देश में एलपीजी की कथित कमी को लेकर राजनीति तेज हो गई है. अखिलेश यादव ने केंद्र की Bharatiya Janata Party सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि देश में एलपीजी संकट खराब तैयारी का परिणाम है. उन्होंने रविवार को Mumbai में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान यह बयान दिया और दावा किया कि देशभर में गैस की कमी से आम लोग प्रभावित हो रहे हैं.
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पार्टी के “विजन इंडिया” कार्यक्रम में हिस्सा लेने मुंबई पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार देश को ‘विश्वगुरु’ बनाने की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर आम लोगों की समस्याओं को दूर करने में असफल रही है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब देश में ‘एलपीजी’ नहीं बल्कि “लापता गैस” की स्थिति बन गई है.
अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि जब देश में गैस की कमी की आशंका थी तो केंद्र सरकार ने पहले से क्या तैयारी की थी. उन्होंने कहा कि यह समस्या केवल किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई हिस्सों में लोग इससे प्रभावित हो रहे हैं. उनके अनुसार सरकार को समय रहते व्यवस्था करनी चाहिए थी ताकि ऐसी स्थिति पैदा न हो.
अपने संबोधन के दौरान अखिलेश यादव ने भाजपा नेतृत्व और शासन व्यवस्था पर भी सवाल उठाए. उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश में कई मुद्दों को लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई है. उन्होंने यह भी कहा कि कुछ फैसले ऐसे हैं जो समाज में अनावश्यक तनाव पैदा करते हैं.
इस दौरान उन्होंने Yogi Adityanath को लेकर भी टिप्पणी की. अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि प्रयागराज के माघ मेले में एक धार्मिक संत को पवित्र स्नान करने से रोकने का मामला सामने आया था और बाद में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक विवाद भी हुआ. उन्होंने भाजपा को लेकर कहा कि यह एक पार्टी की तरह नहीं बल्कि एक समूह की तरह काम कर रही है.
यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा से जुड़े एक सवाल पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी. परीक्षा में “पंडित” शब्द को एक विकल्प के रूप में शामिल किए जाने पर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे प्रश्न पत्र तैयार करने के पीछे कौन लोग हैं और उनकी मंशा क्या है, इस पर भी विचार किया जाना चाहिए.
महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए अखिलेश यादव ने Raj Thackeray द्वारा मुंबई में उत्तर भारतीयों के प्रवास को लेकर की गई टिप्पणियों पर भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि उनकी राज ठाकरे से अच्छे संबंध हैं और यह बयान राजनीतिक रणनीति या भावनात्मक मुद्दा भी हो सकता है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जब लोग एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं तो विकास और प्रगति को बढ़ावा मिलता है.
देश में भाषा के मुद्दे पर भी उन्होंने अपनी राय रखी. महाराष्ट्र में स्कूलों में हिंदी को शामिल करने को लेकर चल रही बहस पर अखिलेश यादव ने कहा कि वह सभी भारतीय भाषाओं के पक्ष में हैं. उनके अनुसार आज तकनीक के माध्यम से किसी भी भाषा को सीखना और समझना पहले से कहीं अधिक आसान हो गया है.
इसके अलावा उन्होंने चुनाव आयोग को लेकर भी सवाल उठाए. अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग कुछ मामलों में मनमाने ढंग से काम कर रहा है और मतदाता सूची में नाम हटाने को लेकर भी विवाद सामने आए हैं. उनका दावा था कि कई लोगों के नाम सूची से हटाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं.
एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं और बड़े हादसों के मामलों में संदेह होना स्वाभाविक है और ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है.
मुंबई में हुए इस कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने राष्ट्रीय राजनीति, शासन व्यवस्था और कई सामाजिक मुद्दों पर अपनी पार्टी का दृष्टिकोण भी रखा. उनका कहना था कि देश में विकास और प्रगति तभी संभव है जब सरकार आम लोगों की समस्याओं को प्राथमिकता दे और समय रहते आवश्यक कदम उठाए. फिलहाल उनके इस बयान के बाद एलपीजी संकट को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

