राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग पर कांग्रेस का कड़ा एक्शन, ओडिशा के तीन विधायकों को पार्टी से बाहर किया

राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग पर कांग्रेस का कड़ा एक्शन, ओडिशा के तीन विधायकों को पार्टी से बाहर किया

प्रेषित समय :21:59:49 PM / Tue, Mar 17th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

भुवनेश्वर.राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी लाइन से हटकर मतदान करना ओडिशा में कांग्रेस के तीन विधायकों को भारी पड़ गया है। कांग्रेस ने कड़ा रुख अपनाते हुए तीनों विधायकों को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। जिन विधायकों पर कार्रवाई की गई है, उनमें Sofia Firdous, रमेश जेना और दशरथ गमांगो शामिल हैं। इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने पार्टी व्हिप की अवहेलना करते हुए भारतीय जनता पार्टी समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में वोट किया।

कांग्रेस के इस फैसले से राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। पार्टी की ओर से जारी बयान में स्पष्ट कहा गया कि जो भी कांग्रेस के साथ विश्वासघात करता है, वह देश के साथ विश्वासघात करता है। हालांकि अंग्रेजी में जारी संदेश में ‘expelled’ यानी निष्कासित शब्द का इस्तेमाल किया गया, जबकि ओड़िया नोटिस में ‘suspended’ यानी निलंबित शब्द सामने आया, लेकिन दोनों ही स्थितियों में यह स्पष्ट है कि संबंधित विधायकों पर सख्त कार्रवाई की गई है।

इस पूरे घटनाक्रम की जड़ राज्यसभा चुनाव में हुई क्रॉस वोटिंग को माना जा रहा है, जिसने ओडिशा में बीजेपी को बढ़त दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बताया जा रहा है कि कांग्रेस के इन विधायकों ने पार्टी के निर्देशों के विपरीत जाकर वोटिंग की, जिससे चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल गए। विशेष रूप से चौथी सीट के चुनाव में यह क्रॉस वोटिंग निर्णायक साबित हुई, जहां बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय ने जीत हासिल की।

राज्य की राजनीतिक स्थिति पर नजर डालें तो 147 सदस्यीय विधानसभा में Bharatiya Janata Party के पास 79 विधायक हैं और उसे तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है, जिससे उसकी कुल संख्या 82 हो जाती है। वहीं Biju Janata Dal के पास प्रभावी रूप से 48 विधायक हैं, जबकि Indian National Congress के पास 14 विधायक हैं। इस स्थिति में क्रॉस वोटिंग ने बीजेपी को स्पष्ट लाभ पहुंचाया।

बताया जा रहा है कि कांग्रेस ने इस चुनाव में बीजेडी के उम्मीदवार का समर्थन करने का निर्णय लिया था, लेकिन इस फैसले को लेकर पार्टी के भीतर असहमति भी सामने आई थी। विशेष रूप से पहली बार विधायक बनीं सोफिया फिरदौस ने मतदान से पहले ही पार्टी के इस निर्णय पर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि इस मुद्दे पर विधायकों से कोई राय नहीं ली गई और उन्हें भरोसे में नहीं लिया गया।

सोफिया फिरदौस ने बीजेडी को लेकर भी तीखी टिप्पणी की थी और कहा था कि बीजेडी अक्सर महत्वपूर्ण मुद्दों पर बीजेपी का समर्थन करती रही है, इसलिए उसके उम्मीदवार का समर्थन करना उचित नहीं है। इसी असहमति के चलते उन्होंने पार्टी लाइन से अलग जाकर मतदान किया, जो अंततः उनके खिलाफ कार्रवाई का कारण बना।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम ओडिशा की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत दे रहा है। एक ओर जहां कांग्रेस और बीजेडी के बीच संभावित गठबंधन की चर्चा थी, वहीं इस तरह की क्रॉस वोटिंग ने उस संभावना पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीजेडी प्रमुख Naveen Patnaik ने भी इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि समय ही बताएगा कि भविष्य में राजनीतिक समीकरण क्या रूप लेते हैं।

गौरतलब है कि सोफिया फिरदौस 2024 में पहली बार विधायक चुनी गई थीं और वह ओडिशा की पहली मुस्लिम महिला विधायक होने का गौरव भी रखती हैं। उन्होंने कटक के बाराबती क्षेत्र से चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी। राजनीति में आने से पहले वह एक उद्यमी के रूप में कार्य कर चुकी हैं और रियल एस्टेट क्षेत्र में भी उनका अनुभव रहा है।

इस पूरे मामले ने एक बार फिर पार्टी अनुशासन और व्हिप के महत्व को उजागर कर दिया है। कांग्रेस का यह कड़ा कदम यह संदेश देने की कोशिश है कि पार्टी लाइन से हटकर कोई भी निर्णय लेने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं दूसरी ओर, इस घटनाक्रम ने राज्यसभा चुनाव के दौरान होने वाली राजनीतिक रणनीतियों और अंतर्कलह को भी सामने ला दिया है।

फिलहाल इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी का दौर जारी है और आने वाले समय में इसके और भी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। ओडिशा की राजनीति में यह घटनाक्रम एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जिसने न केवल चुनावी परिणामों को प्रभावित किया, बल्कि दलों के बीच संबंधों और आंतरिक अनुशासन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-