल है.

इसके अलावा मंत्रालय ने ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की भी योजना शुरू की है. मंत्री के अनुसार इस पहल के तहत कॉरपोरेट सेक्टर को भी स्मारकों के संरक्षण और विकास कार्यों में शामिल करने की कोशिश की जा रही है और इस योजना को सकारात्मक प्रतिक्रिया भी मिल रही है.

पश्चिम बंगाल से जुड़े एक अन्य सवाल के लिखित जवाब में मंत्री ने बताया कि राज्य में कुल 135 राष्ट्रीय महत्व के स्मारक और पुरातात्विक स्थल हैं, जिन्हें Archaeological Survey of India द्वारा संरक्षित किया जाता है. इनमें से कुछ स्मारकों पर प्रवेश शुल्क भी लिया जाता है और उनके रखरखाव की जिम्मेदारी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पास है.

ताजमहल को लेकर संसद में उठे इस सवाल के बाद एक बार फिर यह विषय सार्वजनिक चर्चा में आ गया है. हालांकि सरकार की ओर से साफ किया गया है कि फिलहाल इस विश्व प्रसिद्ध स्मारक का नाम बदलने का कोई प्रस्ताव नहीं है. विशेषज्ञों का मानना है कि ताजमहल भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है और यह दुनिया भर के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.

हर साल लाखों पर्यटक ताजमहल को देखने के लिए आगरा पहुंचते हैं. मुगल सम्राट शाहजहां द्वारा बनवाया गया यह स्मारक प्रेम और स्थापत्य कला का प्रतीक माना जाता है. यही वजह है कि ताजमहल न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में ऐतिहासिक धरोहर के रूप में प्रसिद्ध है. संसद में उठे सवाल और सरकार के जवाब के बाद फिलहाल यह स्पष्ट हो गया है कि ताजमहल का नाम यथावत रहेगा और सरकार का ध्यान इसके संरक्षण और ऐतिहासिक स्थलों के विकास पर केंद्रित है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-