नई दिल्ली. अपने बेबाक अंदाज और तीखे सवालों के लिए मशहूर वरिष्ठ टीवी पत्रकार अर्नब गोस्वामी एक बार फिर से बड़ी कानूनी मुश्किल में घिरते नजर आ रहे हैं. दिल्ली हाई कोर्ट ने कांग्रेस पार्टी की तरफ से दायर किए गए एक अहम मानहानि केस में सख्त रुख अपनाते हुए मंगलवार 17 मार्च को अर्नब गोस्वामी को तलब कर लिया है. अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए गोस्वामी को समन भेजने का स्पष्ट आदेश जारी किया है, जिसके बाद से मीडिया जगत से लेकर सियासी गलियारों तक हलचल काफी तेज हो गई है.
टीवी शो में किए गए दावे पर मानहानि केस
यह पूरा विवाद अर्नब गोस्वामी के एक टीवी शो के दौरान किए गए उस विवादित दावे से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने दर्शकों के सामने कहा था कि देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस का तुर्की में भी अपना एक दफ्तर मौजूद है. इस बयान के प्रसारित होने के बाद कांग्रेस पार्टी ने कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे अपनी छवि खराब करने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया और अर्नब के खिलाफ मानहानि का बड़ा दावा ठोक दिया. कांग्रेस ने अपनी राजनीतिक साख को पहुंचे नुकसान की भरपाई के तौर पर गोस्वामी से 2 करोड़ रुपये के भारी-भरकम हर्जाने की मांग की है.
जारी किया समन, चार हफ्ते में मांगा जवाब
रिपोर्ट के मुताबिक, इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस मिनी पुष्करणा ने तत्काल कोई भी अंतरिम आदेश पारित करने से तो साफ इनकार कर दिया, लेकिन उन्होंने प्रतिवादी को समन जारी करने का फैसला सुनाया. जस्टिस पुष्करणा ने अदालत में कहा कि यह प्रसारण मई 2025 में हुआ था, इसलिए वे समन जारी करेंगी. वहीं, कांग्रेस पार्टी के वकील ने मजबूती से दलील दी कि यह आपत्तिजनक सामग्री इंटरनेट पर आज भी मौजूद है और इसके समर्थन में कई आर्टिकल भी इंटरनेट पर तैर रहे हैं. इस पर जज ने प्रतिवादियों को सभी माध्यमों से समन और अंतरिम निषेधाज्ञा के लिए नोटिस जारी करते हुए महज चार सप्ताह के भीतर अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने का कड़ा निर्देश दिया है. अब इस मामले की अगली सुनवाई मई महीने में निर्धारित की गई है.
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